चुनावी बिहार में मटन की प्लेट अब बहस का मुद्दा!—सावन में मटन पार्टी और बिहार की सियासत में गर्मी… JDU के इस नेता की दावत से छिड़ा राजनीतिक संग्राम !

सावन में मटन पार्टी और बिहार की सियासत में गर्मी… ललन सिंह की दावत से छिड़ा राजनीतिक संग्राम….“कथनी-करनी का फर्क” या “सियासी रणनीति”? चुनावी बिहार में मटन की प्लेट अब बहस का मुद्दा!

दिल्ली में करीब दो साल पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मटन पार्टी ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। 2023 में वो अगस्त का महीना था। यह पार्टी मीसा भारती के आवास पर हुई थी। तब सावन के माह में हुई इस दावत में लालू यादव ने राहुल गांधी को अपने हाथों से पकाकर चंपारण मटन खिलाया था। इस पार्टी के आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया वायरल होते ही सियासत छिड गई थी। इस दावत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं सावन और नवरात्र के पावन माह में नॉनवेज खाने को लेकर राहुल गांधी के साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा था।

सावन में मटन पार्टी… जेडीयू नेता ललन सिंह की दावत से मचा बवाल

लेकिन अब  बिहार के लखीसराय जिले में केंद्रीय मंत्री और जेडीयू नेता ललन सिंह की मटन पार्टी इन दिनों राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है। सूर्यगढ़ा में सरकारी योजनाओं के उद्घाटन के बाद ललन सिंह द्वारा आयोजित भोज में मटन परोसा गया, जिसकी घोषणा उन्होंने खुद मंच से की और लोगों से खाने की अपील भी की। हालांकि ललन सिंह ने मंच से हंसते हुए कहा “खाना बना हुआ है, बढ़िया खाना है, सावन वाला भी खाना है और जो सावन नहीं मानते उनके लिए भी है। इस बयान ने धार्मिक भावनाओं और परंपरा को लेकर बहस को और हवा दे दी है।

बीजेपी के लिए असहज स्थिति: सहयोगी दल की मटन पार्टी पर सवाल

बीजेपी के करीबी सहयोगी दल जेडीयू के वरिष्ठ नेता द्वारा सावन माह में सार्वजनिक मटन पार्टी आयोजित करना। खुद बीजेपी के लिए राजनीतिक असहजता की स्थिति पैदा कर रहा है। गौरतलब है कि अगस्त 2023 में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मटन पार्टी चर्चा में आई थी, तब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने इसे लेकर तीखी आलोचना की थी।

बीजेपी नेताओं ने राहुल और तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि “ये लोग जनता की धार्मिक भावनाओं से खेलते हैं और खुद को ‘जनेऊधारी ब्राह्मण’ बताकर दिखावा करते हैं। अब उन्हीं की सहयोगी पार्टी के केंद्रीय मंत्री द्वारा सावन में मटन परोसना भाजपा के पुराने रुख से मेल नहीं खाता।

विपक्ष का तीखा हमला: रोहिणी आचार्य ने कसा तंज

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बहन डॉ. रोहिणी आचार्य ने इस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कविता के अंदाज में लिखा है कि “ढोंग रच-रच कर ढकोसले फैलाने वाले, दूसरों के खान-पान में खोट निकालने वाले, कथनी-करनी में अंतर रखने वाले, ये दोहरे चरित्र वाले हैं। यह सीधा संकेत था कि जिस पार्टी ने राहुल और तेजस्वी की मटन पार्टी की आलोचना की थी। आज खुद उसी राह पर चल रही है।

दो साल पुरानी यादें फिर ताज़ा: राहुल-लालू की दावत से कैसे हुआ था बवाल?

अगस्त 2023 में मीसा भारती के आवास पर आयोजित दावत में लालू यादव ने राहुल गांधी को खुद से बना ‘चंपारण मटन’ परोसा था। उस दावत का वीडियो वायरल हुआ था और बीजेपी ने इसे ‘धार्मिक भावनाओं का अपमान’ बताते हुए पूरे देश में आक्रोश फैलाया था। अब वही घटनाक्रम जब बीजेपी की सहयोगी पार्टी द्वारा दोहराया गया, तो सवाल यह है कि क्या धर्म और संस्कृति पर राजनीति करने वालों के मापदंड अलग-अलग हैं?

बिहार में चुनावी मौसम गरम, मटन की थाली बनी मुद्दा

बिहार में वर्ष के अंत तक विधानसभा चुनाव संभावित हैं और राजनीतिक दल मुद्दों की तलाश में हैं। वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर पहले ही विपक्षी दलों ने सड़क से सदन तक प्रदर्शन किया है। अब इस मटन पार्टी ने एक नया मोर्चा खोल दिया है, जिसे लेकर जनता के बीच ध्रुवीकरण की संभावना जताई जा रही है। भोजन पर सियासत करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन धार्मिक महीनों में खानपान को लेकर दोहरे रवैये ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

मटन की थाली में राजनीतिक मसाले का तड़का

ललन सिंह की इस मटन दावत ने स्पष्ट रूप से सावन बनाम सियासत की लड़ाई को फिर से ज़िंदा कर दिया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि मटन किसने खाया, बल्कि यह है कि राजनीतिक नैतिकता और तर्क किसके लिए बदलते हैं? भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस मुद्दे पर मौन साधती है या फिर अपने सहयोगी से जवाब मांगती है।…(प्रकाश कुमार पांडेय)

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