लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को नए साल की बड़ी सौगात दी है। अब प्रदेश में नया बिजली कनेक्शन लेना न केवल पहले से सस्ता हो गया है, बल्कि प्रक्रिया भी काफी आसान बना दी गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने नई कॉस्ट डाटा बुक–2025 जारी करते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर और नए बिजली कनेक्शन की लागत में भारी कटौती की घोषणा की है। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही एस्टीमेट व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
- योगी सरकार में सस्ता हुआ नया बिजली कनेक्शन
- स्मार्ट प्रीपेड मीटर के दामों में बड़ी कटौती
- नई कॉलोनियों को भी बड़ी राहत
स्मार्ट प्रीपेड मीटर हुए सस्ते
नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमतों में ऐतिहासिक कटौती की गई है। अब सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 6016 रुपये से घटाकर मात्र 2800 रुपये कर दी गई है। वहीं थ्री फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब 11342 रुपये की जगह सिर्फ 4100 रुपये में लगाया जाएगा। इससे खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। अब तक उपभोक्ताओं को मीटर, तार, खंभा और अन्य सामग्री के नाम पर भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती थी, लेकिन नई नीति के बाद यह बोझ काफी कम हो जाएगा।
खत्म हुई एस्टीमेट व्यवस्था
योगी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि नए बिजली कनेक्शन के लिए एस्टीमेट प्रणाली को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब उपभोक्ताओं को अनुमानित लागत के नाम पर अनिश्चित और कई बार अत्यधिक शुल्क नहीं देना पड़ेगा। नई व्यवस्था के अनुसार, 300 मीटर तक दूरी और 150 किलोवाट तक लोड (निजी नलकूप को छोड़कर) के मामलों में अलग से कोई एस्टीमेट नहीं बनेगा। इसके बजाय तय फिक्स चार्ज के आधार पर ही कनेक्शन दिया जाएगा।
पहले ऐसे ही कनेक्शनों के लिए खंभा, तार और ट्रांसफार्मर के नाम पर 10 हजार से 20 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। इस फैसले से खासतौर पर मध्यम वर्ग और नए मकान बनाने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
नई कॉलोनियों को बड़ी राहत
नई कॉस्ट डाटा बुक–2025 के तहत अविकसित और गैर-विद्युतीकृत नई कॉलोनियों के निवासियों को भी बड़ी राहत दी गई है। अब ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को केवल मीटरिंग शुल्क देना होगा।
बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के नाम पर लिया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। नियामक आयोग का तर्क है कि बुनियादी ढांचे की लागत पहले ही विकास शुल्क के रूप में वसूली जा चुकी होती है, इसलिए उपभोक्ताओं से दोबारा पैसा लेना उचित नहीं है।
यही व्यवस्था बहुमंजिला इमारतों में मल्टी-पॉइंट कनेक्शन लेने वालों पर भी लागू होगी।
बीपीएल और गरीब उपभोक्ताओं को विशेष राहत
योगी सरकार की इस नीति में गरीब और बीपीएल (Below Poverty Line) उपभोक्ताओं का खास ध्यान रखा गया है।
-
बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए प्रोसेसिंग शुल्क और सुरक्षा जमा राशि शून्य कर दी गई है।
-
100 मीटर तक दूरी के लिए केवल 500 रुपये अग्रिम लेकर कनेक्शन दिया जाएगा।
-
शेष राशि 12 महीनों तक 45 रुपये की हर माह किस्त में आपके बिजली बिल के साथ जमा की जा सकेगी।
इसके अलावा, सिंगल फेज कनेक्शन लेने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को 2800 रुपये की मीटर लागत भी आसान किस्तों में चुकाने की सुविधा दी गई है। आवेदन के समय केवल 1000 रुपये देने पर कनेक्शन जारी कर दिया जाएगा, जबकि शेष राशि 24 समान मासिक किस्तों में जमा की जा सकेगी।
पहले से मीटर लगवाने वालों के लिए भी विकल्प
नियामक आयोग ने यह भी साफ किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने 9 सितंबर 2025 के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए 6016 रुपये जमा किए हैं, उन्हें अतिरिक्त राशि की वापसी या समायोजन का विकल्प देने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले से भुगतान कर चुके उपभोक्ताओं के साथ भी न्याय सुनिश्चित होगा।
सॉफ्टवेयर अपडेट का निर्देश
आयोग के सचिव सुमित अग्रवाल ने बताया कि सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि 12 जनवरी 2026 तक अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में जरूरी बदलाव कर लें, ताकि नई दरों के अनुसार ही उपभोक्ताओं से शुल्क वसूला जाए और किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
क्या होती है कॉस्ट डाटा बुक
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी की गई कॉस्ट डाटा बुक–2025 अगले दो वर्षों तक मान्य रहेगी। इसमें बिजली कनेक्शन से जुड़े सभी शुल्क—जैसे प्रोसेसिंग फीस, सुरक्षा जमा, सप्लाई चार्ज, सामग्री लागत, स्मार्ट मीटर लागत और अन्य तकनीकी शुल्क—की दरें तय की जाती हैं। इससे पहले यह बुक वर्ष 2019 में संशोधित की गई थी।
उपभोक्ताओं को मिलेगा बड़ा फायदा
कुल मिलाकर योगी सरकार का यह फैसला प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। सस्ता मीटर, तय शुल्क और आसान प्रक्रिया से अब नया बिजली कनेक्शन लेना न तो जेब पर भारी पड़ेगा और न ही महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। यह कदम “ईज ऑफ लिविंग” और पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।