पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक वायरल वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध मार्च के दौरान अपनी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए ममता बनर्जी पर निशाना साधा। यह घटनाक्रम बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची से रेप और हत्या के मामले को लेकर निकाले गए टीएमसी के विरोध मार्च के दौरान सामने आया। वीडियो में ममता अपने आवास के सामने जुटी भीड़ को हटाती दिखाई दे रही हैं और इसी दौरान वह एक व्यक्ति की ओर हाथ बढ़ाती नजर आती हैं। बीजेपी इसे थप्पड़ मारने की घटना बता रही है, हालांकि वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की राजनीतिक पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।
वायरल वीडियो को लेकर बीजेपी का बड़ा दावा, प्रदीप भंडारी बोले- चुनावी हार के बाद ममता ने खोया संतुलन
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी ने टीएमसी के एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं और विरोध मार्च के दौरान अपनी पार्टी से जुड़े लोगों के साथ भी आक्रामक व्यवहार किया। वायरल वीडियो में ममता हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने आवास के बाहर जुटी भीड़ के बीच दिखाई देती हैं। वह लोगों को रास्ते से हटाने की कोशिश कर रही हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति के साथ हुई घटना को लेकर बीजेपी ने ममता पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।
बारुईपुर मामले पर निकले टीएमसी के विरोध मार्च में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता भिड़े, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
कोलकाता में बारुईपुर रेप और हत्या मामले को लेकर टीएमसी की युवा इकाई ने विरोध मार्च निकाला था। अदालत से अनुमति मिलने के बाद आयोजित रैली के दौरान बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच कई जगह तनाव बढ़ गया। आरोप है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए और हाजरा रोड पर मानव श्रृंखला बनाकर मार्च का रास्ता रोकने की कोशिश की। बालीगंज फारी से शुरू हुई रैली के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। हाथापाई बढ़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
करीब तीन किलोमीटर तक अलग-अलग जगहों पर चलता रहा टकराव, हाजरा क्रॉसिंग पर सबसे ज्यादा बिगड़े हालात
टीएमसी का विरोध मार्च करीब तीन किलोमीटर लंबे रास्ते से होकर गुजरा, लेकिन कई स्थानों पर दोनों राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बना रहा। ममता बनर्जी के आवास के नजदीक हाजरा क्रॉसिंग पर विवाद सबसे ज्यादा बढ़ गया। पुलिस को स्थिति संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि बारुईपुर की घटना पर टीएमसी को विरोध प्रदर्शन करने का नैतिक अधिकार नहीं है। बीजेपी ने पिछली टीएमसी सरकार पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में आरोपियों को संरक्षण देने और पीड़ितों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने के आरोप लगाए।
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया सुनियोजित हिंसा का आरोप, पुलिस की भूमिका को लेकर भी उठाए गंभीर सवाल
ममता बनर्जी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ हुई झड़प के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी हिंसा एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई और पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया। ममता के मुताबिक विरोध मार्च के लिए अदालत से अनुमति मिली थी, इसके बावजूद रैली में बाधा पैदा की गई। उन्होंने दावा किया कि कई टीएमसी कार्यकर्ता घायल हुए और हालात देखकर उन्हें खुद घर से बाहर निकलना पड़ा। ममता ने पुलिस पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि रैली के रास्ते में डीजे बजाए गए और कार्यकर्ताओं के हाथ वाले माइक तक छीन लिए गए।
बीजेपी ने ममता के आरोपों को किया खारिज, कहा- बंगाल की जनता ने टीएमसी की राजनीति को पहले ही नकार दिया
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए टीएमसी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अहंकार और तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करती। भट्टाचार्य के मुताबिक ममता बनर्जी एक अनुभवी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और बीजेपी ने उन्हें सड़कों पर प्रदर्शन करने से कभी नहीं रोका। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने 15 साल पहले जनता से मिले भरोसे को तोड़ा और राज्य की हिंसक राजनीतिक संस्कृति में बदलाव नहीं किया। वहीं ममता ने दावा किया कि बीजेपी के सत्ता में आने के दो महीने के भीतर राज्य में 14 से अधिक महिलाओं के साथ रेप, प्रताड़ना और हत्या की घटनाएं हुई हैं। अब वायरल वीडियो और विरोध मार्च में हुई झड़प ने बंगाल की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।





