बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र: विधानसभा की सियासी गर्मी में लालू परिवार की ठंडी बयार? तेजस्वी-तेजप्रताप आमने-सामने नहीं, साथ-साथ..!

विधानसभा की सियासी गर्मी में लालू परिवार की ठंडी बयार? तेजस्वी-तेजप्रताप आमने-सामने नहीं, साथ-साथ

बिहार विधानसभा का अंतिम सत्र: चुनावी माहौल में राजनीतिक हलचल तेज

बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र आज, 21 जुलाई सोमवार से शुरू हो गया है और यह 25 जुलाई तक चलेगा। यह मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र है, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर में राज्य में चुनाव होने वाले हैं। इस सत्र को खास बनाता है न सिर्फ इसका आखिरी होना, बल्कि लालू परिवार की अंदरूनी हलचलों का असर भी जो विधानसभा के माहौल में दिखने वाला है।

पार्टी और परिवार से बाहर, फिर भी साथ
सीटिंग अरेंजमेंट बनी चर्चा का विषय

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को ढाई महीने पहले पार्टी और पारिवारिक घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। तेजप्रताप की गर्लफ्रेंड अनुष्का के साथ वायरल फोटो ने इस विवाद को और तूल दे दिया था। इसके बाद लालू ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी से निकाल दिया। लेकिन आज जब विधानसभा सत्र शुरू हुआ, तो तेजप्रताप और तेजस्वी यादव को एक-दूसरे के बगल में बैठा देखा गया। विधानसभा सचिवालय ने दोनों की सीटिंग में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या राजनीतिक मंच पारिवारिक दूरी को मिटा पाएगा?

तेजस्वी की नाराजगी और तेजप्रताप की बगावती चालें

विवाद के बाद तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक रूप से तेजप्रताप पर नाराजगी जाहिर की थी। उन पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ही तेजप्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर करने की पहल की थी। तेजप्रताप की प्रतिक्रिया भी तीखी रही, और वह कई बार मीडिया में आरजेडी के खिलाफ बयान देते दिखे। इसके अलावा वे अलग दल से चुनाव लड़ने की तैयारी और विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करते भी देखे गए। ये घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि अब भाई-भाई के बीच की दूरी लंबी हो चुकी है।

राजनीतिक मजबूरी या रिश्तों की नरमी? एक मंच पर दो चेहरे

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी और तज प्रताव यादव दोनों भाई एक साथ दिख रहे हैं। इससे पहले मई 2025 में भी ‘अत्यंत पिछड़ा वर्ग जागरूकता सम्मेलन’ के दौरान दोनों एक मंच पर नजर आए थे। तब वह एक तरह से दोनों की औपचारिक उपस्थिति ही थी। लेकिन राज्य विधानसभा में साथ बैठना सिर्फ औपचारिकता नहीं है बल्कि यह एक सियासी संकेत भी दे रहा है। राज्य विधानसभा के इस अंतिम सत्र के दौरान यदि दोनों भाईयों के बीच संवाद की शुरुआत होती है, तो यह केवल परिवार ही नहीं बल्कि आरजेडी के लिए भी राहत की बात होगी। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि चुनावी मजबूरी दोनों को फिर से एक मंच पर ला सकती है।

क्या विधानसभा सत्र से खुलेगा ‘घरवापसी’ का रास्ता?

तेजप्रताप यादव, जो अब तक पार्टी से अलग चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे, अब शायद फिर से आरजेडी की छतरी में आना चाहें। विधानसभा सत्र में बैठने की व्यवस्था और सार्वजनिक उपस्थिति से संकेत मिल रहे हैं कि सुलह की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। यह पांच दिवसीय सत्र पार्टी के लिए एक परीक्षण भी होगा – कि क्या वह अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाकर एकजुट हो सकती है या नहीं।

लालू परिवार की दो सबसे अहम राजनीतिक संतानों का साथ बैठना राजनीतिक पटल पर एक बड़ा प्रतीकात्मक संकेत है। चुनाव से पहले यदि इन दोनों के रिश्ते सामान्य होते हैं, तो इसका असर आरजेडी की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। अब देखना यह है कि यह पास बैठना राजनीतिक समीकरण बदलता है या केवल कैमरों के लिए एक औपचारिक मिलन साबित होता है। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)

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