Blue Drum Case: मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: प्रेम विवाह के 9 साल बाद पति की हत्या, शव ड्रम में छिपाया; मुस्कान और साहिल को फांसी

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: प्रेम विवाह के 9 साल बाद पति की हत्या, शव ड्रम में छिपाया; मुस्कान और साहिल को फांसी
उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने दोषी ठहराते हुए 14 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि सौरभ और मुस्कान ने प्रेम विवाह किया था और उनकी एक बेटी भी थी। पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान और साहिल के संबंधों को लेकर सौरभ के साथ तनाव पैदा हुआ था। आरोप है कि इसी विवाद के बीच सौरभ की हत्या कर दी गई और उनके शव को नीले ड्रम में छिपाकर अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए घटनाक्रम, शव को ठिकाने लगाने के तरीके और बाद में अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों ने इस मामले को देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया।

प्रेम संबंध से शुरू हुई कहानी, साल 2016 में सौरभ और मुस्कान ने किया था विवाह
सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी के बीच प्रेम संबंध था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद उनके परिवार में एक बेटी का जन्म हुआ। सौरभ मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे और बाद में नौकरी के सिलसिले में लंदन चले गए थे। दूसरी ओर, मुस्कान मेरठ में रहती थी। समय बीतने के साथ उनके वैवाहिक रिश्ते में तनाव आने की बात सामने आई। परिवार और मामले से जुड़ी रिपोर्टों में इस रिश्ते में मतभेदों का जिक्र किया गया। हालांकि, किसी भी वैवाहिक विवाद को हत्या का औचित्य नहीं माना जा सकता। अदालत में यह देखना महत्वपूर्ण था कि घटना के दिन क्या हुआ और आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद थे।

साहिल शुक्ला से बढ़ीं नजदीकियां, सौरभ के विरोध को अभियोजन ने बताया अहम पहलू
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला एक-दूसरे को पहले से जानते थे और समय के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ीं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह पक्ष रखा कि मुस्कान और साहिल के संबंधों को लेकर सौरभ और मुस्कान के बीच विवाद हुआ था। जांच के दौरान इसी संबंध को हत्या के पीछे की परिस्थितियों में एक अहम पहलू के रूप में देखा गया। हालांकि, अपराध के पीछे की मंशा और घटनाक्रम को लेकर अंतिम निष्कर्ष अदालत के सामने रखे गए साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाता है। इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी माना।

लंदन से लौटने के कुछ दिन बाद सौरभ की हत्या, 3 मार्च 2025 की रात की घटना
सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार में मुस्कान और उनकी बेटी का जन्मदिन भी मनाया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ की हत्या की गई। आरोप था कि मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। जांच में शव के टुकड़े किए जाने और उन्हें छिपाने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ा। इस हत्याकांड में सबसे गंभीर सवाल यही था कि एक पारिवारिक रिश्ते के भीतर हत्या की योजना कैसे बनी और घटना के बाद सबूत छिपाने की कोशिश किस तरह की गई।

नीले ड्रम में छिपाया गया शव, फिर साहिल के साथ शिमला जाने का आरोप
हत्या के बाद सौरभ के शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। अभियोजन के अनुसार, शव के टुकड़ों को ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया, ताकि घटना का पता न चल सके। इसके बाद मुस्कान और साहिल के शिमला जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। आरोप है कि इस दौरान सौरभ के बारे में परिवार को गुमराह करने की कोशिश की गई। जब सौरभ का कोई स्पष्ट पता नहीं चला और परिस्थितियां संदिग्ध लगीं, तब मामले को लेकर चिंता बढ़ी। नीले ड्रम से शव मिलने की बात सामने आने के बाद यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई।

17 मार्च को सामने आया मामला, अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को सुनाई मृत्युदंड की सजा
मामले का खुलासा मार्च 2025 में हुआ। पुलिस जांच के दौरान नीले ड्रम से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए और मुस्कान तथा साहिल को गिरफ्तार किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाते हुए दोनों को मृत्युदंड दिया गया। इस फैसले ने एक बार फिर इस मामले को सुर्खियों में ला दिया। सौरभ के परिवार के लिए यह मामला लंबे इंतजार और न्याय की मांग से जुड़ा रहा। मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील से जुड़े अधिकार भी लागू कानून के अनुसार उपलब्ध रहते हैं।

 

 

 

 

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