नए साल की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए खास और ऐतिहासिक होने जा रही है। जनवरी महीने में इंडियन नेवी को दो नए अत्याधुनिक युद्धपोत मिलने वाले हैं। इनमें एक है नीलगिरी क्लास का फ्रिगेट ‘तारागिरी’ और दूसरा है शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’। इन दोनों वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की समुद्री ताकत, निगरानी क्षमता और सुरक्षा तैयारियों को नई धार मिलेगी।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, तारागिरी और अंजदीप दोनों ही जनवरी में औपचारिक रूप से नेवी में कमीशन किए जा सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
तारागिरी: नीलगिरी क्लास का चौथा अत्याधुनिक फ्रिगेट
‘तारागिरी’ नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट होगा। भारतीय नौसेना को इस क्लास के कुल 7 स्टेल्थ फ्रिगेट मिलने हैं। ये सभी फ्रिगेट प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाए जा रहे हैं, जो भारतीय नौसेना के शिपबिल्डिंग रोडमैप का एक बेहद अहम और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।
नीलगिरी क्लास के ये फ्रिगेट आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। इनमें स्टेल्थ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ये दुश्मन के रडार पर आसानी से नजर नहीं आते। यही वजह है कि इन्हें भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक और ताकतवर युद्धपोतों में गिना जाता है।
आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस होगा तारागिरी
Pp तारागिरी को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर सिस्टम से लैस किया गया है। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली सर्फेस-टू-सर्फेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ तैनात की जाएगी, जो दुश्मन के जहाजों और तटीय ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम है। इसके अलावा तारागिरी में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, एडवांस्ड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, और अत्याधुनिक सेंसर व रडार सिस्टम शामिल हैं।
ये सभी सिस्टम मिलकर फ्रिगेट को एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में बेहद सक्षम बनाते हैं। तारागिरी न केवल युद्ध की स्थिति में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि शांति काल में समुद्री निगरानी और शक्ति प्रदर्शन में भी उपयोगी साबित होगा।
प्रोजेक्ट 17A: आत्मनिर्भर भारत की झलक
नीलगिरी क्लास के फ्रिगेट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का मजबूत उदाहरण हैं। प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाए जा रहे इन युद्धपोतों में बड़ी संख्या में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इससे न सिर्फ देश की रक्षा क्षमता बढ़ रही है, बल्कि भारतीय शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री को भी मजबूती मिल रही है।
अंजदीप: शैलो वॉटर क्राफ्ट में चौथा शामिल
तारागिरी के साथ-साथ जनवरी में नौसेना को शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ भी मिलने जा रहा है। अंजदीप एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रेणी का युद्धपोत है और यह इस कैटेगरी का चौथा पोत होगा।
भारतीय नौसेना को कुल 16 शैलो वॉटर क्राफ्ट मिलने हैं, जिनमें से तीन पहले ही नेवी में शामिल हो चुके हैं। अंजदीप के शामिल होने से तटीय और उथले समुद्री इलाकों में नौसेना की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।
सबमरीन रोधी अभियानों में अहम भूमिका
शैलो वॉटर क्राफ्ट अंजदीप को खास तौर पर सबमरीन निगरानी और रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह युद्धपोत
दुश्मन पनडुब्बियों की निगरानी,
उनकी खोज और पहचान, सर्च एंड रेस्क्यू मिशन, और निम्न-तीव्रता वाले समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में अंजदीप जैसे शैलो वॉटर क्राफ्ट नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई धार
तारागिरी और अंजदीप के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ब्लू वॉटर और लिटरल वॉटर ऑपरेशंस क्षमता दोनों में इजाफा होगा। एक ओर जहां तारागिरी जैसे स्टेल्थ फ्रिगेट खुले समुद्र में भारत की ताकत को दर्शाएंगे, वहीं अंजदीप जैसे शैलो वॉटर क्राफ्ट तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों को मजबूत करेंगे।
कुल मिलाकर, नए साल की शुरुआत में मिलने वाले ये दोनों युद्धपोत भारतीय नौसेना की operational readiness, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले साबित होंगे।





