रीवा के किसानों के लिए सिंचाई और खेती के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा रोडमैप सामने रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से संवाद के दौरान कहा कि स्लीमनाबाद टनल का काम तेजी से पूरा होने की ओर है और इसके बाद नर्मदा जल रीवा के खेतों तक पहुंच सकेगा।
- स्लीमनाबाद टनल से बदलेगी सिंचाई तस्वीर
- 1.32 लाख हेक्टेयर खेतों तक पानी
- प्राकृतिक खेती क्लस्टर पर सरकार का जोर
- उद्यानिकी और श्रीअन्न से बढ़ेगी विविधता
- 50 लाख पट्टों की मुफ्त रजिस्ट्री
इस परियोजना का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि पानी की उपलब्धता सीधे खेती के रकबे और फसल चक्र को प्रभावित करती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया की सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने पर करीब 1 लाख 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। यानी सिंचाई का दायरा बढ़ने से किसानों के सामने एक से अधिक फसल लेने और फसल विविधीकरण की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
पानी के साथ खेती का मॉडल बदलने पर जोर
सरकार का फोकस केवल खेतों तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। रीवा में 1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती क्लस्टर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक कदम है।
रीवा में धान, गेहूं, चना, मसूर, अलसी और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ अमरूद, आंवला और कटहल जैसी उद्यानिकी फसलों की भी संभावनाएं हैं। कोदो-कुटकी जैसे श्रीअन्न को बढ़ावा देने से खेती के पारंपरिक ढांचे में विविधता लाने की कोशिश की जा रही है।
जमीन के अधिकार से जुड़ा बड़ा ऐलान
किसानों की जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। जिन लोगों के पास भूमि के पट्टे हैं, लेकिन उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई है, उनकी रजिस्ट्री नि:शुल्क कराने की बात कही गई है।
सरकार के मुताबिक करीब 50 लाख पट्टों की रजिस्ट्री के लिए लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का शुल्क राज्य सरकार वहन करेगी। इसका उद्देश्य पट्टाधारकों के भूमि अधिकारों को औपचारिक रूप से मजबूत करना है।
कुल मिलाकर रीवा के लिए सामने आया मॉडल तीन स्तरों पर काम करता दिखाई देता है। पहला, सिंचाई का विस्तार। दूसरा, खेती में विविधीकरण। और तीसरा, भूमि अधिकारों को मजबूत करना। हालांकि इन घोषणाओं का वास्तविक असर परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, पानी की खेतों तक प्रभावी पहुंच और किसानों द्वारा नई कृषि गतिविधियों को अपनाने पर निर्भर करेगा।