बंधुआ मजदूरी का शिकार नाबालिग: NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया, इन तीन राज्यों के अधिकारियों को नोटिस..!

Minor victims of bonded labour NHRC takes suo motu cognizance

भागने की कोशिश पर बेरहमी, मशीन में कटा हाथ

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मामला एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़के से जुड़ा है, जो अपने पिता से बिछड़ने के बाद महीनों तक बंधुआ मजदूरी का शिकार रहा। पीड़ित बच्चा बिहार के किशनगंज जिले का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपने पिता के साथ ट्रेन से यात्रा कर रहा था। हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर वह पानी लेने के लिए ट्रेन से उतरा, लेकिन अत्यधिक भीड़ के कारण दोबारा ट्रेन में नहीं चढ़ सका। इसी दौरान ट्रेन रवाना हो गई और बच्चा अपने पिता से बिछड़ गया।

नाबालिग से बंधुआ मजदूरी का मामला

ट्रेन यात्रा के दौरान पिता से बिछड़ा नाबालिग

बंधुआ मजदूरी का शिकार नाबालिग

नौकरी का झांसा देकर ग्रेटर नोएडा ले जाया गया

NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया

3 राज्यों के अफसरों को नोटिस

 

तीन राज्यों के शीर्ष अधिकारियों को NHRC का नोटिस

इसके बाद वह दो दिनों तक रेलवे स्टेशन पर भटकता रहा। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में ले गया। वहां उससे सुबह से रात तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। उससे पशु चरवाने, चारा काटने जैसे कठिन काम कराए जाते थे और विरोध करने पर उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे ने एक बार वहां से भागने की कोशिश भी की, लेकिन उसे पकड़कर बेरहमी से पीटा गया। इसी दौरान चारा काटने की मशीन में काम करते वक्त उसका बायां हाथ कोहनी से कट गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मालिक ने उसे कोई इलाज नहीं कराया और सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गया।

इलाज के बिना भटका, शिक्षकों ने दिखाई मानवता

बताया गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने घायल बच्चे को हरियाणा के नूंह जिले के एक अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, दोबारा पकड़े जाने के डर से वह वहां से भी भाग गया और नंगे पांव तीन किलोमीटर से अधिक पैदल चला। रास्ते में दो सरकारी शिक्षकों ने उसकी हालत देखी और तत्काल मामले की सूचना बहादुरगढ़ जीआरपी को दी। इसके बाद वह किसी तरह अगस्त 2025 में अपने घर लौट सका।

पुनर्वास प्रमाण पत्र न मिलना गंभीर लापरवाही

इस पूरे मामले में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित को अब तक बंधुआ मजदूर मुक्ति प्रमाण पत्र (Bonded Labour Release Certificate) जारी नहीं किया गया है, जो कि केंद्र सरकार की बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना–2021 के तहत मुआवजा और पुनर्वास पाने के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त तथा बिहार के किशनगंज जिले के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

मुआवजा और दिव्यांग अधिकारों पर भी मांगी जानकारी

NHRC ने यह भी निर्देश दिया है कि यह जानकारी दी जाए कि पीड़ित को कोई मुआवजा दिया गया है या नहीं, और क्या उसे विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है, ताकि वह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त कर सके।आयोग का कहना है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में दी गई बातें सही पाई जाती हैं, तो यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि मानवता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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