अमेरिका की राजनीति में बढ़ता मुस्लिम प्रभाव: जोहरान ममदानी से गजाला हाशमी तक नई नेतृत्व ताकत उभरकर सामने आई

अमेरिका को लंबे समय से ईसाई बहुल देश माना जाता है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में वहां की राजनीति में मुस्लिम नेताओं की उपस्थिति तेजी से मजबूत हुई है। हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी में जोहरान ममदानी का मेयर बनना और गजाला हाशमी का वर्जीनिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में चुना जाना इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है। इन दोनों बड़ी जीतों ने इस बात पर नई चर्चा को जन्म दिया है कि आखिर इतने कम जनसंख्या अनुपात के बावजूद अमेरिका में मुस्लिम नेताओं का प्रभाव लगातार क्यों बढ़ रहा है।

जोहरान ममदानी और गजाला हाशमी—अमेरिकी राजनीति में नया इतिहास
न्यूयॉर्क जैसे विशाल और महत्वपूर्ण शहर का नेतृत्व अब भारतीय मूल के मुस्लिम नेता जोहरान ममदानी कर रहे हैं। 34 वर्षीय ममदानी न सिर्फ शहर के सबसे युवा मेयर बने हैं, बल्कि इस पद पर पहुंचने वाले पहले मुस्लिम भी हैं। उन्होंने अपनी जीत को “सामूहिक बदलाव की जीत” बताया।
उधर वर्जीनिया में गजाला हाशमी ने लेफ्टिनेंट गवर्नर का चुनाव जीतकर नया अध्याय जोड़ा। यह पहली बार है कि किसी अमेरिकी राज्य में किसी मुस्लिम महिला को इतना बड़ा कार्यकारी पद मिला है।

कांग्रेस से लेकर लोकल निकायों तक मुस्लिम नेताओं की संख्या में उछाल
पिछले 20 वर्षों में अमेरिका में मुस्लिम प्रतिनिधित्व तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में अमेरिकी कांग्रेस में 4 मुस्लिम सांसद मौजूद हैं—जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके अलावा पूरे देश में लगभग 80 से अधिक स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधि विभिन्न पदों पर चुने जा चुके हैं।
मिशिगन और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों के कई शहरों में मेयर, काउंसिल और प्रशासनिक पदों पर मुस्लिम समुदाय के नेताओं का दबदबा दिखाई देता है।

मिशिगन जैसे शहर बने मुस्लिम नेतृत्व का केंद्र
विशेष रूप से मिशिगन के डियरबॉर्न और हैमट्रैमिक जैसे शहर मुस्लिम राजनीतिक प्रभाव का बड़ा उदाहरण हैं। इन शहरों में नगर सरकारों में मुस्लिम बहुमत है—चाहे वह मेयर हों, काउंसिल मेंबर हों या महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी। इससे साफ होता है कि स्थानीय स्तर पर समुदाय की पकड़ मजबूत हो चुकी है।

कुल आबादी सिर्फ 1.1%, लेकिन राजनीतिक शक्ति कई गुना ज्यादा
अमेरिका की कुल जनसंख्या में मुस्लिम आबादी अभी भी मात्र 1.1% है। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक मौजूदगी इस अनुपात से कई गुना आगे है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के नेता सोशल मीडिया, सामुदायिक मुद्दों और सीधे जनसंपर्क के माध्यम से पारंपरिक राजनीति के ढांचे को बदल रहे हैं। यही कारण है कि मुस्लिम नेताओं का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत हो रहा है।

 

 

 

 

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