अप्रैल 2024 की बात है, जब लोकसभा चुनाव नज़दीक थे। बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी के सीतापुर में एक चुनावी रैली करने पहुंचे। मंच से उन्होंने Bharatiya Janata Party पर तीखा हमला करते हुए उसे नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी तक कह दिया।
आकाश का यह बयान मायावती को इतना नागवार गुज़रा कि उन्होंने तुरंत बड़ा कदम उठा लिया। आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया गया। मायावती ने यह फैसला सिर्फ पार्टी दफ्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से लिखा कि आकाश को अभी और परिपक्व होने की जरूरत है।
दिलचस्प बात यह रही कि आकाश समाजवादी पार्टी पर भी लगातार हमलावर थे, लेकिन उस पर मायावती ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे साफ संकेत मिला कि समस्या बयान की भाषा नहीं, बल्कि BJP पर सीधा हमला था। जबकि मायावती खुद रैलियों में BJP के खिलाफ राजनीतिक बयान देती रही हैं।
इसके बाद मायावती और BJP के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। 9 अक्टूबर 2025 को एक रैली में मायावती ने BJP का धन्यवाद किया और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की। जनवरी 2026 में मायावती को दिल्ली में टाइप-8 बंगला मिला, जबकि नियमों के मुताबिक उन्हें टाइप-6 या 7 बंगला ही मिलना चाहिए था।
अब सवाल उठ रहे हैं—क्या BJP और मायावती के बीच अंदरखाने कोई समझ बन चुकी है? औपचारिक गठबंधन न सही, लेकिन क्या सियासी खिचड़ी पक रही है? जनता इन सवालों का जवाब चाहती है।




