सदियों पुराना है सोन नदी के किनारे बने कुडारी मंदिर का इतिहास…अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं मां कुंडवासिनी
चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू हो गया है। इन पावन दिनों में मंदिरों में भक्तों की भारी उमड़ती है। यूपी में बहुत से ऐसे मंदिर हैं जिनकी कोई न कोई ऐतिहासिक हिस्ट्री है। ऐसा ही एक मंदिर सोनभद्र में जिसकी लोगों के बीच काफी मान्यता है। ये मंदिर सोन नदी के किनारे बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं सोनभद्र जिले के कुड़ारी मंदिर की, इसका इतिहास सैंकड़ों साल पुराना है। साथ ही इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मंदिर में केवल एक ही द्वार है। जहां से श्रद्धालुओं का आना और जाना होता है।
- यूपी का अनोखा मंदिर…
- रहस्य जानकर उड़ सकते हैं होश
- सोनभद्र में स्थित है मैया का ये मंदिर
- सोननदी के किनारे है मां कुंडवासिनी मंदिर
- मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना
- मंदिर में हैं केवल एक ही द्वार
बता दें कि कूड़ारी मंदिर मध्य प्रदेश के लमसरई और उत्तर प्रदेश के नेवारी ग्राम के बीच में सोन नदी के किनारे मां कुंड वासिनी धाम के नाम से प्रसिद्ध है। नदी के किनारे स्थित माता कुंडवासनी का यह मंदिर हजारों साल पुराना है। यहां पर कई शुभ अवसरों पर मां कुंडवासिनी धाम में मेला का आयोजन किया जाता है। हर साल चैत्र नवरात्र में डेढ़ माह तक मेला लगता है।
- मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना
- मंदिर में हैं केवल एक ही द्वार
- जहां से आते-जाते हैं श्रद्धालु
- मंदिर के इतिहास को लेकर है अलग-अलग चर्चा
मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगने वाले सोनभद्र में कुड़ारी गांव में एक मंदिर है। यह मंदिर काफी प्राचीन माना जाता है। मंदिर मां कुंडवासिनी धाम कुड़ारी के नाम से प्रसिद्ध है। जो लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है… यहां पर कुंड की पूजा के साथ ही मंदिर में स्थापित माता कुंडवासनी की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से हाज़िरी लगाने वालों की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
- सोननदी के पास है प्राचीन कुड़ारी मंदिर
- 200 मीटर की दूरी पर है माता कुंड
- सैकड़ों वर्ष पहले प्रकट हुई थी कुंडवासिनी
- मां कुंडवासिनी मंदिर को कुड़ारी नाम से जानते है
कूड़ारी मंदिर के इतिहास की बात करें तो यहां के स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि माता कुंड वासनी की मूर्ति मिलने के बाद यहां पर लाकर एक पेड़ के नीचे रख दी गई थी। इसके बाद मंदिर का निर्माण किया गया और यह सोनभद्र जिले का और मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले का एक बेहतर आस्था का केंद्र और पर्यटक स्थल भी बन गया है।
इस मंदिर की अनोखी खासियत है। मंदिर के अंदर जाने का सिर्फ एक ही द्वार है। लोगों का ऐसा कहना है कि बाहर से आए प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इस मंदिर में एक और द्वार खोलने का प्रयास किया गया। लेकिन एक मजबूत पत्थर से बना हुआ यह मंदिर का दूसरा द्वार नहीं खोला जा सका। इसे आप अलौकिक शक्ति कह सकते हैं। मंदिर के बनावट की मजबूती भी मंदिर का कुछ इस तरह है।
कूड़ारी के रहने वाले सौहार्द बताते हैं सोन नदी के किनारे बसा यह मंदिर कितनी भी तेज बाढ़ आती है लेकिन मंदिर के विराजमान मां कुंडवासिनी की मूर्ति को स्पर्श नहीं कर पाता है।
इस मंदिर के उत्तर साइड में देखा जाए तो सोन नदी के उस पार सिल्पी नाम का एक गांव है। पूर्व राज्यसभा सांसद राम सकल का जन्म स्थान एवं निवास स्थली है। लोगों का यह भी कहना है कि एक बार इस मंदिर पर आकाशी बिजली भी गिरी है। इसके बाद भी इस मंदिर पर कोई नुकसान नहीं हुआ। इसलिए लोग इसे चमत्कारी मंदिर मानते हैं।
मंदिर के प्रधान पुजारी बताते हैं कि वर्तमान में जहां पर कुड़ारी का मंदिर है। वहां पर सोन नदी का किनारा है। मान्यता है कि मंदिर के पूर्व दिशा में 200 मीटर की दूरी पर माता कुंड वासनी सैकड़ों वर्ष पहले प्रकट हुई थी। जहां माता कुंड वासनी के पत्थर की मूर्ति स्थानीय लोगों की ओर से देखा गया और उसे एक जगह पर लाकर स्थापित कर दिया गया। उसी जगह को मां कुंडवासिनी मंदिर कूड़ारी के नाम से जाना जाता है। पुजारी गोपाल गोस्वामी कहते हैं कि मंदिर परिसर में धर्मशाला के निर्माण कार्य होने के साथ ही अन्य विकास कार्य करा दिए जाए तो श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी और पर्यटक को बढ़ावा मिलेगा।…प्रकाश कुमार पांडेय