मोहन सरकार का दूसरा अनुपूरक बजट… बजट से मिलेगी राज्य सरकार के विकास को नई गति

Mohan government second supplementary budget

मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत वित्त वर्ष 2025–26 का दूसरा अनुपूरक बजट राज्य सरकार के विकास–दृष्टिकोण और उसकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आया है। कुल 13,476 करोड़ 94 लाख रुपये के इस प्रावधान में ग्रामीण उत्थान, महिलाओं की आर्थिक मजबूती, जल प्रबंधन, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण और औद्योगिक विस्तार को प्राथमिक आधार बनाया गया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे जनकल्याण की सतत यात्रा बताते हुए कहा कि यह बजट राज्य निर्माण को अधिक गति देने वाला है। संक्षेप में कहा जाए तो यह अनुपूरक बजट साफ संकेत देता है कि सरकार ने अपनी नीति के केंद्र में गांव, गरीब, महिला, युवा और विकास से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं को रखा है। यह रुझान सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं बल्कि दीर्घकालिक प्रगतिशील ढाँचे की ओर बढ़ते मध्य प्रदेश की झलक भी प्रस्तुत करता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 4,000 करोड़ रुपये का भारी आवंटन इस बात को रेखांकित करता है कि आवास निर्माण केवल मकान देना भर नहीं, बल्कि ग्रामीणों को स्थायित्व और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। मकान निर्माण से स्थानीय मजदूरी बढ़ती है, निर्माण–सामग्री की मांग बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आती है। इसी क्रम में पंचायत विभाग को 1,633 करोड़ रुपये की राशि 15वें वित्त आयोग के निर्देशों के अनुरूप दी गई है, जो पंचायत स्तर पर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करेगी। स्थानीय शासन जितना सुदृढ़ होगा, ग्रामीण विकास की गति उतनी ही व्यापक और टिकाऊ होगी।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1,794 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि महिला सशक्तिकरण, राज्य सरकार के विकास मॉडल का केंद्रीय तत्व है। इस योजना ने लाखों महिलाओं को आर्थिक आधार प्रदान किया है और नए आवंटन से इस पहल का विस्तार और सुदृढ़ क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। महिलाओं के हाथ में संसाधन पहुंचने का परिणाम केवल घरेलू स्तर पर स्थिरता ही नहीं देता बल्कि सामाजिक ढांचे में भी सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

अनुपूरक बजट में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास के क्षेत्र में किए गए प्रावधान सरकार की कृषि–केंद्रित सोच को उजागर करते हैं। नर्मदा घाटी विकास विभाग को डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार के लिए 200 करोड़ रुपये और इंदिरा सागर परियोजना हेतु 94 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं जल संसाधन विभाग को बांधों तथा जल संरचनाओं के रख-रखाव के लिए 300 करोड़, और बहुती फिल्टर संयंत्र-2 (फेज-2) के लिए 63 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह निवेश सिंचाई क्षमता बढ़ाने, जल उपलब्धता बेहतर करने और कृषि उत्पादकता को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य है। इसके साथ ही भावांतर/लेट रेट योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किसानों को बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा कदम है।

शहरी क्षेत्रों की बढ़ती आबादी और सुविधाओं के दबाव को देखते हुए शहरी विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अमृत मिशन 2.0 के लिए 150 करोड़ रुपये, मिलियन-प्लस शहरों के लिए 115 करोड़ और एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान यह संकेत देता है कि सरकार शहरी जीवन को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए बड़ी योजनाओं पर काम कर रही है।

लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि नई सड़कों, पुलों और सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण से जुड़ी अधिग्रहण संबंधी अड़चनों को दूर किया जा सके। साथ ही मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने और इसके लिए 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति देने के फैसले से यह स्पष्ट है कि शहरों में पेयजल, स्ट्रीट लाइट, नाली, खेल मैदान, सामुदायिक भवन जैसी आधारभूत सुविधाओं पर निरंतर कार्य जारी रहेगा। इस योजना के तहत अब तक 1,062 परियोजनाएं स्वीकृत हैं—जिनमें 325 पूरी हो चुकीं, 407 प्रगति पर हैं और 330 डीपीआर/निविदा प्रक्रिया में हैं।

औद्योगिक विकास के क्षेत्र में 650 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, सर्वे और अन्य प्रक्रियाओं के लिए तथा 2,000 करोड़ रुपये ऋण सहायता हेतु निर्धारित किए गए हैं। इससे प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ-साथ MSME क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह क्षेत्र रोजगार सृजन का मुख्य आधार है, इसलिए औद्योगिक निवेश में वृद्धि राज्य की आर्थिक गति को नई दिशा देगी।

शिक्षा और जनजातीय विकास को भी बजट में बराबर महत्व दिया गया है। पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) के लिए 122 करोड़ रुपये और धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान जनजातीय क्षेत्रों में विकास, शिक्षा और बराबरी की भावना को बढ़ाएगा। इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से सामाजिक और आर्थिक उन्नति का रास्ता खुलता है।

समग्र रूप से देखें तो यह अनुपूरक बजट बताता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार विकास के बहुआयामी मॉडल पर काम कर रही है—गांवों में आवास उपलब्धता से लेकर महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा, किसानों की आय स्थिरता, जल संसाधन विस्तार, शहरी सुविधाओं का आधुनिकीकरण, और औद्योगिक निवेश में तेजी—हर दिशा में संतुलित और व्यापक दृष्टि अपनाई गई है।यह बजट महज आंकड़ों का हिसाब नहीं, बल्कि भविष्य के मध्य प्रदेश का ढांचा तय करने वाला दस्तावेज है। यदि इन योजनाओं का सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो राज्य निश्चित रूप से ग्रामीण समृद्धि, महिला सशक्तिकरण, कृषि स्थिरता, औद्योगिक प्रगति और शहरी विकास के नए आयाम हासिल करेगा।

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