MP News: कांग्रेस को मध्यप्रदेश में सियासी झटका: सजा से बदलेगा सत्ता का खेल?

दतिया विधायक पर फैसला… अब विधायकी और राज्यसभा दोनों पर असर

मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। यहां दतिया से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को 27 साल पुराने जालसाजी मामले में दिल्ली की एमपी एमलए कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई है। हालांकि
सजा के तुरंत बाद जमानत जरूर मिल गई लेकिन असली संकट अब उनकी विधायकी पर है। यहीं से शुरू होता है सियासत का नया अध्याय। सवाल यह है कि क्या जाएगी सदस्यता? क्या राज्यसभा चुनाव का गणित बदलेगा?।

विधायक को 3 साल की सजा → सदस्यता पर संकट
अपील और स्टे ही एकमात्र रास्ता
राज्यसभा चुनाव का गणित बदलता नजर आ रहा
बीजेपी बनाम कांग्रेस की नई सियासी जंग शुरू

कानूनी पेंच: क्यों खतरे में विधायकी?

भारतीय कानून साफ कहता है कि अगर किसी विधायक को 2 साल या उससे ज्यादा की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है।
यह नियम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले लिली थॉमस बनाम भारत संघके बाद और सख्त हो गया। कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती से जुड़े इस केस में स्थिति में अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई गई है जिसमें 2 साल और 3-3 साल की सजा सुनाई है। मतलब साफ है कि कानूनी रूप से विधायकी पर संकट गहरा गया है।

क्या बच सकती है कुर्सी?

हालांकि रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। 60 दिन के भीतर हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है। अगर कोर्ट सजा पर स्टे दे देता है तो सदस्यता बच सकती है। अगर स्टे नहीं मिला तो विधायकी जाना लगभग तय है।

दतिया की सियासत…फिर चर्चा में पुराना मुकाबला

दतिया सीट हमेशा से हाई-प्रोफाइल रही है। इस फैसले के बाद यहां की राजनीति और गर्म हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में एक बार फिर चर्चा में हैं बीजेपी के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा। अगर सीट खाली होती है तो क्या उपचुनाव होगा। इसे लेकर बीजेपी आक्रामक रणनीति बनाने में जुट गई है।

राज्यसभा की तीसरी सीट बचाना चुनौती

मप्र में राज्यसभा की तीसरी सीट पर सस्पेंस बढ़ गया है। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पहले से ही चर्चा में थी। अब इस फैसले ने सियासी गणित और उलझा दिया है। कानून के मुताबिक दो साल से अधिक की सजा होने पर सदस्यता रद्द हो सकती है, ऐसे में अगर उनकी सीट खाली होती है तो विधानसभा का संख्या संतुलन बदलना तय माना जा रहा है। इसका सीधा असर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की रणनीति पर पड़ेगा। क्योंकि हर एक विधायक का महत्व बढ़ जाता है। हालांकि भारती के पास राहत का रास्ता अभी खुला है और वे 15 दिनों के भीतर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सजा पर स्थगन हासिल कर सकते हैं।
इधर, राज्यसभा चुनाव के समीकरण भी इस घटनाक्रम से प्रभावित होते दिख रहे हैं। राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मुकाबला पहले से ही दिलचस्प है। ऐसे में अगर संख्या में मामूली भी बदलाव होता है तो जीत-हार का पूरा गणित पलट सकता है। यही वजह है कि इस मामले को “निर्णायक फैक्टर” माना जा रहा है, जो मध्य प्रदेश की सियासत की दिशा तय कर सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

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