आम चुनाव में जो मतदान प्रतिशत घटाएं उससे सियासी दल चिंतित है। जब मतदान का प्रतिशत बढ़ता है तो जिस दल को फायदा होने की संभावना होती है उस दल की उम्मीदें परवान चढ़ने लगती हैं। बात करें 2019 की तुलना में 2024 में हुए मतदान प्रतिशत की तो इस बार मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर मतदान लगभग चार प्रतिशत घटा है। वहीं कुछ लोकसभा सीटें तो ऐसी हैं जहां 10 से 14 फीसदी तक कम वोटिंग हुई है। मध्य प्रदेश में यह हैरान करने वाला मामला है। क्योंकि राजनीतिक दल और चुनाव आयोग दोनों ही ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए और पूरी ताकत झोंक दी थी। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या मतदाता कंफर्ट जोन में चला गया। क्या उम्मीदवार ने कोई मेहनत नहीं की। क्या पार्टियों के संगठन ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई। या सब कुछ सरकार पर निर्भर था। मतदाताओं के मन पर निर्भरता था।
- एमपी की 29 लोकसभा सीटों पर 66.77 % मतदान
- 2019 के चुनाव में 29 सीटों पर 71.6 % वोट पड़े थे
- इस बार 23 सीटों पर घटा वोट का आंकड़ा
- विधानसभा चुनाव की तुलना में 10% कम वोटिंग
- पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में चार % कम वोटिंग
- विधानसभा चुनाव की तुलना में 10 % तक कम वोटिंग
- 2019 के आमचुनाव की तुलना में 4 % कम मतदान
- आधा दर्जन सीटों पर वोटिंग प्रतिशत में इजाफा हुआ
- सबसे अधिक वोटिंग विदिशा में 2.69 % वोटिंग बड़ी
- गुना में 2019 के चुनाव की तुलना में 2.11 % ज्यादा वोट पड़े
- ज्यादा वोटिंग वाली सीटों में राजगढ़ भी शामिल
- राजगढ़ में 2019 की तुलना में 1.65 % ज्यादा वोटिंग
- सागर और भिंड में भी वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि
- लेकिन एक परसेंट पिछले बार से कम
नेता और जनप्रतिनिधि के अपने-अपने दावे हैं बीजेपी इस घाटे हुए मत प्रतिशत में भी अपने लिए लाभ देख रही है तो कांग्रेस इसे अपने लिए अनुकूल बताती नजर आ रही है कुल मिलाकर यह राजनीतिक नफा नुकसान गणित का हिसाब 4 जून को होगा
आदिवासी क्षेत्रों में दिखाई दी मतदाताओं की बेरुखी
- रतलाम, धार, खरगोन में 2.8 से 3.75% कम मतदान
- रतलाम लोकसभा सीट पर 72.86 प्रतिशत मतदान
- धार लोकसभा सीट पर 71.50 प्रतिशत
- खरगोन लोकसभा सीट पर 75.79 प्रतिशत मतदान
मालवा-निमाड़ में बंपर वोटिंग के लिए पहचानी जाने वाली आदिवासी बहुल लोकसभा सीटों पर पिछली बार की तुलना में कम मतदान हुआ है। इन सीटों में धार, रतलाम और खरगोन शामिल हैं। जहां पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव की अपेक्षा 2.8 से लेकर 3.75 फीसदी तक कम मतदान दर्ज किया गया है। इसके बाद भी बीजेपी कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को आदिवासी मतदाताओं से बड़ी उम्मीदें थीं।
आदिवासी बहुल इन सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके बावजूद दोनों ही पार्टियां आदिवासियों को मतदान के लिए घर से निकलकर पोलिंग बूथ तक पहुंचाने में असफल साबित हुईं हैं। चौथे चरण में जिन लोकसभा सीटों मतदान हुआ उनके पिछले आकंड़े उठाकर देखें तो हर चुनाव में आदिवासी मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया है।
- रतलाम में 2014 में 63.62, 2019 में 75.66, 2024 में 72.86 प्रतिशत
- धार में 2014 में 64.55 2019 में 75.25, 2024 में 71.50 प्रतिशत
- खरगोन मेें 2014 में 67.67, 2019 में 77.82, 2024 में 75.79 प्रतिशत
- 2024 में रतलाम में 2.8 प्रतिशत मतदान घटा
- 2024 धार में 3.75 प्रतिशत मतदान घटा
- 2024 खरगोनमें 2.03 प्रतिशत मतदान घटा
पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी धार, रतलाम और खरगोन तीनों सीटों पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था। वहीं पांच माह पहले दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भी खरगोन और धार में कांग्रेस को बढ़त मिली थी। इस चुनाव में तो पीएम नरेन्द्र मोदी ने धार और खरगोन तो कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भी खरगोन और रतलाम लोकसभा क्षेत्र में आमसभाएं कीं थीं। वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित बीजेपी और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी इन सीटों को साधने के लिए पूरा जोर लगा दिया था।
तीन मंत्रियों की मेहनत भी हुई बेकार
रतलाम में मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनिता नागर सिंह चौहान और कांतिलाल भूरिया चुनावी मैदान में है। धार में भाजपा प्रत्याशी सावित्री ठाकुर और कांग्रेस प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल आमने-सामने हैं। वहीं खरगोन में गजेंद्र पटेल, पोरलाल खरते के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे है। बता दें रतलाम लोकसभा क्षेत्र से मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार के तीन मंत्री आते हैं। रतलाम सिटी विधानसभा सीट से मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप तो अलीराजपुर विधानसभा सीट से नागर सिंह चौहान और पेटलावद विधानसभा सीट से मंत्री निर्मला भूरिया चुनाव जीत कर आई हैं। इन मंत्रियों को यहां मतदान प्रतियात बढ़ाने की जिम्मेदारी बीजेपी संगठन की ओर से दी गई थी। लेकिन मंत्रियों के अथक प्रयास के बाद भी रतलाम लोकसभा सीट पर कम मतदान हुआ।