संसद के मानसून सत्र से पहले INDIA गठबंधन की वर्चुअल बैठक में केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की गई। यह बैठक 2024 लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष की पहली बड़ी संगठित कोशिश थी, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने की। इसमें 24 दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मुख्य रूप से पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, और डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर दिए गए बयान विपक्ष की रणनीति के केंद्र में रहे। विपक्ष ने यह साफ कर दिया कि वह इन मुद्दों को लेकर संसद में सरकार से सीधा और स्पष्ट जवाब मांगेगा।
मानसून सत्र से पहले विपक्ष की अहम बैठक
- तीन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेगा INDIA गठबंधन
- बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे और सरकार की तैयारियां
- बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई
- पहलगाम आतंकी हमले में खुफिया एजेंसियों की नाकामी
- ऑपरेशन सिंदूर और सीमा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं
- ट्रंप का भारत के पक्ष में सीज़फायर पर दावा और उसकी सच्चाई
- केंद्र सरकार की विदेश नीति की कमजोरियां
- डिलिमिटेशन और सामाजिक न्याय से जुड़ी मांगें
- विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों का दबाव (ईडी, सीबीआई आदि)
- पेगासस जासूसी कांड को फिर से बहस में लाना
- चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR कार्यक्रम की वैधता पर सवाल
बैठक में विपक्षी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सेना के साहस और बलिदान का सम्मान किया जाएगा, लेकिन खुफिया एजेंसियों की विफलता और विदेश नीति की कमजोरियों को उजागर करना भी जरूरी है। संसद के दोनों सदनों में संगठित तरीके से इन मुद्दों को उठाने की योजना बनाई गई है।
राहुल गांधी ने एकजुट विपक्ष पर दिया जोर, खड़गे ने तय किए प्राथमिक मुद्दे
बैठक में राहुल गांधी ने विपक्ष की एकता को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी बिखराव का लाभ सीधा सत्ताधारी भाजपा को मिलता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी दल पहले से ही मुद्दों की प्राथमिकता तय कर लें और संसद में समन्वित ढंग से अपनी बात रखें।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष को सरकार से हर सवाल का सीधा जवाब चाहिए। उन्होंने संसद सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों की प्राथमिकता तय करने की आवश्यकता बताई। खड़गे ने संसद में विपक्षी दलों की सामूहिक ताकत को दर्शाने की बात पर जोर दिया।
बैठक में मतभेद भी उभरे
डी राजा ने राहुल गांधी के बयान पर जताई नाराजगी
जहां एक ओर विपक्ष एकजुटता की बात कर रहा है। वहीं बैठक में कुछ मतभेद भी सामने आए। CPI नेता डी राजा ने राहुल गांधी द्वारा केरल में CPM और RSS की तुलना किए जाने पर अप्रत्यक्ष नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इस तरह के बयान विपक्षी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा करते हैं। एकजुट प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं। हालांकि बैठक पर इस मतभेद का कोई विपरीत प्रभाव नहीं हुआ, लेकिन विपक्ष के लिए यह एक संकेत है कि रणनीति के साथ संवाद की भी आवश्यकता है। जिससे सार्वजनिक मंचों पर गलतफहमी से बचा जा सके।
सरकार पेश करेगी 8 नए विधेयक
सरकार इस सत्र में 8 नए विधेयक पेश करने जा रही है, जिनमें टैक्स सुधार, खनन नीतियों का संशोधन और राष्ट्रीय खेल प्रशासन से जुड़े कानून शामिल हैं। विपक्ष ने इन विधेयकों की बारीकी से समीक्षा कर, ज़रूरत पड़ने पर संशोधन और विरोध के साथ चर्चा में भाग लेने का फैसला किया है।
विपक्ष का दावा ‘देश बचाओ, बीजेपी हटाओ’ का नारा देश में गूंजेगा
INDIA गठबंधन की बैठक ‘देश बचाओ, बीजेपी हटाओ’ के नारे के साथ हुई। यह नारा अब विपक्ष की रणनीतिक मुहिम का आधार बनेगा। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग और ईडी जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग का मुद्दा जोर से उठाया और पेगासस कांड को संसद में फिर से उठाने की बात कही। हालांकि, बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हुई, और उनकी गैरमौजूदगी पर कोई खास चर्चा नहीं हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि विपक्षी एकता अभी भी कुछ स्तरों पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। फिर भी, प्रमुख दलों के बीच सहमति बनी है कि संसद के मानसून सत्र में सरकार को हर मोर्चे पर जवाबदेह बनाया जाएगा। तिवारी ने यह भी कहा कि PM को संसद में मौजूद रहकर हर मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। INDIA गठबंधन की यह बैठक विपक्ष की तरफ से एक स्पष्ट संकेत है कि मानसून सत्र सिर्फ औपचारिक चर्चा का मंच नहीं रहेगा, बल्कि सरकार को सीधी और तीखी चुनौती दी जाएगी। अब देखना यह होगा कि संसद में यह रणनीति कितनी कारगर सिद्ध होती है और क्या सरकार विपक्ष के इन सवालों का संतोषजनक जवाब दे पाती है या नहीं। प्रकाश कुमार पांडेय