मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन सदन में किसानों और जनजातीय संस्कृति से जुड़े बड़े फैसलों की गूंज सुनाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार का फोकस किसान कल्याण, कृषि विकास और जनजातीय परंपराओं के सम्मान पर है। इसी कड़ी में सरकार ने मालवा अंचल के प्रसिद्ध भगोरिया लोकपर्व को अब राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने का ऐलान किया है, वहीं किसानों के लिए 10,520 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी भी दी गई है।
भगोरिया लोकपर्व को राष्ट्रीय पहचान देने का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि मालवा और झाबुआ अंचल के जनजातीय इलाकों में मनाया जाने वाला भगोरिया पर्व सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान है। इसे देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि अब भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाएगा। इसके साथ ही बड़वानी, धार और झाबुआ जैसे जनजातीय बहुल जिलों में कृषि कैबिनेट आयोजित करने की तैयारी है। खास बात यह है कि यह कैबिनेट बैठक भगोरिया पर्व के दौरान ही होगी, जिससे कृषि नीति और स्थानीय परंपराओं का सीधा संवाद स्थापित किया जा सके।
किसानों के लिए 10,520 करोड़ का पिटारा, योजनाएं 2031 तक जारी
मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक पूरी तरह किसानों को समर्पित रही। सरकार ने किसान कल्याण वर्ष के तहत चल रही पांच प्रमुख कृषि योजनाओं को अगले पांच साल यानी 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का फैसला किया है। इन योजनाओं के लिए कुल 10,520 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं की निरंतरता से खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में स्थायित्व आएगा।
उड़द और सरसों पर सरकार का फोकस, बोनस और भावांतर की सौगात
कैबिनेट बैठक में दलहन और तिलहन फसलों को लेकर भी अहम निर्णय लिए गए। सरकार ने उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी के साथ-साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है। वहीं सरसों को भावांतर योजना के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल प्रदेश में सरसों उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है और कुल उत्पादन लगभग 3.38 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। इससे साफ है कि सरकार किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने की ठोस तैयारी में है।
कृषि योजनाओं पर हजारों करोड़ की अतिरिक्त मंजूरी
सरकार ने कृषि से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं के लिए भी भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2,014.83 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (ड्रॉप-मोर-क्रॉप) के लिए 2,393.97 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के लिए 3,285.49 करोड़ रुपये
नेशनल मिशन ऑन नेचरल फार्मिंग के लिए 1,011.59 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (ऑयलसीड) के लिए 1,793.87 करोड़ रुपये
इन स्वीकृतियों से साफ है कि सरकार खेती को पारंपरिक से आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
प्रशासनिक और खनिज विकास से जुड़े फैसले भी अहम
किसानों के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट ने अहम फैसले लिए। खनिज अन्वेषण और विकास से जुड़े भवन निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के प्रावधानों में बदलाव को भी स्वीकृति मिली है, जिससे भविष्य में प्रशासनिक सुधारों का रास्ता साफ होगा।
सरकार का संदेश साफ: किसान और संस्कृति सर्वोपरि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—किसानों की आय बढ़ाना, खेती को लाभ का धंधा बनाना और जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाना। 10,520 करोड़ के कृषि प्रोजेक्ट्स, बोनस और भावांतर योजना जैसे फैसले इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश की कृषि नीति और ज्यादा मजबूत होने वाली है।