अगर किसी चीनी परिवार से पूछा जाए कि मध्य-शरद उत्सव उनके लिए क्या मायने रखता है,
तो शायद जवाब बहुत आसान होगा, “परिवार के साथ बैठना, चांद देखना और मूनकेक खाना।”
सुनने में यह बात बहुत साधारण लगती है, लेकिन इसके पीछे चीन की हजारों साल पुरानी
संस्कृति और परिवार से जुड़ी गहरी भावनाएं हैं। यही वजह है कि आज भी मध्य-शरद उत्सव
चीन के सबसे खास पारंपरिक त्योहारों में शामिल है। यह त्योहार चीनी चंद्र कैलेंडर के आठवें
महीने की 15वीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन चांद अपने पूरे आकार में दिखाई देता है,
इसलिए इसे पूरे चांद का त्योहार भी कहा जाता है।
लेकिन आखिर इस त्योहार में चांद इतना खास क्यों है? इसकी वजह समझने के लिए थोड़ा
पीछे चलना होगा। पुराने समय में लोग फसल कटने के बाद परिवार और दोस्तों के साथ बैठते
थे। रात में चांद को देखते, अच्छी फसल के लिए धन्यवाद देते और आने वाले समय के लिए
सुख-समृद्धि की कामना करते। धीरे-धीरे यही परंपरा परिवार के साथ मिलने-जुलने का एक
खास मौका बन गई। इसलिए कहा जा सकता है कि इस त्योहार में चांद जरूर सबसे बड़ा
आकर्षण है, लेकिन असली केंद्र परिवार है। चांद आसमान में चमकता है, लेकिन उसकी रोशनी
जैसे सबसे पहले घर के आंगन में पहुंचती है।
अब सवाल उठता है कि आज के आधुनिक चीन में मध्य-शरद उत्सव किस तरह मनाया जाता
है? यहां दिलचस्प बात यह है कि समय बदला है, जीवनशैली बदली है, लेकिन त्योहार की मूल
भावना आज भी वही है। पहले लोग घर पर इकट्ठा होकर चांद देखते थे और घर का बना खाना
खाते थे। आज भी परिवार साथ बैठते हैं, लेकिन इसके साथ त्योहार मनाने के तरीके भी बढ़
गए हैं। शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, लैंटर्न शो लगाए जाते हैं और पारंपरिक संगीत,
नृत्य तथा दूसरे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई लोग पारंपरिक हानफू पहनकर पुराने
शहरों और ऐतिहासिक इलाकों में घूमने निकलते हैं। यानी परंपरा पुरानी है, लेकिन उसे मनाने
का अंदाज नया हो गया है।
और जब मध्य-शरद उत्सव की बात हो, तो मूनकेक का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता।
आखिर मूनकेक इस त्योहार की पहचान जो बन चुका है। इसका गोल आकार परिवार के एक
साथ होने और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। पहले मूनकेक में कुछ पारंपरिक स्वाद ही
ज्यादा लोकप्रिय थे, लेकिन अब बाजार में कई तरह के मूनकेक मिलते हैं। कम चीनी वाले,
कम फैट वाले और बिल्कुल नए स्वाद वाले मूनकेक भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। यानी
मूनकेक भी समय के साथ बदल रहा है, लेकिन उसके पीछे छिपी भावना आज भी वही है,
परिवार के साथ कुछ मीठे पल बिताना।
इसी तरह त्योहार मनाने का तरीका भी अब घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। छुट्टियां
मिलती हैं तो कई परिवार घूमने निकल जाते हैं। कोई हाई-स्पीड ट्रेन से दूसरे शहर पहुंच जाता
है, कोई किसी झील या पार्क के किनारे बैठकर चांद देखता है। कहीं लैंटर्न फेयर होता है, कहीं
संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होते हैं, तो कहीं लोग नाव पर बैठकर चांदनी का आनंद लेते हैं।
यानी मध्य-शरद उत्सव अब सिर्फ एक धार्मिक या पारंपरिक अवसर नहीं, बल्कि परिवार के
साथ समय बिताने और घूमने-फिरने का भी मौका बन गया है।
(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, बीजिंग)