छत्तीसगढ़ में मिशन वात्सल्य: हर बच्चे के सुरक्षित और खुशहाल बचपन की मजबूत नींव

Mission Vatsalya in Chhattisgarh strong foundation for every child

छत्तीसगढ़ में मिशन वात्सल्य: हर बच्चे के सुरक्षित और खुशहाल बचपन की मजबूत नींव

विजन: हर बच्चे को मिले सुरक्षित और खुशहाल बचपन

मिशन वात्सल्य का उद्देश्य है कि राज्य का हर बच्चा स्वस्थ, सुरक्षित और समर्थ वातावरण में पले-बढ़े। योजना संस्थानीकरण को अंतिम उपाय मानते हुए परिवार-आधारित गैर-संस्थागत देखरेख को बढ़ावा देती है, ताकि बच्चे अपने सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए अनुकूल माहौल पा सकें।

मिशन के प्रमुख लक्ष्य

राज्य और जिला स्तर की संरचना

राज्य स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की अध्यक्षता में राज्य बाल संरक्षण समिति कार्यरत है, जो सभी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाती है। दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के लिए राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन अभिकरण स्थापित है, जहां पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ‘केयरिंग्स पोर्टल’ के माध्यम से संचालित होती है। अंतिम आदेश जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया जाता है।हर जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति गठित है, जो स्थानीय स्तर पर समन्वय और निगरानी करती है।

संस्थागत देखरेख कार्यक्रम

मिशन के तहत दो प्रमुख श्रेणियों में संस्थागत देखरेख की व्यवस्था है—

1. विधि से संघर्षरत बालकों के लिए

2. देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए

गैर-संस्थागत देखरेख: परिवार आधारित समाधान

प्रायोजन (Sponsorship) कार्यक्रम

जरूरतमंद बच्चों को परिवार में रखते हुए 4000 रुपये प्रतिमाह सहायता दी जाती है।

फॉस्टर केयर (पोषण देखरेख)

बच्चों को गैर-नातेदार परिवारों में सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है, साथ ही 4000 रुपये प्रतिमाह सहायता।

मुख्यमंत्री बाल उदय (आफ्टर केयर) योजना

18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद संस्था से बाहर निकलने वाले बच्चों को 7000 रुपये प्रतिमाह जीवन-यापन सहायता, उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की सुविधा 21 से 25 वर्ष तक।

अनिवार्य पंजीयन और गुणवत्ता मानक

राज्य में संचालित सभी बाल देखरेख संस्थाओं का किशोर न्याय अधिनियम के तहत अनिवार्य पंजीयन किया जा रहा है। जिला कलेक्टर की अनुशंसा के बाद पंजीकरण/प्रावधिक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होती है, ताकि गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।

वैधानिक इकाइयाँ: मजबूत कानूनी ढांचा

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: हर संकट में साथ

‘चाइल्ड हेल्पलाइन 1098’ 24×7 आकस्मिक सेवा है। राज्य के सभी 33 जिलों में उपलब्ध यह सेवा बच्चों को आपातकालीन सहायता और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ती है। महिला हेल्पलाइन और 112 के साथ इसका समन्वय किया गया है।

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान

10 मार्च 2024 को शुरू हुए इस अभियान के तहत बाल विवाह रोकथाम के लिए रणनीति तैयार कर जिलों में लागू की गई है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

विशेष पहल

मिशन वात्सल्य छत्तीसगढ़ में बाल संरक्षण का एक समग्र मॉडल बनकर उभरा है। संस्थागत और गैर-संस्थागत देखरेख, कानूनी सुरक्षा, सामुदायिक भागीदारी और नवाचार—इन सभी के समन्वय से राज्य एक सशक्त बाल-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है। यह योजना केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है—ताकि हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हो सके।

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