भीलवाड़ा में गूंजा निवेश का संदेश: मध्यप्रदेश ने बढ़ाया साझेदारी का हाथ
दिल से दिल का जुड़ाव, व्यापार से विकास का विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश केवल भौगोलिक रूप से देश का हृदय नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का उभरता हुआ केंद्र भी है। देश के मध्य में स्थित होने के कारण राज्य लॉजिस्टिक्स, निर्यात और उत्पादन के लिहाज से रणनीतिक बढ़त रखता है। मजबूत सड़क और रेल नेटवर्क, विस्तृत लैंड बैंक, पर्याप्त जल संसाधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—ये सभी कारक निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करते हैं। उन्होंने राजस्थान और मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। मारवाड़ और मेवाड़ के व्यापारियों की कुशलता और दूरदर्शिता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यही ऊर्जा अब मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास में नई गति दे सकती है।
टेक्सटाइल सेक्टर: साझेदारी की नई धुरी
भीलवाड़ा की पहचान देश-दुनिया में टेक्सटाइल सिटी के रूप में स्थापित है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रदेश में देश के सबसे बड़े पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन हो चुका है, जो वस्त्र उद्योग के लिए एकीकृत और आधुनिक इकोसिस्टम प्रदान करेगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ मिलकर इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प भी दोहराया गया। डॉ. यादव ने कहा कि निवेश, नवाचार और विकास की यह साझेदारी केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समृद्धि का साझा अभियान होगी।
उद्योग नीतियों में सरलता, निवेशकों को विशेष रियायतें
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं उद्योग विभाग की जिम्मेदारी संभाली है ताकि निवेशकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। राज्य में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियां लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि बड़े निवेश प्रस्तावों पर विशेष रियायतें दी जा रही हैं। साथ ही छोटे और मध्यम निवेशकों को भी समान अवसर और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ऐतिहासिक उदाहरण और भविष्य की दिशा
CM डॉ. यादव ने पद्म विभूषण घनश्याम दास बिड़ला का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि उन्होंने उज्जैन जिले के नागदा में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज की स्थापना की थी। यह उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की औद्योगिक साझेदारी कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि परंपरा का विस्तार है। उन्होंने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना पर दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते को भी साझा विकास का उदाहरण बताया। जल संसाधन प्रबंधन से लेकर औद्योगिक आधारभूत संरचना तक, दोनों राज्य मिलकर क्षेत्रीय संतुलित विकास का मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं।
निवेशकों का उत्साह और अपेक्षाएं
संगम ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एसएन मोदानी ने कहा कि भीलवाड़ा की पहचान टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग से है, और मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं को समझना उद्योग जगत के लिए लाभकारी होगा। मेवाड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने भी राज्य की औद्योगिक नीति की सराहना की और सीमावर्ती जिलों, विशेषकर नीमच में टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क की मांग रखी।
ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भरता की ओर
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है। नवीन और नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत में कमी और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत विश्व का विश्वसनीय विकास साझेदार बनकर उभर रहा है, और मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूरोप सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टेक्सटाइल और अन्य उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
साझेदारी से समृद्धि की ओर
‘इन्वेस्ट इन एमपी’ पहल के तहत आयोजित इस इंटरैक्टिव सेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश केवल निवेश का आमंत्रण नहीं दे रहा, बल्कि साझेदारी का भरोसा भी दे रहा है। राजस्थान के निवेशकों के लिए यह संदेश था कि यदि वे विस्तार की सोच रखते हैं, तो मध्यप्रदेश तैयार है—नीतियों के साथ, संसाधनों के साथ और प्रतिबद्ध नेतृत्व के साथ। अंततः डॉ. मोहन यादव का यह संदेश केवल एक औपचारिक आमंत्रण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समन्वय, औद्योगिक प्रगति और साझा समृद्धि की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है। भारत के दिल से उठी यह आवाज अब उद्योग जगत के फैसलों में कितनी गूंजती है, यह आने वाला समय बताएगा।