अल नीनो के असर से बढ़ेगा तापमान….तैयार रहें आने वाला है भीषण गर्मी का दौर… वैज्ञानिकों ने दी ये गंभीर चेतावनी

impact of El Niño

मई-जून में पड़ सकती है भीषण गर्मी

अल नीनो के असर से बढ़ेगा तापमान, वैज्ञानिकों ने दी गंभीर चेतावनी

भारत समेत पूरी दुनिया में इस साल गर्मी का प्रकोप असामान्य रूप से बढ़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले मई और जून के महीनों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। मार्च के शुरुआती दिनों में ही कई राज्यों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने लगा है, जो यह संकेत देता है कि इस बार गर्मी का मौसम सामान्य से कहीं अधिक तीखा हो सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल प्रशांत महासागर में बनने वाली अल नीनो (El Niño) स्थिति के कारण वैश्विक मौसम पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो मजबूत हुआ तो भारत सहित कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और असामान्य मौसम की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियां लगातार इस पर निगरानी रखे हुए हैं।

मार्च में ही बढ़ने लगा तापमान

आमतौर पर मार्च का महीना गर्मी की शुरुआत माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पारा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। कई जगहों पर अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। राजस्थान के कुछ इलाकों और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में तो अभी से लू जैसी परिस्थितियां बनने लगी हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मार्च और अप्रैल में ही इतनी गर्मी महसूस हो रही है तो मई-जून में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

अल नीनो बनने की 60 प्रतिशत संभावना

दुनिया भर के मौसम पर नजर रखने वाली संस्थाओं ने भी इस साल के मौसम को लेकर चिंता जताई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो बनने की करीब 60 प्रतिशत संभावना है। यदि यह स्थिति मजबूत होती है तो वैश्विक तापमान में असामान्य वृद्धि हो सकती है। अल नीनो दरअसल प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में होने वाली असामान्य वृद्धि की घटना है। जब महासागर का तापमान औसत से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इससे बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं, कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियां बन जाती हैं।

सुपर अल नीनो की आशंका

वैज्ञानिकों ने यह भी संभावना जताई है कि वर्ष के अंत तक एक सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह पिछले कई दशकों में सबसे प्रभावशाली मौसम घटनाओं में से एक हो सकता है। इतिहास बताता है कि जब-जब सुपर अल नीनो आया है, तब-तब दुनिया ने अत्यधिक गर्मी का सामना किया है। वर्ष 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी, जब कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया था। इस बार भी विशेषज्ञों को वैसी ही परिस्थितियों का अंदेशा है।

मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव

अल नीनो केवल गर्मी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बनने वाला गर्म पानी का क्षेत्र यह तय करता है कि किस इलाके में अधिक बारिश होगी और किस क्षेत्र में सूखा पड़ेगा। इस कारण कई देशों में अत्यधिक गर्मी के साथ-साथ अचानक भारी बारिश, बाढ़ और तूफान जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। कुछ उष्णकटिबंधीय देशों में पानी की कमी और सूखे की समस्या गंभीर हो सकती है।

लू के दिनों में बढ़ोतरी की संभावना

विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के दौरान गर्म हवाओं यानी लू के दिनों में बढ़ोतरी होती है। भारत जैसे देशों  में इसका असर अधिक दिखाई देता है, क्योंकि यहां पहले से ही गर्म जलवायु मौजूद है। मई और जून में उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। ऐसे में लोगों को तेज धूप, गर्म हवाओं और हीटवेव का सामना करना पड़ सकता है।

तूफान और समुद्री प्रभाव

वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो का असर केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि महासागरों में भी दिखाई देता है। प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि अटलांटिक महासागर में इनकी संख्या कम हो सकती है। इसके अलावा समुद्री बर्फ में कमी और समुद्र के तापमान में वृद्धि जैसी घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। इससे तटीय क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ी चिंता

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा पृथ्वी के तापमान को पहले ही बढ़ा चुकी है। ऐसे में यदि एक शक्तिशाली अल नीनो बनता है तो उसका असर और भी अधिक गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दुनिया को लगातार अधिक गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 तक वैश्विक तापमान का नया रिकॉर्ड भी बन सकता है।

सावधानी और तैयारी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि इस संभावित भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों और सरकारों को पहले से तैयारी करनी चाहिए। गर्मी से बचाव के उपाय, पानी की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी बेहद जरूरी होगी। गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि तापमान लगातार बढ़ता है तो आने वाले महीनों में देश के कई हिस्सों में गर्मी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी साफ संकेत दे रही है कि इस बार गर्मी का मौसम सामान्य नहीं रहने वाला। ऐसे में आने वाले महीनों में तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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