मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र…जानें मोहन सरकार की तैयारी…बजट में किस वर्ग को साधेगी सरकार

Mohan Sarkar preparations for the Madhya Pradesh Assembly budget session

मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज 16 फरवरी से शुरू हो रहा है। राज्यपाल के अभिभाषण के साथ सत्र का आगाज हो रहा है जबकि राज्य का आम बजट 18 फरवरी को पेश किया जाएगा। इस बार का बजट कई मायनों में खास माना जा रहा है।

MP सरकार के बजट में क्या होगा खास?

जनहित, विकास और डिजिटल बदलाव पर फोकस

जनता के सुझावों पर आधारित होगा बजट

इस बार राज्य सरकार ने बजट निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सहभागी और पारदर्शी बनाने की कोशिश की है। आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त सुझावों को संकलित (कम्पाइल) कर उन्हें बजट में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने संकेत दिया है कि इस बार का बजट “अच्छा और जनहितैषी” होगा। उन्होंने कहा कि विषय विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा के बाद बजट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जरूरत के मुताबिक जनकल्याणकारी नीतिगत फैसले लेना है, ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिल सके।

किन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस?

वित्त मंत्री ने इशारा किया है कि इस बार के बजट में संतुलित विकास की रूपरेखा अपनाई जाएगी। खासतौर पर निम्न क्षेत्रों पर जोर रहने की संभावना है—

  • कृषि क्षेत्र: किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा सकता है।

  • औद्योगिक विकास: राज्य में निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं।

  • शिक्षा क्षेत्र: स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के बुनियादी ढांचे में सुधार, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य: ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अस्पतालों के उन्नयन और नई स्वास्थ्य योजनाओं पर विशेष प्रावधान संभव है।

  • भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, बिजली, पानी और शहरी विकास परियोजनाओं के लिए बजट में पर्याप्त आवंटन किए जाने के संकेत हैं।

सरकार का प्रयास रहेगा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और बजट सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए।

बजट सत्र  में डिजिटल क्रांति

इस बार का बजट सत्र केवल वित्तीय घोषणाओं के कारण ही नहीं, बल्कि तकनीकी बदलावों के कारण भी चर्चा में है। मध्य प्रदेश विधानसभा के कामकाज को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मध्य प्रदेश का आगामी बजट केवल आर्थिक प्रावधानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार और तकनीकी आधुनिकीकरण का भी प्रतीक होगा। एक ओर जहां किसानों, युवाओं, छात्रों और उद्योग जगत को नई उम्मीदें हैं, वहीं दूसरी ओर विधानसभा की डिजिटल व्यवस्था राज्य की शासन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब सभी की निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में बजट पेश करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने “जनहितैषी और संतुलित विकास” के वादे को किस रूप में मूर्त रूप देती है।

विधायकों की मेज पर टैबलेट

16 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में सभी विधायकों की मेज पर टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NEVA) के तहत की जा रही है। शुरुआती चरण में विधायकों को बजट से जुड़े दस्तावेज, कार्यसूची और अन्य जरूरी सामग्री टैबलेट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, टैबलेट का पूर्ण उपयोग आगामी सत्रों में किया जाएगा, क्योंकि अधिकांश विधायकों को इसके संचालन का प्रशिक्षण दिया जाना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार बिजली कनेक्शन और तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और बजट सत्र से पहले सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

कागज की खपत होगी कम…समय की होगी बचत

देश के कई राज्यों में ई-विधान प्रणाली पहले ही लागू हो चुकी है। मध्य प्रदेश में भी इसके लागू होने से विधानसभा की कार्यवाही अधिक तेज, पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल बनेगी। कागज की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे हर साल करोड़ों रुपये की बचत संभव है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि इस पहल से कार्यवाही के दौरान होने वाला भारी खर्च कम होगा और डिजिटल माध्यम से कामकाज अधिक प्रभावी बनेगा।

हिंदी में सामग्री, वॉइस सर्च की सुविधा

टैबलेट में उपलब्ध अधिकतर सामग्री हिंदी भाषा में होगी, जिससे विधायकों को सुविधा मिलेगी। साथ ही हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद की सुविधा भी रहेगी।

टैबलेट में निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी—

  • प्रश्नों और कार्यसूची को सर्च करने का विकल्प

  • माइक्रोफोन की मदद से बोलकर सर्च करने की सुविधा

  • पासवर्ड आधारित सुरक्षित लॉगिन

  • डिजिटल स्क्रीन पर सिंगल क्लिक में जानकारी

प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए प्रश्न और उनके उत्तर भी स्क्रीन पर उपलब्ध रहेंगे। इससे विधायकों को त्वरित जानकारी मिलेगी और कार्यवाही में गति आएगी। ई-विधान परियोजना का संचालन राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC) की देखरेख में किया जा रहा है। नेवा (NEVA) परियोजना के तहत देश की सभी विधानसभाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का लक्ष्य है। इससे राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा और विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

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