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Home शहर और राज्य महाराष्ट्र

उपद्रवी बंदरों को पकड़ने वाले होंगे मालामाल…इस राज्य की सरकार देगी पैसा..

DigitalDesk by DigitalDesk
November 26, 2025
in महाराष्ट्र, मुख्य समाचार, मुंबई, शहर और राज्य, संपादक की पसंद
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Monkey nuisance activities are on the rise in Mumbai and surrounding areas
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उपद्रवी बंदरों को पकड़ने वाले होंगे मालामाल…इस राज्य की सरकार देगी पैसा..

मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रही बंदरों की उपद्रवी हरकतों से लोगों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब उपद्रवी बंदरों को पकड़ने वालों को सीधे आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने इस पूरे अभियान के लिए विस्तृत कार्य प्रणाली जारी कर दी है। दरअसल मानव और वन्यजीव संघर्ष पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, खासकर शहरी और ग्रामीण मिलेजुले क्षेत्रों में। बंदरों और वानरों की बढ़ती आवाजाही के बीच महाराष्ट्र सरकार ने इनके बचाव, पकड़ने और रिहाई को लेकर नया प्लान जारी किया है।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि कई बार बंदर न सिर्फ लोगों को चोट पहुँचाते हैं, बल्कि फसलों, घरों और दुकानों को भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए अब पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से लागू करने का निर्णय लिया गया है।

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बंदर पकड़ने पर आर्थिक सहायता

सरकार ने आर्थिक सहायता का स्पष्ट ढांचा तय कर दिया है। 10 बंदर पकड़ने की स्थिति में प्रति बंदर 600 रुपए दिए जाएंगे। अधिकतम राशि कुल 6,000 रुपए दिए जाएंगे।
10 से अधिक बंदर पकड़ने पर प्रति बंदर 300 रुपए। अधिकतम आर्थिक सहायता — 10,000 रुपए। 1 से 5 बंदर पकड़ने पर यात्रा खर्च — 1,000 रुपए। 5 से अधिक बंदर होने पर
यात्रा खर्च नहीं मिलेगा। सभी भुगतान डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे खातों में भेजे जाएंगे।

कैसे और कहाँ पकड़े जाएंगे बंदर?

महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत और विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में यह अभियान चलेगा। पकड़े गए हर बंदर की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। बंदरों और वानरों को पकड़ने के लिए सिर्फ जाली और पिंजरे का उपयोग किया जाएगा। पकड़े गए बंदरों को उपचार के बाद मानव बस्ती से 10 किलोमीटर दूर सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। यह काम वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) की अनुमति और मौजूदगी में होगा।

प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की नियुक्ति

वन विभाग इस पूरे काम के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और रेस्क्यू टीमों की नियुक्ति करेगा। हर जिले में बंदरों को पकड़ने वाले व्यक्तियों। रजिस्टर्ड संस्थाओं की सूची तैयार की जाएगी।
यह टीम न सिर्फ पकड़ने का काम करेंगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेंगी कि जानवरों को किसी तरह की चोट या नुकसान न पहुँचे।

शिकायतों का पंजीयन और जांच प्रक्रिया

स्थानीय निकायों को क्षेत्र में बंदरों द्वारा किए गए नुकसान। लोगों की शिकायतें। संपत्ति क्षति की रिपोर्ट। इकट्ठा कर वन विभाग को भेजनी होगी।। इसके बाद संबंधित RFO पहले मौके का निरीक्षण करेगा। घटना की सत्यता की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सहायक वन संरक्षक (ACF) को सौंपी जाएगी। यानी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश की गई है।।

सरकार का मकसद क्या है?

सरकार का कहना है कि बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करना। लोगों और वन्य प्राणियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। अनियंत्रित शहरीकरण के बीच वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करना। बंदरों के झुंडों को सुरक्षित अधिवास क्षेत्रों में पुनर्स्थापित करना। इसके साथ ही यह अभियान बंदरों को मारने या नुकसान पहुँचाने जैसे गलत तरीकों को रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। सरकार की इस नई नीति से जहां शहरों और गांवों में बंदरों से परेशान लोगों को राहत मिलेगी, वहीं वन्य प्राणी संरक्षण के नियम भी और मजबूत होंगे। अब बंदरों को पकड़ना सिर्फ लोगों की मजबूरी नहीं, बल्कि सरकार द्वारा नियंत्रित और सुरक्षित प्रक्रिया बन जाएगा। आगे देखना होगा कि इस प्लान के लागू होने के बाद बंदरों का उत्पात कितना कम होता है और लोग कितनी राहत महसूस करते हैं।

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Tags: Mumbai Monkey nuisance activities
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