मध्यप्रदेश की मोहन सरकार…सपने कर रही साकार…आजीविका मिशन की दीदियाँ…आत्मनिर्भरता से अर्थव्यवस्था तक की नई उड़ान

Madhya Pradesh CM Mohan Yadav

आजीविका मिशन की दीदियाँ: आत्मनिर्भरता से अर्थव्यवस्था तक की नई उड़ान

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि“बंद मुट्ठी लाख की होती है”, तो सभागार में बैठी हजारों स्व-सहायता समूहों की दीदियों की मुस्कान इस वाक्य की सजीव मिसाल बन गई। प्रदेश में आज 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 65 लाख से अधिक महिलाएँ आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर हैं। इनमें से 12 लाख से ज्यादा “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। बीते एक वर्ष में इन समूहों ने विभिन्न कंपनियों और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपए का व्यापार कर यह साबित कर दिया कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े आर्थिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

बजट में बढ़ी हिस्सेदारी, बढ़ा विश्वास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 26 प्रतिशत की वृद्धि की है। इतना ही नहीं, कुल बजट का 34 प्रतिशत ग्रामीण विकास पर खर्च करने का प्रावधान है। यह केवल आंकड़े  नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में महिलाओं और गांवों को केंद्र में रखने का संकेत है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आजीविका मिशन की दीदियाँ अब केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं हैं—वे ट्रैक्टर और ड्रोन चला रही हैं, गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे काम कर रही हैं, कैफे संचालित कर रही हैं और बाजार के लक्ष्य हासिल कर रही हैं। अचार, पापड़, मसाले, मिलेट्स उत्पाद और हस्तशिल्प जैसे घरेलू उद्योग अब संगठित उद्यम का रूप ले चुके हैं।

स्पेशल होली हैम्पर: परंपरा से बाजार तक

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में बुधवार की शाम सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता के उभार का उत्सव भी था।  कार्यक्रम में आजीविका मिशन की दीदियों द्वारा तैयार “स्पेशल होली हैम्पर” लॉन्च किया गया। इस हैम्पर में प्राकृतिक रंग, देशी घी, मिष्ठान, गोकाष्ठ, पूजन सामग्री और टी-शर्ट सहित 10 उत्पाद शामिल हैं। उज्जैन, सागर, कटनी, सीहोर और रीवा जिलों की महिलाओं ने इसे तैयार किया है। यह पहल दर्शाती है कि त्योहारों की परंपरा को भी आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है। भारतीय संस्कृति में ऋतु और व्यंजन का गहरा संबंध है—इसी संबंध को बाजार से जोड़ने की रणनीति आजीविका मिशन अपना रहा है।

बाजार से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक

कार्यक्रम की एक बड़ी घोषणा यह रही कि अब प्रदेश की दीदियों के उत्पाद Amazon की ‘अमेजन सहेली’ पहल, India Post और अन्य ई-प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPSRLM) ने इंडिया पोस्ट, अमेजन सहेली, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विस, बुद्धा इंस्टीट्यूट, टीआरआईएफ और साइटसेवर संस्थान के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उत्पादों की डिलीवरी देशभर में सुगम हो सकेगी।

आजीविका मार्ट और रिटेल विस्तार

मुख्यमंत्री ने Gwalior में आजीविका मार्ट, Jabalpur एयरपोर्ट पर एसएचजी रिटेल आउटलेट और संभागीय व जिला स्तर पर होली मेलों का वर्चुअल शुभारंभ किया। प्रदेश में वर्तमान में 43 रूरल मार्ट संचालित हैं। इन मार्ट के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को स्थायी बाजार मिल रहा है। राजधानी भोपाल में आयोजित इस कार्यशाला ने विभिन्न जिलों की दीदियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया—जिससे नेटवर्किंग और बाजार समझ दोनों का विस्तार हुआ।

क्षमतावर्धन से आत्मविश्वास

कार्यक्रम में आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ भी हुआ। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की 50 हजार से अधिक महिलाएँ प्राकृतिक खेती से जुड़ी हैं और मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक प्राकृतिक खेती वाला राज्य बन चुका है। समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी) का शुभारंभ भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। य हां समूहों की महिलाओं को उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। गुना जिले की श्रीमती मीनाक्षी फरागते ने अपनी सफलता की कहानी साझा कर बताया कि कैसे छोटे स्तर से शुरू कर उन्होंने विपणन में उल्लेखनीय पहचान बनाई।

ग्रामीण एक्सप्रेस: बाजार तक आसान पहुंच

मुख्यमंत्री ने आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत 7 वाहनों को हरी झंडी दिखाई। बैतूल, विदिशा, राजगढ़, कटनी, ग्वालियर और भोपाल जिलों से जुड़ी ये गाड़ियां दूर-दराज के क्षेत्रों में महिलाओं के आवागमन और उत्पादों की बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करेंगी। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स की समस्या को कम करेगी और उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाने में सहायक होगी।

मातृशक्ति का स्वर्णिम अध्याय

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि महिलाओं की सफलता अब केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंकड़ों और जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने तकनीकी बदलावों के साथ स्वयं को अपडेट रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता के इतिहास का “स्वर्णिम दिन” बताया। उनका कहना था कि घर की रसोई से निकलकर बाजार तक पहुंची यह यात्रा केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक बदलाव की भी कहानी है। आज जब 65 लाख दीदियाँ संगठित शक्ति बनकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं, तब यह स्पष्ट है कि आत्मनिर्भर गांव और सशक्त महिलाएँ ही विकास का स्थायी आधार हैं। आजीविका मिशन की यह कहानी बताती है कि जब अवसर, प्रशिक्षण और बाजार एक साथ मिलते हैं, तो परिवर्तन केवल संभव नहीं—अपरिहार्य हो जाता है।

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