Mukhyamantri Teerthyatra Yojana:आस्था और सम्मान की अनूठी पहल है मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना..जानें कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

Mukhyamantri Teerthyatra Yojana
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2012 में शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य ऐसे बुजुर्ग श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराना है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी नहीं कर पाते।
अब तक कितने लोगों ने की तीर्थ यात्रा
क्या है मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना?
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
किन तीर्थस्थलों की कराई जाती है यात्रा?
सरकार देती है पूरी तरह निःशुल्क सुविधा
यात्रा से पहले जान लें जरूरी नियमइस योजना के तहत राज्य सरकार जीवन में एक बार प्रदेश के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को राज्य के बाहर स्थित निर्धारित तीर्थस्थलों की निःशुल्क यात्रा कराती है। योजना की शुरुआत 3 सितंबर 2012 को रामेश्वरम यात्रा से हुई थी और तब से हजारों श्रद्धालु इसका लाभ उठा चुके हैं।इन तीर्थस्थलों की कराई जाती है यात्रा
योजना के अंतर्गत वर्तमान में बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णो देवी, शिर्डी, तिरुपति, अजमेर शरीफ, काशी, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला तथा वेलंकनी चर्च जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाती है।

कौन है पात्र?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक है। पुरुष आवेदकों की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक तथा महिलाओं की आयु 58 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले नागरिकों के लिए आयु सीमा लागू नहीं है।

यदि पति या पत्नी में से कोई एक पात्र है, तो उसका जीवनसाथी भी यात्रा में शामिल हो सकता है, भले ही उसकी आयु निर्धारित सीमा से कम हो। हालांकि आवेदक आयकरदाता नहीं होना चाहिए और पहले इस योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए।

सरकार उठाती है पूरा खर्च
यात्रा के दौरान विशेष ट्रेन से आवागमन, भोजन, नाश्ता, शुद्ध पेयजल, ठहरने की व्यवस्था, आवश्यक बस परिवहन तथा अन्य सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इन व्यवस्थाओं का संचालन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के सहयोग से आईआरसीटीसी द्वारा किया जाता है।

यात्रा से पहले जरूरी शर्तें
यात्रा के लिए आवेदक को चिकित्सकीय प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होता है, जिसमें यह प्रमाणित हो कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से यात्रा के लिए सक्षम है तथा किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित नहीं है। 65 वर्ष से अधिक आयु के अकेले यात्रियों और 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग नागरिकों को एक सहायक साथ ले जाने की अनुमति भी दी जाती है।

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
यात्रा के दौरान पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ, ज्वलनशील सामग्री, कीमती आभूषण या बहुमूल्य वस्तुएं ले जाने की अनुमति नहीं होती। यात्रियों को यात्रा प्रभारी और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होता है तथा ऐसा कोई व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे प्रदेश की छवि प्रभावित हो।

आस्था और सामाजिक सुरक्षा का संगम
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा कार्यक्रम नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की आस्था, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एक संवेदनशील पहल है। यह योजना उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है जो जीवनभर तीर्थयात्रा का सपना देखते हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में उसे पूरा नहीं कर पाते। मध्य प्रदेश सरकार की यह योजना आज हजारों श्रद्धालुओं के धार्मिक सपनों को साकार करने का माध्यम बन चुकी है।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2012 में शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य ऐसे बुजुर्ग श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराना है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी नहीं कर पाते।
अब तक कितने लोगों ने की तीर्थ यात्रा
क्या है मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना?
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
किन तीर्थस्थलों की कराई जाती है यात्रा?
सरकार देती है पूरी तरह निःशुल्क सुविधा
यात्रा से पहले जान लें जरूरी नियमइस योजना के तहत राज्य सरकार जीवन में एक बार प्रदेश के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को राज्य के बाहर स्थित निर्धारित तीर्थस्थलों की निःशुल्क यात्रा कराती है। योजना की शुरुआत 3 सितंबर 2012 को रामेश्वरम यात्रा से हुई थी और तब से हजारों श्रद्धालु इसका लाभ उठा चुके हैं।इन तीर्थस्थलों की कराई जाती है यात्रा
योजना के अंतर्गत वर्तमान में बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णो देवी, शिर्डी, तिरुपति, अजमेर शरीफ, काशी, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला तथा वेलंकनी चर्च जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाती है।

कौन है पात्र?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक है। पुरुष आवेदकों की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक तथा महिलाओं की आयु 58 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले नागरिकों के लिए आयु सीमा लागू नहीं है।

यदि पति या पत्नी में से कोई एक पात्र है, तो उसका जीवनसाथी भी यात्रा में शामिल हो सकता है, भले ही उसकी आयु निर्धारित सीमा से कम हो। हालांकि आवेदक आयकरदाता नहीं होना चाहिए और पहले इस योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए।

सरकार उठाती है पूरा खर्च
यात्रा के दौरान विशेष ट्रेन से आवागमन, भोजन, नाश्ता, शुद्ध पेयजल, ठहरने की व्यवस्था, आवश्यक बस परिवहन तथा अन्य सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इन व्यवस्थाओं का संचालन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के सहयोग से आईआरसीटीसी द्वारा किया जाता है।

यात्रा से पहले जरूरी शर्तें
यात्रा के लिए आवेदक को चिकित्सकीय प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होता है, जिसमें यह प्रमाणित हो कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से यात्रा के लिए सक्षम है तथा किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित नहीं है। 65 वर्ष से अधिक आयु के अकेले यात्रियों और 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग नागरिकों को एक सहायक साथ ले जाने की अनुमति भी दी जाती है।

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
यात्रा के दौरान पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ, ज्वलनशील सामग्री, कीमती आभूषण या बहुमूल्य वस्तुएं ले जाने की अनुमति नहीं होती। यात्रियों को यात्रा प्रभारी और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होता है तथा ऐसा कोई व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे प्रदेश की छवि प्रभावित हो।

आस्था और सामाजिक सुरक्षा का संगम
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा कार्यक्रम नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की आस्था, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एक संवेदनशील पहल है। यह योजना उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है जो जीवनभर तीर्थयात्रा का सपना देखते हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में उसे पूरा नहीं कर पाते। मध्य प्रदेश सरकार की यह योजना आज हजारों श्रद्धालुओं के धार्मिक सपनों को साकार करने का माध्यम बन चुकी है।

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