पश्चिम बंगाल की सियासत: नंदीग्राम का महासंग्राम…TMC का बड़ा दांव, सुवेंदु के करीबी पबित्र कर पर भरोसा

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नंदीग्राम का महासंग्राम: TMC का बड़ा दांव, सुवेंदु के करीबी पबित्र कर पर भरोसा

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर नंदीग्राम चर्चा के केंद्र में आ गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर बड़ा दांव खेलते हुए पबित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि पबित्र कर कभी सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं। ऐसे में यह मुकाबला और भी दिलचस्प होने जा रहा है।

ममता बनर्जी ने बदली सीट, नंदीग्राम में नया चेहरा

इस बार ममता बनर्जी ने नंदीग्राम छोड़कर भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनके इस फैसले के बाद नंदीग्राम सीट पर सबकी नजरें टिक गई हैं। टीएमसी ने यहां से पबित्र कर को मैदान में उतारकर साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती।

कौन हैं पबित्र कर?

पबित्र कर नंदीग्राम की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्हें स्थानीय लोग “नंदीग्राम का बेटा” भी कहते हैं। उनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ। साल 2018 में वह दो गांवों के मुखिया रहे, जहां से उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ बनाई। पबित्र कर पहले तृणमूल कांग्रेस में ही थे, लेकिन 2021 में सुवेंदु अधिकारी के साथ उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब चुनाव से ठीक पहले उनकी “घर वापसी” ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं।

बीजेपी को झटका, मुकाबला रोचक

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी एक बार फिर नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह मुकाबला बेहद दिलचस्प और सीधा टकराव बन जाएगा—एक तरफ सुवेंदु अधिकारी और दूसरी तरफ उनके पूर्व करीबी पबित्र कर। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पबित्र कर का टीएमसी में लौटना बीजेपी के लिए बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि वह नंदीग्राम में मजबूत जमीनी पकड़ रखते हैं।

परिवार की भी राजनीति में पकड़

पबित्र कर का प्रभाव सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पारिवारिक स्तर पर भी देखा जाता है। उनकी पत्नी भी राजनीति में सक्रिय रही हैं और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। 2023 में उन्हें जीत भी हासिल हुई थी, जिससे इलाके में इस परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई।

‘लो प्रोफाइल’ लेकिन असरदार नेता

पबित्र कर की पहचान एक ऐसे नेता की है जो प्रचार से ज्यादा जमीनी काम पर भरोसा करते हैं। वह सार्वजनिक मंचों पर कम नजर आते हैं, लेकिन संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यही वजह है कि सुवेंदु अधिकारी भी उन्हें खास महत्व देते रहे हैं।

नंदीग्राम क्यों है अहम?

नंदीग्राम सीट सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि बंगाल की सियासत का प्रतीक बन चुकी है। 2021 के चुनाव में यही सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही थी, जहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर हुई थी। अब एक बार फिर यह सीट सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मुकाबले का समीकरण बदल चुका है।

कुल मिलाकर, नंदीग्राम का “महासंग्राम” इस बार और भी दिलचस्प होने जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने पबित्र कर पर दांव लगाकर बड़ा सियासी संदेश दिया है। वहीं, अगर बीजेपी सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारती है, तो यह चुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और रणनीति की जंग बन जाएगा।

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