सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन… PM मोदी ने दी छठ महापर्व की शुभकामनाएं प्रधानमंत्री बोले – छठ पूजा आस्था, उपासना और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम है

PM Modi extended best wishes for the Chhath Mahaparv

सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन… PM मोदी ने दी छठ महापर्व की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री बोले – छठ पूजा आस्था, उपासना और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम है

आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा नहाय-खाय के साथ शनिवार से शुरू हो गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व न केवल बिहार और उत्तर प्रदेश में, बल्कि पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के बीच श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को छठ की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं और इसे भारतीय संस्कृति की सादगी, संयम और प्रकृति प्रेम का प्रतीक बताया है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा — “नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ आज से चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो रहा है। बिहार सहित देशभर के श्रद्धालुओं को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन!” उन्होंने आगे लिखा कि “हमारी संस्कृति का यह विराट उत्सव सादगी और संयम का प्रतीक है, जिसकी पवित्रता और नियम-निष्ठा अतुलनीय है। इस पावन अवसर पर छठ के घाटों पर जो दृश्य दिखाई देता है, उसमें पारिवारिक और सामाजिक सद्भाव की अद्भुत प्रेरणा होती है।”

सादगी और संयम का प्रतीक है छठ

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने लिखा कि इस पर्व की प्राचीन परंपरा ने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। छठ के दौरान लोग सूर्य देव और छठी मइया की उपासना करते हैं, जिसमें आत्मसंयम, तप और प्रकृति के प्रति सम्मान झलकता है। उन्होंने कहा कि “छठ महापर्व की पवित्रता और नियम-निष्ठा अतुलनीय है। यह पर्व दिखाता है कि भारतीय समाज कैसे परंपरा और आस्था को आधुनिकता के साथ संतुलित रखता है।

विश्वभर में मनाया जाने वाला सांस्कृतिक उत्सव

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज छठ पूजा का स्वरूप भारत से आगे बढ़कर एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है। “आज विश्व के कोने-कोने में छठ को संस्कृति के महाउत्सव के रूप में मनाया जाता है। पूरी दुनिया में रहने वाले भारतवंशी परिवार इसकी परंपराओं में आत्मीयता से सम्मिलित होते हैं। मेरी कामना है कि छठी मइया सबको अपना भरपूर आशीर्वाद दें।” पीएम मोदी ने यह भी कहा कि छठ पूजा में सूर्य के अस्ताचल और उदयाचल दोनों रूपों को अर्घ्य देने की जो परंपरा है, वह जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है।

आस्था और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि “छठ महापर्व आस्था, उपासना और प्रकृति प्रेम का एक अनूठा संगम है। इसमें जहां अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है, वहीं प्रसाद में भी प्रकृति के विविध रंग समाहित होते हैं।” उन्होंने बताया कि छठ के दौरान उपयोग में आने वाली चीजें जैसे गन्ना, केला, नारियल, सुपारी, ठेकुआ, सिंघाड़ा और अन्य फल – सब प्रकृति से जुड़ी हुई वस्तुएं हैं, जो इस पर्व को धरती और पर्यावरण से जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि छठ पूजा की विशेषता यह भी है कि इसमें कोई पंडित या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती। प्रत्येक घर का सदस्य स्वयं श्रद्धा से पूजा करता है, जो लोक परंपरा की सबसे सशक्त मिसाल है।

पीएम मोदी ने की शारदा सिन्हा का जिक्र

अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध लोकगायिका शारदा सिन्हा और बिहार के लोक कलाकारों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि “मेरा सौभाग्य है कि कल ही मुझे बेगूसराय जाने का अवसर मिला था। बिहार कोकिला शारदा सिन्हा जी का बेगूसराय से आत्मीय रिश्ता रहा है। उन्होंने और बिहार के कई लोक कलाकारों ने अपने गीतों से छठ के उत्सव को एक अलग भाव से जोड़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि शारदा सिन्हा के गीत न केवल छठ पर्व की पहचान बन चुके हैं, बल्कि उन्होंने भारतीय लोक संगीत को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज इस महापर्व पर मैं आप सभी के साथ छठी मइया के ऐसे गीतों को साझा कर रहा हूं, जिन्हें सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाएगा।

चार दिन तक चलेगा छठ का पर्व

छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है।

पहला दिन (नहाय-खाय): शुद्ध आहार और स्नान के साथ पर्व की शुरुआत होती है।
दूसरा दिन (खरना): व्रती निर्जला उपवास रखते हैं और गुड़-चावल की खीर का प्रसाद बनाते हैं।
तीसरा दिन (सांझ का अर्घ्य): अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
चौथा दिन (भोर का अर्घ्य): उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है।
इस दौरान व्रती 36 घंटे तक बिना पानी के उपवास रखते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा समाज के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल छठ पर्व की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है, बल्कि इसके सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं को भी रेखांकित करता है। छठ महापर्व भारतीय लोक जीवन की आत्मा है। जहां प्रकृति, परिवार, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पीएम मोदी की शुभकामनाओं ने इस परंपरा के प्रति पूरे देश में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है। प्रकाश कुमार पांडेय

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