भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम इन दिनों लगातार करवट बदल रहा है। कहीं प्री-मानसून गतिविधियों के चलते बारिश हो रही है तो कहीं तेज धूप और उमस लोगों को बेहाल कर रही है। जून के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते ही प्रदेशवासियों की नजरें अब मानसून की दस्तक पर टिकी हैं। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मानसून 15 से 25 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। हालांकि इसके आगमन की गति और प्रभाव मानसूनी हवाओं तथा मौसमीय तंत्रों की सक्रियता पर निर्भर करेगा।
- मध्य प्रदेश में मानसून आगमन की उल्टी गिनती शुरू
- अगले कुछ दिन बढ़ाएंगे गर्मी और उमस की परेशानी
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं का असर
- ग्वालियर-चंबल में मानसून पहुंचने में हो सकती है देरी
- मौसम विभाग ने किसानों और आमजन को किया सतर्क
मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी ने एक बार फिर अपने तीखे तेवर दिखाए। दिनभर तेज धूप के कारण लोगों को उमस और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा। राजधानी भोपाल सहित कई शहरों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम दिखाई दी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून आने से पहले अगले कुछ दिन गर्मी और बेचैनी बढ़ा सकते हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भोपाल में मानसून की सामान्य दस्तक 15 जून के आसपास मानी जा रही है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसूनी गतिविधियां पूरे प्रदेश में फैलेंगी और लगभग 25 जून तक मध्य प्रदेश का अधिकांश हिस्सा मानसून की बारिश से प्रभावित हो सकता है। हालांकि ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी और चंबल संभाग के कुछ इलाकों में मानसून के पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मानसून की स्थिति काफी हद तक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली दोनों शाखाओं की सक्रियता पर निर्भर करेगी। वर्तमान में दोनों शाखाएं अच्छी गति से आगे बढ़ रही हैं। यदि मानसूनी हवाओं की रफ्तार और नमी का स्तर अनुकूल बना रहा तो प्रदेश में समय पर अच्छी बारिश की संभावना बन सकती है। वहीं यदि किसी कारणवश मौसमीय तंत्र कमजोर पड़ते हैं तो मानसून की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां मानसून का प्रभाव दोनों समुद्री शाखाओं से पड़ता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बंगाल की खाड़ी शाखा का असर अधिक दिखाई देता है, जबकि पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों पर अरब सागर शाखा का प्रभाव रहता है। यही वजह है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून के प्रवेश और वर्षा की मात्रा में अंतर देखने को मिलता है।
राजधानी भोपाल में बीते कुछ दिनों से गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का दौर जारी था। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब मौसम साफ होने के साथ तापमान में फिर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटों में भोपाल का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से अधिक रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दो दिनों तक तापमान में और वृद्धि हो सकती है तथा उमस लोगों की परेशानी बढ़ाएगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्री-मानसून गतिविधियां अभी भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में जारी रहेंगी। कहीं-कहीं बादल छाने, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि इन गतिविधियों से व्यापक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही प्रदेश में गर्मी का प्रभाव कम होगा।
कृषि क्षेत्र की दृष्टि से भी मानसून का समय पर आगमन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश के किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हुए हैं और उन्हें अच्छी बारिश का इंतजार है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून समय पर पहुंचता है और शुरुआती दौर में पर्याप्त वर्षा होती है तो सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई बेहतर तरीके से हो सकेगी।
फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय तेज धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। गर्मी और उमस के कारण बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। 15 से 25 जून के बीच बारिश का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक प्रदेशवासियों को गर्मी, उमस और बदलते मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। मानसून की पहली फुहारें जहां किसानों के लिए उम्मीद लेकर आएंगी, वहीं आम लोगों को भी भीषण गर्मी से राहत दिलाएंगी।





