बसपा में बड़ा एक्शन: मायावती ने विक्रम सिंह को पार्टी से निकाला, अपराधियों को सदस्यता दिलाने का आरोप
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने एक बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली नेता विक्रम सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया है। विक्रम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी दिए बिना आपराधिक छवि वाले दो लोगों को बसपा की सदस्यता दिला दी थी। मामला सामने आते ही मायावती ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया।
बताया जा रहा है कि विक्रम सिंह ने दो विवादित व्यक्तियों—सुशील फौजी और वसीम मुन्ने—की मुलाकात 22 जनवरी को बसपा प्रमुख मायावती से कराई थी और इसके बाद उन्हें पार्टी की सदस्यता भी दिला दी गई थी। इन दोनों की इच्छा आगामी जिला पंचायत चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की बताई जा रही थी। जैसे ही यह मामला मायावती के संज्ञान में आया, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए विक्रम सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कौन हैं विक्रम सिंह?
विक्रम सिंह लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा के सक्रिय और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। वे जाटव समाज से आते हैं और पार्टी संगठन में कई मंडलों के समन्वयक के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन के विस्तार और चुनावी रणनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी।
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब विक्रम सिंह विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन पर दागी नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के आरोप लग चुके हैं। लगभग चार साल पहले एक ऐसे मामले में भी उनका नाम सामने आया था, जिसमें एक रेप केस की सह-आरोपी महिला नेता को बसपा में शामिल कराने को लेकर विवाद हुआ था। उस समय मायावती ने उन्हें सख्त चेतावनी दी थी।
संगठन में बड़ा फेरबदल
विक्रम सिंह के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मायावती ने पार्टी संगठन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। पश्चिमी यूपी और लखनऊ मंडल के कई कोऑर्डिनेटरों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है। नए बदलाव के तहत सूरज सिंह जाटव को आगरा और अलीगढ़ मंडल का कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। वहीं जाफर मलिक को लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता मुनकाद अली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण मंडलों—मेरठ, मुरादाबाद और बरेली—का प्रभार दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावों के लिए पार्टी को सक्रिय बनाना है।
पश्चिमी यूपी में कमजोर होती पकड़
पश्चिमी उत्तर प्रदेश कभी बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है। कई क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता कम होने और चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहने के कारण पार्टी नेतृत्व चिंतित है। हाल ही में अलीगढ़ में आयोजित पार्टी कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ न जुटने से भी मायावती नाराज बताई जा रही थीं। ऐसे में विक्रम सिंह के खिलाफ लिया गया यह एक्शन केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि संगठन को संदेश देने की कोशिश भी माना जा रहा है।
वसीम पर दर्ज हैं 56 मामले
बसपा में शामिल कराए गए वसीम मुन्ने की छवि काफी विवादित बताई जाती है। वह मेरठ जिले के मुंडाली थाना क्षेत्र के साफियाबाद लोटी गांव का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ कुल 56 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बताया जाता है कि वसीम के खिलाफ पहला मामला वर्ष 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दर्ज हुआ था। उसके बाद से उस पर कई गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज होते रहे हैं। ऐसे व्यक्ति को पार्टी में शामिल कराए जाने से बसपा के अंदर भी नाराजगी देखने को मिली।
गैंगस्टर बताया जाता है सुशील फौजी
विक्रम सिंह ने जिस दूसरे व्यक्ति को बसपा में शामिल कराया था, उसका नाम सुशील फौजी है। वह मेरठ जिले के रोहटा थाना क्षेत्र के भदौड़ा गांव का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सुशील फौजी हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर के रूप में दर्ज है। उसके खिलाफ हत्या, दंगा, रंगदारी और धमकी जैसे गंभीर आरोपों में करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर उसका नाम कई आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है और वह अपने गिरोह के साथ इलाके में दहशत फैलाने के लिए कुख्यात माना जाता है।
पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी
जैसे ही सुशील फौजी और वसीम को बसपा की सदस्यता दिलाने की खबर सामने आई, पार्टी के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि आपराधिक छवि वाले लोगों को पार्टी में शामिल करने से संगठन की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। यह नाराजगी धीरे-धीरे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई। इसके बाद मायावती ने पूरे मामले की जानकारी ली और तत्काल कार्रवाई करते हुए विक्रम सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया।
राजनीतिक संदेश भी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम नहीं है, बल्कि संगठन में अनुशासन और छवि सुधार का संदेश भी है। मायावती अक्सर पार्टी में सख्त अनुशासन और साफ छवि को लेकर जोर देती रही हैं। ऐसे में अपराधियों को पार्टी में शामिल कराने के आरोप को उन्होंने गंभीरता से लिया और बिना देरी किए कार्रवाई की। इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत और विवादों से दूर रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।