रोलिंग बजट से बदलेगी MP की तस्वीर: मोहन सरकार का 2026 का रोडमैप
मध्यप्रदेश में बजट 2026 की तैयारी तेज
भोपाल। मध्यप्रदेश में बजट 2026 को लेकर मोहन यादव सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा सचिवालय की ओर से बजट सत्र की अधिसूचना जारी हो चुकी है। यह सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान राज्य सरकार पहली बार पारंपरिक बजट से हटकर रोलिंग बजट का कॉन्सेप्ट पेश करने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार करीब 4.65 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया जाएगा, जिसमें युवाओं, किसानों, कर्मचारियों और आम जनता के लिए कई अहम घोषणाएं हो सकती हैं।
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बजट 2026 की तैयारी
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मोहन सरकार का रोलिंग बजट
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तीन साल का वित्तीय रोडमैप
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कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस
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50 हजार नौकरियां संभव
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किसानों पर विशेष फोकस
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सहकार टैक्सी सेवा प्रस्तावित
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वेतन भत्तों का नया सिस्टम
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इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
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राजस्व बढ़ाना सरकार की चुनौती
क्या है रोलिंग बजट, क्यों अहम?
रोलिंग बजट को इस बजट की सबसे बड़ी खासियत माना जा रहा है। यह सामान्य बजट से अलग होता है क्योंकि इसमें सिर्फ एक वित्तीय वर्ष नहीं, बल्कि अगले तीन वर्षों—2026-27, 2027-28 और 2028-29—का विस्तृत वित्तीय रोडमैप पेश किया जाता है। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं की निरंतर समीक्षा संभव होगी और खर्च पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। रोलिंग बजट से विकास योजनाओं में स्थिरता आएगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य की दीर्घकालिक प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी। साथ ही, योजनाओं को हर साल अपडेट करने की सुविधा भी रहेगी, जिससे बदलती जरूरतों के अनुसार फैसले लिए जा सकेंगे।
कर्मचारियों और पेंशनरों को हेल्थ सुरक्षा
मोहन सरकार के बजट 2026 की सबसे बड़ी संभावित घोषणा राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए मेगा हेल्थ इंश्योरेंस योजना मानी जा रही है। प्रस्तावित योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 35 लाख रुपए तक का कैशलैस कवर मिल सकता है। वहीं, सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए तक की सुविधा देने की तैयारी है। इस योजना से करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर लाभान्वित हो सकते हैं। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में बिना अग्रिम भुगतान के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है। योजना में कर्मचारियों के लिए वेतन के अनुसार मामूली मासिक अंशदान और पेंशनरों के लिए एकमुश्त अंशदान का विकल्प रखा जा सकता है।
युवाओं के लिए 50 हजार नौकरियों की उम्मीद
बजट 2026 से युवाओं को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है। सरकार 50,000 से अधिक सरकारी भर्तियों की घोषणा कर सकती है। ये भर्तियां MPPSC और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाएंगी। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं। इसके साथ ही युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। युवा उद्यमी योजना को विस्तार देने, स्टार्टअप्स को आसान ऋण और तकनीकी सहायता देने की तैयारी है, ताकि युवा सिर्फ नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकें।
किसानों के लिए ‘कृषक कल्याण वर्ष’
सरकार ने 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है, जिसका असर बजट में साफ नजर आएगा। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान संभव है। हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा 7.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण और किसान कल्याण योजनाएं जारी रह सकती हैं। सरसों को भावांतर भुगतान योजना में शामिल करने और जैविक खेती को प्रोत्साहन देने की भी संभावना है।
‘सहकार टैक्सी’ से शहरी परिवहन में बदलाव
शहरी परिवहन को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए सरकार ‘सहकार टैक्सी सेवा’ शुरू कर सकती है। यह सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित होगी। इस मॉडल में ड्राइवरों को निजी कंपनियों को भारी कमीशन नहीं देना होगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और यात्रियों को किफायती राइड मिलेगी। इसकी शुरुआत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से हो सकती है।
वेतन-भत्तों की नई गणना प्रणाली
बजट में कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की गणना के लिए नया सिस्टम लागू करने की संभावना है। इसमें 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की गणना 74%, 84% और 94% के स्तर पर की जा सकती है। साथ ही, कर्मचारियों के लिए उपहार लेने की सीमा 500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए किए जाने पर भी विचार हो रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और ऊर्जा पर फोकस
सरकार इस बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दे सकती है। सड़कों, पुलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए 90 हजार करोड़ रुपए से अधिक का पूंजीगत व्यय संभव है। एमपी की शिक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार 450 नए सांदीपनि विद्यालय खोलने की येाजना बना रही है। इसके साथ ही राज्य में स्कूल-कॉलेजों की सुविधाओं को बेहतर करने की भी योजना पर मोहन सरकार काम कर रही है। जबकि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में साल 2030 तक मध्यप्रदेश 50 प्रतिशत बिजली जरूरत नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।
राजस्व बढ़ाना बनी बड़ी चुनौती
वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, लाड़ली बहना योजना और बिजली सब्सिडी जैसे खर्चों के चलते सरकार पर वित्तीय दबाव बना रहेगा। ऐसे में आबकारी, खनिज, निवेश और उद्योगों के जरिए राजस्व बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। कुल मिलाकर, बजट 2026 को रोजगार, स्वास्थ्य, किसान कल्याण और विकास के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।





