दिवाली से पहले रामलीला मैदान की महारैली – क्या INDIA गठबंधन अपने ही पैरों पर मार रहा है कुल्हाड़ी?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर असमंजस बना हुआ है। विपक्ष इसे कथित वोट चोरी के खिलाफ अभियान बता रहा है, जबकि दिल्ली के व्यापारी त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की आशंका के चलते रैली टालने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बदलते संकेतों ने रैली को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। पहले उन्होंने व्यापारियों की अपील पर विचार करने की बात कही, लेकिन बाद में लोगों से रैली में शामिल होने की अपील दोहराई।वहीं, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया जाए, तो विरोध 30 सेकंड में बंद हो जाएगा। अब सवाल है कि कांग्रेस राजनीतिक विरोध को प्राथमिकता देगी या त्योहारों के दौरान व्यापारियों की चिंताओं को देखते हुए रैली की तारीख बदलने पर विचार करेगी। रैली का फैसला विपक्ष की एकजुटता और दिल्ली के कारोबारी हितों, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस और INDIA गठबंधन की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली सियासी तौर पर बड़ा दांव है, लेकिन टाइमिंग को लेकर ये दांव उलटा पड़ता दिख रहा है।

इस रैली से INDIA गठबंधन को उम्मीद है कि वो 10 लाख लोगों को जुटाकर चुनाव आयोग पर दबाव बनाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बंगाल, महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, दिल्ली में कथित ‘वोट चोरी’ में आयोग की भूमिका का मुद्दा उठाना चाहते हैं। दिलचस्प है कि इस आरोप से तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल, पंजाब, केरल के चुनावों को बाहर रखा जा रहा है।

क्यों कमजोर पड़ी धार?
कांग्रेस को लग रहा है कि चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान की धार कमजोर पड़ी है। इसलिए 1 नवंबर की रैली में फिर से जान फूंकने की कोशिश है। नजर 2027 के यूपी समेत 7 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है। सोच ये है कि ‘वोट चोरी’ का संदेह मतदाता के मन में बैठाया जाए ताकि वो NDA को वोट देने से पहले दो बार सोचे।लेकिन विरोध का समय गलत – व्यापारियों की नाराजगी*
यही दांव उलटा पड़ गया है। दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद तक टालने की अपील की है।
CTI का तर्क है:
– धनतेरस-दिवाली की खरीदारी सीजन में यातायात बाधित होगा
– रामलीला मैदान के 5 किमी दायरे में चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, करोल बाग, लाजपत राय समेत 20 बड़े बाजार बंद करने पड़ सकते हैं
– इससे 10 हजार करोड़ तक का नुकसान होगा

कोर्ट में भी घेराबंदी टूटी?
कांग्रेस की चिंता की एक और वजह कोर्ट में चल रहे केस हैं। CBI के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ आए अदालती फैसले, आइसा की नेहा बोरा पर अदालत की टिप्पणियां और सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हुई टिप्पणियों ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है।

सोनिया गांधी की किताब का एंगल
रैली को दिवाली से ठीक पहले करने के पीछे एक और कारण बताया जा रहा है – सोनिया गांधी के संस्मरणों की किताब 10 नवंबर को रिलीज हो रही है। अगर रैली 10 नवंबर तक टाली जाती तो किताब के विमोचन की तारीख भी आगे बढ़ानी पड़ती। विरोध लोकतंत्र में जरूरी है, लेकिन दिवाली जैसे सबसे बड़े त्योहारी सीजन में दिल्ली के व्यापारियों और घरों में रहने को मजबूर दिल्लीवासियों को नाराज करके INDIA गठबंधन उत्तर और पश्चिम भारत के उन वोटों को क्यों खोना चाहेगा जिनकी उसे यूपी चुनाव में सबसे ज्यादा जरूरत है?

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