अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए करें समन्वित प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द बनेगी विशेष टास्क फोर्स—विश्व की यूनिवर्सिटी से संवाद

Chief Minister Dr Mohan Yadav

अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए करें समन्वित प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जल्द बनेगी विशेष टास्क फोर्स—विश्व की यूनिवर्सिटी से संवाद

भोपाल। मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को अब विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता कम पड़े, इस दिशा में राज्य सरकार बड़े और निर्णायक कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘सुशासन भवन’ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि “प्रदेश के विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता का अकादमिक वातावरण यहीं उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे वैश्विक स्तर की उच्च शिक्षा का लाभ अपने ही राज्य में प्राप्त कर सकें।”

अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों के लिए विशेष टास्क फोर्स बनेगी

राज्य सरकार ने प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के अध्ययन केन्द्र स्थापित कराने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। इसका आदेश शीघ्र जारी किया जाएगा। टास्क फोर्स का उद्देश्य वैश्विक विश्वविद्यालयों से प्रत्यक्ष संवाद, प्रस्तावों का मूल्यांकन,
आवश्यक नीतिगत प्रक्रियाओं को गति देना और अध्ययन केन्द्रों की स्थापना के लिए मार्ग प्रशस्त करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए सभी विभागों को समन्वित होकर कार्य करना होगा, ताकि मध्यप्रदेश आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन सके।

अमेरिका और ताइवान के शीर्ष विश्वविद्यालयों से सक्रिय बातचीत
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के अधिकारियों ने जानकारी दी कि वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ संवाद तेजी से आगे बढ़ रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के दो विश्वविख्यात विश्वविद्यालय और ताइवान की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी मध्यप्रदेश में अपने अध्ययन केंद्र स्थापित करने के लिए सकारात्मक रुचि दिखा रही हैं।
इन संस्थानों को इंजीनियरिंग, रिसर्च, नवाचार, एआई, डेटा साइंस और हेल्थकेयर साइंस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय पहचान प्राप्त है। इन विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रबंधन से शासन स्तर पर लगातार बातचीत जारी है, जिससे समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

राज्य का लक्ष्य—ग्लोबल एजुकेशन मैप पर नई पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की इच्छा है कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाए। अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के आने से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। विद्यार्थियों को इंटरनेशनल करिकुलम, उभरती तकनीकों पर आधारित एडवांस्ड कोर्स और ग्लोबल स्टैंडर्ड की फैकल्टी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था और कौशल विकास को भी नई ऊर्जा देगा।
इंडस्ट्री–स्टार्टअप को भी होगा बड़ा लाभ
अध्ययन केंद्र खुलने से केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि स्थानीय उद्योग,
स्टार्टअप इकोसिस्टम, इनnovation हब, और तकनीकी शोध संस्थान
भी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त शोध कार्यक्रमों (Joint Research Programs) और तकनीकी सहयोग के माध्यम से उद्योगों को वैश्विक विशेषज्ञता प्रदान करेंगे। इससे AI, रोबोटिक्स, बायोटेक, मेडिकल टेक्नोलॉजी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मध्‍यप्रदेश के युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय exposure मिलेगा।

उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी

बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदलने जा रही है। नए ग्लोबल स्टडी सेंटर, वर्ल्ड क्लास रिसर्च फैसिलिटी और उद्योग–शिक्षा के बीच मजबूत साझेदारी इस परिवर्तन के केंद्र में होंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा, तकनीक, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े सभी विभाग एकजुट होकर काम करें ताकि योजनाएँ गति पकड़ें।

प्रदेश सरकार का लक्ष्य साफ है कि मध्यप्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा, नवाचार और शोध का नया केंद्र बनाना। यदि अमेरिका और ताइवान के शीर्ष विश्वविद्यालयों के अध्ययन केंद्र राज्य में स्थापित होते हैं, तो यह न केवल विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा देगा, बल्कि प्रदेश को ग्लोबल एजुकेशन मैप पर एक नए शिखर पर पहुंचाएगा।

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