यूपी उपचुनाव के नतीजों से क्यों हैं बेचैन बहन कुमारी मायावती, वोट बैंक को बचाने की चुनौती

नहीं लड़ी थी बसपा उपचुनाव

लखनऊः यूपी में तीन सीटों के लिए हुए उपचुनाव के परिणामों से बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती की पेशानी पर बल पड़ गया है। यहां रामपुर में आजम खान के किले को ढाहकर बीजेपी जीती, तो खतौली सीट रालोद और मैनपुरी सपा की झोली में जा गिरी। यह ट्रेंड देखकर मायावती बेचैन हो गई हैं।

जानिए पूरा मामला

दरअसल, मायावती आमने-सामने की लड़ाई में सपा और भाजपा को लाना चाहती थीं। उनका मानना था कि ऐसी लड़ाई में सपा जीत नहीं पाएगी, क्योंकि दलित वोट भाजपा को ट्रांसफर हो जाएंगे। दिक्कत यह हुई कि सपा और रालोद ने चंद्रशेखर रावण को गले लगा लिया। इससे दलितों का वोट बड़ी संख्या में सपा और रालोद को ट्रांसफर हो गया। मैनपुरी से डिंपल की रिकॉर्डतोड़ जीत के पीछे यही कारण था, तो खतौली में रालोद के हाथ बाजी लगी।

जाटव वोट कहां गया

मायावती का कोर वोटबैंक जाटव समुदाय है। हार-जीत से निरपेक्ष यह समुदाय आज भी बहनजी के साथ बना हुआ है। शायद एकमात्र समुदाय है, जो बहनजी के साथ है। मैनपुरी में लगभग सवा लाख वोटर इसी समुदाय के थे। इस समुदाय ने बड़ी संख्या में डिंपल यादव के लिए वोटिंग की और वह रिकॉर्ड मतों से जीतीं।

इसी तरह चंद्रशेखर रावण ने घर-घर जाकर रालोद के लिए वोट मांगे। वहां भी जीत का सेहरा रालोद के प्रत्याशी के सिर बंधा। इसको देखकर बसपा सुप्रीमो की नींद हराम है कि उनके वोट का ट्रांसफर अगर सपा-रालोद जैसी पार्टियों को हुआ, तो पिर उनका एकाधिकार कैसे बचेगा।

Exit mobile version