नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी का बदल दिया गया है। अब इसे प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी सोसाइटी के नाम से जाना जाएगा। सोसाइटी की एक विशेष बैठक में इसका नाम बदला गया है। विशेष बैठक की अध्यक्षता देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बता दें रक्षा मंत्री के नाते राजनाथ सिंह सोसायटी के उपाध्यक्ष भी हैं।
- नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी का बदला
- परिषद की 162वीं बैठक में बदला नाम
- नेहरु मेमोरियल का नाम बदले जाने पर सियासत
- प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी सोसाइटी नया नाम
- बीजेपी और आरएसएस की ओंछी मानसिकता—खरगे
नाम बदले जाने पर कांग्रेस नाराज
वहीं नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी का नाम बदले जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा जिनका अपना इतिहास नहीं है। वे दूसरों के इतिहास को मिटाने पर उतारू हैं। नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी स्मारक का नाम बदलने का प्रयास दरअसल आधुनिक भारत के निर्माता और लोकतंत्र के निर्भीक संरक्षक रहे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तित्व को छोटा नहीं कर सकता। खरगे ने इसे बीजेपी और RSS की ओछी मानसिकता करार देते हुए कहा
तानाशाही रवैये को ही दर्शाता है।
प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी सोसाइटी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में तीन मूर्ति परिसर, नई दिल्ली में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक संग्रहालय स्थापित करने का विचार रखा था। कार्यकारी परिषद, NMML ने 25-11-2016 को आयोजित अपनी 162वीं बैठक में तीन मूर्ति एस्टेट में सभी प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय के निर्माण को मंजूरी दी। परियोजना पूरी हो गई और प्रधानमंत्री संग्रहालय को 21 अप्रैल 2022 से जनता के लिए खोल दिया गया है। कार्यकारी परिषद ने बाद में महसूस किया कि संस्था का नाम वर्तमान गतिविधियों को प्रतिबिंबित करना चाहिए जिसमें अब एक संग्रहालय भी शामिल है जो स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र की सामूहिक यात्रा को दर्शाता है और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक प्रधानमंत्री के योगदान को उजागर करता है। संग्रहालय एक सहज मिश्रण है जो पुनर्निर्मित और नवीनीकृत नेहरू संग्रहालय भवन से शुरू होता है, जो अब जवाहरलाल नेहरू के जीवन और योगदान पर तकनीकी रूप से उन्नत प्रदर्शन के साथ पूरी तरह से अद्यतन है। एक नए भवन में स्थित यह संग्रहालय तब इस कहानी को बताता है कि कैसे हमारे प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न चुनौतियों के माध्यम से देश को नेविगेट किया और देश की सर्वांगीण प्रगति सुनिश्चित की। इस प्रकार, यह सभी प्रधानमंत्रियों को मान्यता देता है। जिससे संस्थागत स्मृति का लोकतंत्रीकरण होता है।
नया नाम दर्शाता है लोकतंत्र के प्रति आस्था
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अपने भाषण में नाम में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा प्रधानमंत्री संग्रहालय लोकतंत्र के प्रति देश की गहरी अधिक प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है। इतना ही नहीं संस्था का नाम अपने नए रूप को भी यह दर्शाता है। वहीं सोसाइटी के उपायक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में नाम में परिवर्तन के प्रस्ताव का स्वागत किया। क्योंकि अपने नए रूप में संस्थान जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान और उनकी प्रतिक्रियाओं को प्रदर्शित करता है। उनके सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियाँ। प्रधानमंत्रियों को एक संस्था के रूप में बताते हुए और विभिन्न प्रधानमंत्रियों की यात्रा की तुलना एक इंद्रधनुष के विभिन्न रंगों से करते हुए राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एक इंद्रधनुष को सुंदर बनाने के लिए उसके सभी रंगों का आनुपातिक रूप से प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए। इस प्रकार प्रस्ताव को एक नया नाम दिया गया है। हमारे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का सम्मान किया गया है और यह सामग्री में लोकतांत्रिक है।