दिल्ली में हादसे थम नहीं रहे, सवालों में सिस्टम…2026 में अब तक 6 जानलेवा घटना-48 लोगों की मौत
नई दिल्ली: साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना ने दिल्ली में अवैध निर्माण, कमजोर स्ट्रक्चर और फायर सेफ्टी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बचाव अभियान के साथ जांच भी जारी है।
लेकिन सत्य निकेतन की यह त्रासदी कोई अकेली घटना नहीं है। 2026 में अब तक दिल्ली में कम से कम 6 बड़ी और जानलेवा घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें करीब 48 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें सैदुल्लाजाब में इमारत गिरने से 6 मौतें, पालम में आग से 9 मौतें, हौज रानी-मालवीय नगर के बड़े अग्निकांड में 23 मौतें, रोहिणी में इमारत गिरने से 3 मौतें, करोल बाग में इमारत का हिस्सा गिरने से 1 मौत और अब सत्य निकेतन में 6 मौतें शामिल हैं।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ? बड़ा सवाल यह है कि एक के बाद एक हादसों के बावजूद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही है?
50-60 गज के प्लॉट, चार-पांच मंजिल की इमारतें
सत्य निकेतन जैसे इलाके में समस्या और गंभीर है। यह पूरा क्षेत्र स्टूडेंट्स और पीजी का बड़ा हब है। छोटी-छोटी जमीनों पर कई मंजिल की इमारतें खड़ी हैं और बड़ी संख्या में उनका इस्तेमाल पीजी, हॉस्टल और कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
कई पुराने मकानों में बाद में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं। कहीं बेसमेंट बनाया गया तो कहीं बेसमेंट में निर्माण या बदलाव का काम शुरू कर दिया गया। सवाल यह है कि क्या पुराने स्ट्रक्चर पर अतिरिक्त भार डालने से पहले उसकी संरचनात्मक क्षमता की जांच हुई?
सैदुल्लाजाब हादसे की जांच में भी सामने आया था कि पुराने स्ट्रक्चर पर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया था और निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन की जांच हुई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी।
संकरी गलियां और मुश्किल रेस्क्यू
समस्या केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है।
ऐसे इलाकों में गलियां बेहद संकरी हैं। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें और ऊपर आवासीय या पीजी इस्तेमाल का मिश्रण दिखाई देता है।
ऐसे में अगर किसी इमारत में आग लग जाए या स्ट्रक्चर अचानक गिर जाए तो फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और राहत-बचाव टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है।
पालम की घटना में भी बचाव अभियान को लेकर सवाल उठे। मार्च में चार मंजिला इमारत में लगी आग में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हुई थी। बाद की मजिस्ट्रेट जांच में फायर सर्विस के हाई-राइज रेस्क्यू उपकरण और ऑपरेशन से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं।
आग की घटनाएं भी दे रही हैं चेतावनी
दिल्ली में सिर्फ बिल्डिंग गिरने का खतरा नहीं है। आग की घटनाएं भी लगातार चिंता बढ़ा रही हैं।
जून में दक्षिण दिल्ली के हौज रानी-मालवीय नगर इलाके में बी एंड बी में लगी आग ने 23 लोगों की जान ले ली। जांच में सामने आया कि इमारत में फायर एग्जिट और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर कमियां थीं। मजिस्ट्रेट जांच ने कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
यानी एक पैटर्न साफ दिखाई देता है—अनधिकृत निर्माण, नियमों का उल्लंघन, कमर्शियल इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और हादसे के बाद कार्रवाई।
हादसे के बाद कार्रवाई, लेकिन सवाल वही
सैदुल्लाजाब हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध और अनधिकृत निर्माण का शहरव्यापी ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। MCD की तरफ से कार्रवाई और सीलिंग की बात भी सामने आई।
लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई हादसे से पहले क्यों नहीं होती?
हर बड़े हादसे के बाद जांच बैठती है। कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई होती है। कुछ इमारतें सील होती हैं। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ होती है। लेकिन कुछ समय बाद वही निर्माण फिर शुरू होने के आरोप सामने आते हैं।
सैदुल्लाजाब की जांच में तो MCD की निगरानी और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे। जांच रिपोर्ट ने यह तक कहा कि शिकायतों और नियम उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सत्य निकेतन ने फिर वही सवाल खड़े किए
सत्य निकेतन का हादसा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय इलाका है।
यहां रहने वाले कई छात्र दूसरे राज्यों से दिल्ली आते हैं। वे पीजी और हॉस्टल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उनके लिए सबसे बड़ा सवाल है—जिस इमारत में वे किराए पर रह रहे हैं, क्या वह वास्तव में सुरक्षित है?
क्या पीजी चलाने से पहले स्ट्रक्चरल सेफ्टी की नियमित जांच होती है?
क्या बेसमेंट और अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति की जांच होती है?
क्या फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र की वास्तविक जांच होती है?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो क्या सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई होगी या उससे पहले ही खतरे वाली इमारत को खाली कराया जाएगा?
2026 का दिल्ली का रिकॉर्ड एक गंभीर तस्वीर दिखाता है। साल की शुरुआत से अब तक कम से कम 6 बड़े और जानलेवा हादसों में करीब 48 लोगों की मौत हो चुकी है।सैदुल्लाजाब ने चेताया, पालम ने चेताया, हौज रानी ने चेताया, रोहिणी ने चेताया, करोल बाग ने चेताया और अब सत्य निकेतन ने फिर वही चेतावनी दी है।
सवाल अब यह नहीं होना चाहिए कि अगला हादसा कहां होगा?
सवाल यह होना चाहिए कि अगले हादसे को रोकने के लिए प्रशासन आज क्या कर रहा है?
क्योंकि हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे से व्यवस्था की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। असली जवाबदेही तब होगी जब खतरनाक और अवैध निर्माण की पहचान हादसा होने से पहले हो, कार्रवाई हादसे के बाद नहीं बल्कि खतरा दिखते ही हो और जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहे।