ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 75 हजार से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने दी थी सेवा युवाओं को लेकर जानें क्या बोले थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

NCC cadets Operation Sindoor

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 75 हजार से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने दी थी सेवा…युवाओं को लेकर जानें क्या बोले थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली। भारतीय सेना के थलसेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश के युवाओं की शक्ति, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की जमकर सराहना करते हुए उन्हें भारत की सबसे बड़ी ताकत और शक्ति का भंडार बताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा, विशेष रूप से जेनरेशन-Z, देश की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली जनसांख्यिकीय शक्ति है, जिसे सही दिशा, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

दिल्ली कैंटोनमेंट स्थित कैरिआप्पा परेड कैंप में आयोजित नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) रिपब्लिक डे कैंप (आरडीसी) 2026 को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि हाल की घटनाओं ने पूरी दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय युवा क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा “हालिया घटनाओं ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारतीय युवा कितने सक्षम हैं। आप जेनरेशन-Z की सबसे बड़ी और सबसे सशक्त आबादी हैं। हमारे युवा शक्ति का ऐसा भंडार हैं, जिसे अनुशासन, उद्देश्य और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ सही दिशा में प्रवाहित करना बेहद जरूरी है।” थलसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा, एकता और प्रगति में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने कहा कि आज का युवा न केवल तकनीक और आधुनिक सोच से जुड़ा है, बल्कि उसमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना भी प्रबल रूप से मौजूद है।

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख करते हुए इसे भारत के संकल्प और संयम का एक ऐतिहासिक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर भारत के दृढ़ संकल्प और संतुलन का एक निर्णायक प्रदर्शन था। यह हमारे सशस्त्र बलों और हमारे युवाओं की नैतिक शक्ति तथा पेशेवर उत्कृष्टता का प्रतिबिंब था। उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान नेशनल कैडेट कोर की भूमिका बेहद सराहनीय रही। जनरल द्विवेदी ने कहा “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देशभर में 75 हजार से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने स्वेच्छा से सेवाएं दीं। उन्होंने सिविल डिफेंस, अस्पताल प्रबंधन, आपदा राहत और सामुदायिक सेवाओं में दिन-रात मेहनत कर महत्वपूर्ण योगदान दिया।”
उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि एनसीसी कैडेट्स न केवल अनुशासित हैं, बल्कि किसी भी राष्ट्रीय चुनौती के समय आगे आकर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।

थलसेना प्रमुख ने एनसीसी कैडेट्स की उपलब्धियों की सराहना करते हुए अन्य क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में एनसीसी के 10 कैडेट्स— जिनमें 5 लड़के और 5 लड़कियां शामिल थीं — ने मात्र 19 वर्ष की औसत आयु में माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक आरोहण किया।
जनरल द्विवेदी ने कहा “मुझे इन कैडेट्स से मिलने और संवाद करने का सौभाग्य मिला। इतनी कम उम्र में इस तरह की उपलब्धि हासिल करना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।”
इससे पहले दिन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता द्विवेदी ने आर्मी हाउस में एनसीसी कैडेट्स का स्वागत किया। इस अवसर पर थलसेना प्रमुख ने कैडेट्स से संवाद करते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में एनसीसी की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी केवल एक संगठन नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करने का एक सशक्त मंच है। जनरल द्विवेदी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए अनुशासन, दृढ़ता, परिश्रम और नेतृत्व को चरित्र निर्माण और उत्कृष्टता की आधारशिला बताया।

थलसेना प्रमुख ने चयनित उत्कृष्ट कैडेट्स को सम्मानित भी किया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से भारत के शाश्वत मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि देश की परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़कर ही युवा सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।

अपने संबोधन के अंत में जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ें, तो देश को कोई भी चुनौती कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने विश्वास जताया कि एनसीसी कैडेट्स आने वाले समय में न केवल सशस्त्र बलों, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। थलसेना प्रमुख का यह संदेश युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला और उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने वाला माना जा रहा है। यह संबोधन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना और देश का नेतृत्व युवाओं को भारत की सबसे बड़ी पूंजी मानता है।

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