राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2025: डर नहीं, उम्मीद की कहानी – भारत में कैंसर के खिलाफ नई लड़ाई
कैंसर: एक वैश्विक चुनौती, लेकिन भारत में उम्मीद की किरण। आज का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक संदेश है — कैंसर से डरना नहीं, जागरूक होना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले दर्ज हुए और 97 लाख लोगों की मौत हुई। भारत की बात करें तो, हर 1 लाख लोगों में से लगभग 100 लोग कैंसर से पीड़ित पाए जाते हैं। यह आंकड़े भले ही चिंताजनक हैं, लेकिन आज की कहानी निराशा नहीं, उम्मीद की है।
- कैंसर से जंग, उम्मीद की जीत
- भारत की नई स्वास्थ्य क्रांति
- जीवन बचाने का राष्ट्रीय संकल्प
- अब गांव तक पहुंचेगा इलाज
- कैंसर पर वार, विज्ञान के साथ
- सरकार की नई स्वास्थ्य रणनीति
- हर जिले में डे केयर सेंटर
- कैंसर फ्री भारत की दिशा
- आशा, इलाज और आत्मनिर्भर भारत
- कैंसर से लड़ता नया भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया संदेश: “कैंसर के खिलाफ भारत तैयार है। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बीमारी के खिलाफ चल रही सरकारी पहल की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने कहा भारत ने अब केवल इलाज की दिशा में नहीं, बल्कि रोकथाम और शोध की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। हर नागरिक को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा देना हमारी प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य बजट 2025-26 में बड़ा फोकस: हर जिले में कैंसर सेंटर
वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय को 99,858 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
सरकार की प्रमुख घोषणा तीन साल में हर जिले में डे केयर कैंसर सेंटर। सिर्फ 2025-26 में ही 200 नए कैंसर डे सेंटर शुरू होंगे। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को अब इलाज के लिए मेट्रो शहरों तक नहीं जाना पड़ेगा।
किफायती इलाज: दवाइयों से सीमा शुल्क हटाया गया
कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली 36 जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी गई है। इससे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और अन्य दवाओं की कीमतों में सीधी कमी आएगी। आम मरीज के लिए यह राहत किसी वरदान से कम नहीं है।
भारत के कैंसर प्रबंधन की तीन मजबूत योजनाएं
NPCDCS कार्यक्रम
(राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम योजना)
देशभर में 770 जिला NCD क्लीनिक, 233 कार्डियक केयर यूनिट, 372 डे केयर सेंटर और 6,410 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय हैं। इन केंद्रों पर स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और मुख कैंसर की मुफ्त जांच की जाती है। शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता दर बढ़ जाती है।
आयुष्मान भारत योजना
2018 में शुरू हुई इस योजना ने अब तक करोड़ों मरीजों को राहत दी है। कैंसर की सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी सभी का कवरेज इस योजना में शामिल है। 2024 तक 90% कैंसर मरीजों ने इसी योजना के तहत इलाज शुरू किया।
स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी निधि (HMCPF)
गरीबी रेखा से नीचे के मरीजों को 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता। जरूरत पड़ने पर 15 लाख रुपये तक मदद उपलब्ध। 27 क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों पर यह सुविधा सक्रिय। भारत में आधुनिक कैंसर अनुसंधान: अब इलाज भी ‘मेड इन इंडिया’। भारत अब सिर्फ इलाज कराने वाला नहीं, बल्कि इलाज बनाने वाला देश बन गया है। अप्रैल 2024 में भारत ने विकसित की पहली स्वदेशी CAR-T सेल थेरेपी — NexCAR19। IIT बॉम्बे, टाटा मेमोरियल सेंटर और ImmunoACT ने इसे मिलकर बनाया। रक्त कैंसर के मरीजों के लिए यह अत्याधुनिक और सस्ती थेरेपी है। सितंबर 2024 में भारत ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ “क्वाड कैंसर मूनशॉट” पहल शुरू की। इसका लक्ष्य: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन।
राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड: दुनिया का सबसे बड़ा कैंसर नेटवर्क
2012 में बना यह ग्रिड आज 287 संस्थानों को जोड़ता है। हर साल 7.5 लाख से अधिक मरीजों का इलाज इसी नेटवर्क के ज़रिए होता है। यह भारत के मेडिकल रिसर्च और उपचार का रीढ़ की हड्डी
बन चुका है।
जागरूकता ही सबसे बड़ी दवा
कैंसर से लड़ाई सिर्फ अस्पतालों में नहीं, समाज में भी लड़ी जाती है। सरकार ने कई स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाए हैं। ‘Eat Right India’ (FSSAI): स्वस्थ भोजन की आदतों को बढ़ावा देता है। ‘Fit India Movement’: शारीरिक सक्रियता और व्यायाम को प्रोत्साहित करता है। आयुष मंत्रालय का योग अभियान: तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने पर जोर देता है। ष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस और विश्व कैंसर दिवस पर बड़े मीडिया अभियान।
समय पर जांच ही सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का कहना है। “कैंसर का डर नहीं, देर से पहचान ही सबसे बड़ी समस्या है।। यदि शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज सफल होता है। सरकार अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी कैंसर की स्क्रीनिंग उपलब्ध करा रही है। कैंसर के खिलाफ भारत की जंग – हर नागरिक की जिम्मेदारी। भारत अब कैंसर के खिलाफ सिर्फ लड़ नहीं रहा, बल्कि जीतने की दिशा में बढ़ रहा है।
सस्ती दवाइयां, हर जिले में अस्पताल, स्वदेशी थेरेपी, और जागरूकता अभियान ये सब मिलकर बता रहे हैं कि कैंसर अब मौत नहीं, चुनौती है — और यह चुनौती जीती जा सकती है। “समय पर जांच कराएं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, और जागरूक रहें। क्योंकि कैंसर से डरना नहीं, उसका सामना करना है।। भारत अब कह रहा है ‘कैंसर हारेगा, भारत जीतेगा। प्रकाश कुमार पांडेय





