बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ पर्दे पर किरदार नहीं निभाते, बल्कि अपनी एक अलग पहचान छोड़ जाते हैं। नाना पाटेकर भी ऐसे ही कलाकार थे। संवाद बोलने का अंदाज हो, चेहरे के भाव हों या किरदार में उतर जाने की कला, नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक के करियर में अपनी अलग जगह बनाई। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी।
करोड़ों के मालिक, दिल से किसान!
नाना की दौलत कितनी, विरासत कितनी बड़ी?
1 BHK से 27 एकड़ तक का सफर
स्टारडम करोड़ों का, जिंदगी सादगी वाली!
संपत्ति छोड़ी, समाजसेवा की मिसाल छोड़ गए!
नाना की कहानी का एक दूसरा पहलू भी है। करोड़ों की अनुमानित संपत्ति होने के बावजूद उनका रहन-सहन हमेशा बेहद सामान्य रहा। यही वजह है कि उनके निधन के बाद उनकी संपत्ति से ज्यादा चर्चा उनके सादगी भरे जीवन और समाजसेवा की हो रही है।
करोड़ों की संपत्ति, लेकिन सादा जीवन
मीडिया रिपोर्ट्स में नाना पाटेकर की कुल संपत्ति का अनुमान करीब 50 से 80 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है। हालांकि यह आंकड़ा आधिकारिक तौर पर घोषित संपत्ति विवरण नहीं है, इसलिए इसे अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मुंबई में उनका अपेक्षाकृत साधारण 1 BHK फ्लैट होने की जानकारी सामने आती रही है। इसके अलावा गोवा में उनका घर और पुणे के पास एक बड़ा फार्महाउस भी उनकी संपत्तियों में शामिल बताए जाते हैं।
यानी एक तरफ फिल्म इंडस्ट्री के करोड़ों रुपये कमाने वाले सितारों की चमक-दमक है, तो दूसरी तरफ नाना पाटेकर का जीवन अपेक्षाकृत सादगी वाला रहा।
27 एकड़ का फार्महाउस बना पहचान
नाना पाटेकर की संपत्ति की चर्चा में पुणे के पास स्थित उनका फार्महाउस सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह करीब 27 एकड़ में फैला हुआ है। यहां वे खेती भी करते थे और जमीन से उनका जुड़ाव सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं था।
नाना के लिए यह फार्महाउस किसी आलीशान सेलिब्रिटी बंगले से ज्यादा एक सुकून की जगह था। खेती, प्रकृति और गांव की जिंदगी के बीच समय बिताना उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा। यही विरोधाभास नाना के व्यक्तित्व को खास बनाता है। करोड़ों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद उनका जुड़ाव जमीन से बना रहा।
कमाई से ज्यादा मायने रखती थी किसानों की चिंता
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ अभिनेता की नहीं थी। किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद के लिए भी उन्होंने काम किया। 2015 में नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने ‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत की। संगठन का उद्देश्य महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद करना रहा है।
किसानों की आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की सहायता, पानी की समस्या और ग्रामीण क्षेत्रों में राहत जैसे मुद्दों पर नाम फाउंडेशन ने काम किया। नाना गरीब किसानों की बेटियों की शादी में मदद के लिए भी जाने जाते थे। इसलिए उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा अर्थ सिर्फ यह नहीं है कि उनके पास कितने करोड़ रुपये थे। असली कहानी यह है कि उन्होंने अपनी कमाई और प्रभाव का इस्तेमाल समाज के उस वर्ग के लिए भी किया, जो आर्थिक संकट से जूझ रहा था।
विरासत सिर्फ संपत्ति की नहीं
नाना पाटेकर अपने पीछे पत्नी नीलकांति पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर को छोड़ गए हैं। उनके निधन के बाद उनकी संपत्तियों का कानूनी हस्तांतरण और उत्तराधिकार प्रक्रिया परिवार और संबंधित कानूनों के अनुसार तय होगी। लेकिन नाना की विरासत को सिर्फ मुंबई के फ्लैट, गोवा के घर या पुणे के फार्महाउस से नहीं मापा जा सकता।
‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसे अलग-अलग रंग के किरदारों ने उन्हें कई पीढ़ियों का अभिनेता बनाया। उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। अभिनय के अलावा वे लेखक, निर्देशक और रंगमंच से जुड़े कलाकार भी रहे।
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यहां करोड़ों की संपत्ति और साधारण जिंदगी एक साथ दिखाई देती है।
एक तरफ फिल्मी दुनिया की कमाई से बनी संपत्ति, दूसरी तरफ खेतों में मिट्टी से जुड़ा जीवन। एक तरफ बड़े पर्दे का स्टारडम, दूसरी तरफ किसानों के बीच खड़े होकर उनकी मदद करने की कोशिश।
नाना पाटेकर चले गए, लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत शायद वह संपत्ति नहीं है, जो उनके पीछे छूट गई है। उनकी असली विरासत उनके किरदार, उनकी आवाज, उनका अभिनय और समाज के कमजोर तबके के लिए किया गया उनका काम है।
क्योंकि कुछ कलाकार फिल्मों से रिटायर होते हैं, लेकिन कुछ कलाकार जाने के बाद भी लोगों की यादों में अपना किरदार निभाते रहते हैं। नाना पाटेकर उन्हीं कलाकारों में से एक थे।