विदेशों की जेलों में 10,000 से ज्यादा भारतीय बंद, निमिषा प्रिया की फांसी फिलहाल टली – जानिए पूरी तस्वीर
निमिषा प्रिया की फांसी पर फिलहाल रोक, भारत सरकार के प्रयास सफल
यमन में हत्या के कथित आरोप में दोषी करार दी गई केरल की नर्स निमिषा प्रिया को आज 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी थी, लेकिन भारत सरकार और भारतीय अधिकारियों के अंतिम क्षणों के प्रयासों को सफलता मिली और इसके चलते फांसी फिलहाल यह सजा टाल दी गई है। निमिषा फिलहाल सना की जेल में बंद हैं।
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक भारत सरकार ने यमन सरकार से आग्रह कर कुछ और समय मांगा ताकि निमिषा का परिवार पीड़ित पक्ष से मुआवज़े और समझौते की कोशिश कर सके। यह प्रक्रिया यमन की न्याय प्रणाली में “दीया” (ब्लड मनी) के तहत होती है, जिससे फांसी से बचने की संभावना बनती है।
निमिषा प्रिया की फांसी पर फिलहाल रोक
भारत सरकार के प्रयास सफल
अब भी 10 हजार से ज्यादा भारतीय विदेशों की जेलों में बंद
संसदीय समिति की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि 10,152 भारतीय नागरिक इस समय दुनिया के अलग-अलग देशों की जेलों में बंद हैं। इनमें से अधिकांश पर स्थानीय कानूनों के उल्लंघन, वीजा नियमों, या आपराधिक मामलों में सजा पाई गई है। विदेश मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी कि यह आंकड़ा 2024 के अंत तक का है।
इन 12 देशों में सबसे अधिक भारतीय कैदी
कुछ देशों में भारतीयों की गिरफ्तारी और सजा के मामलों की संख्या बहुत अधिक है। नीचे उन 12 देशों की सूची दी जा रही है, जहां 100 से अधिक भारतीय नागरिक जेलों में हैं:
देश कैदियों की संख्या
सऊदी अरब 2,647
यूएई 2,479
नेपाल 1,187
कतर 740
कुवैत 387
मलेशिया 371
यूके 288
बहरीन 272
चीन 185
इटली 164
श्रीलंका 143
ओमान 117
अब तक 49 भारतीयों को मौत की सजा, सबसे ज्यादा UAE में
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 8 प्रमुख देशों में 49 भारतीय नागरिकों को मौत की सजा सुनाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा मामले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से हैं, जहां 25 भारतीय मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा:
सऊदी अरब – 11
मलेशिया – 6
कुवैत – 3
अमेरिका, कतर, इंडोनेशिया, और यमन – 1-1
सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में मौत की सजा आम तौर पर हत्या, ड्रग्स तस्करी, या गंभीर अपराधों में दी जाती है। कैदियों की वापसी के लिए भारत ने 31 देशों से किया करार, फिर भी नतीजे सीमित।
भारत ने अब तक 31 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं, जिससे विदेशी जेलों में बंद भारतीयों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया आसान हो सके। फिर भी पिछले तीन सालों में सिर्फ 8 भारतीय कैदियों को ही भारत लाया जा सका है।
इस प्रक्रिया में दो शर्तें होती हैं
पहली शर्त कैदी की सहमति
दूसरी शर्त दोनों ही देशों की सरकारों से अनुमति लेना
कई बार राजनीतिक या कूटनीतिक कारणों से ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। निमिषा प्रिया की फांसी का टलना भारत सरकार की कूटनीतिक सक्रियता का परिणाम है, लेकिन यह मामला विदेशी जेलों में बंद हजारों भारतीयों की पीड़ा की एक झलक भर है। इन मामलों में सरकार की कोशिशें लगातार जारी हैं, पर कानूनी जटिलताओं और स्थानीय नियमों के कारण सीमाएं भी हैं। नागरिकों को विदेश यात्रा के दौरान वहां के कानूनों की जानकारी और सावधानी रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी उन्हें वर्षों तक जेल या मौत की सजा तक ले जा सकती है। प्रकाश कुमार पांडेय