National Herald case: क्यों सोनिया और राहुल गांधी हैं जांच के घेरे में? जानिए पूरा मामला

नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर से चर्चा में है। इस केस में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह केस पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और गांधी परिवार को निशाना बनाने के लिए खड़ा किया गया है। लेकिन यह समझने के लिए पहले जानना जरूरी है कि आखिर नेशनल हेराल्ड क्या है और विवाद की जड़ें कहां से जुड़ी हैं।

क्या है नेशनल हेराल्ड?
‘नेशनल हेराल्ड’ एक अंग्रेज़ी अखबार था जिसकी शुरुआत 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसका प्रकाशन Associated Journals Limited (AJL) नाम की कंपनी करती थी, जिसकी स्थापना 1937 में हुई थी। इस कंपनी में लगभग 5,000 स्वतंत्रता सेनानी शेयर होल्डर थे।

AJL दो और अखबार प्रकाशित करती थी:
हिंदी में: नवजीवन
उर्दू में: क़ौमी आवाज़

आजादी की लड़ाई के दौरान नेशनल हेराल्ड को ब्रिटिश सरकार ने 1942 में बंद कर दिया था, लेकिन तीन साल बाद यह फिर से शुरू हुआ और लंबे समय तक कांग्रेस का विचार मंच बना रहा।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
2008-2010 तक यह अखबार आर्थिक रूप से कमजोर हो गया और इसका संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने इस घाटे में चल रही AJL को ‘यंग इंडिया’ नाम की एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी को ट्रांसफर कर दिया। इस यंग इंडिया में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की लगभग 76% हिस्सेदारी है।

कथित आरोप ये हैं:
कांग्रेस पार्टी ने AJL को 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था।
बाद में यह कर्ज यंग इंडिया को मात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया।
इसका मतलब था कि यंग इंडिया को AJL की करोड़ों की संपत्ति (दिल्ली, मुंबई आदि में) मिल गई।

किस आधार पर हुआ केस?
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में एक आपराधिक केस दर्ज कराया, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांधी परिवार ने यह संपत्ति धोखाधड़ी और साजिश से अपने कब्जे में ली है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इसी केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी को इस केस में पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर बुलाया गया है।

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