नयी दिल्ली: शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टेलीफोन पर बातचीत हुई। इसमें मोदी ने अपनी इस बात को दोहराया कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। आपको याद दिला दें कि इससे पहले समरकंद में एससीओ की बैठक में भी मोदी ने कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है। मोदी-पुतिन वार्ता के तुरंत बाद ही अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
- पीएम मोदी और पुतिन के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता
- द्विपक्षीय संबंधों के कई पहलुओं की हुई समीक्षा
- जी-20 की अध्यक्षता पर भी दी जानकारी
- अमेरिकी विदेश विभाग ने मोदी के स्टैंड को सराहा
द्विपक्षीय संबंधों की अहमियत
पुतिन के साथ पीएम मोदी की टेलिफोनिक वार्ता में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के कई पहलुओं की समीक्षा की। इसमें ऊर्जा सहयोग, व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग और अन्य प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता बताया।
बातचीत के बाद पीएमओ से भी बयान आया। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन को जी-20 में भारत की मौजूदा अध्यक्षता के बारे में जानकारी दी। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ नियमित संपर्क में रहने पर सहमति व्यक्त की।
अमेरिका ने भी की मोदी के स्टैंड की तारीफ
मोदी-पुतिन की बातचीत के तुरंत बाद ही अमेरिका से भी बयान आया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुक्रवार को एक बार फिर यूक्रेन संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टैंड का स्वागत किया। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘हम पीएम मोदी की बातों को उन्होंने जैसा कहा है, वैसे ही मानेंगे। रूस के साथ जुड़ाव पर अन्य देश अपना निर्णय खुद लेंगे।’
पटेल की यह टिप्पणी रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की स्थिति से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर के तौर पर आई थी।