नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा अपडेट — ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश टला, अब सुनवाई 16 दिसंबर के बाद

Major update in the National Herald case

नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा अपडेट — ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश टला, अब सुनवाई 16 दिसंबर के बाद

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज बड़ी खबर सामने आई। कोर्ट ने ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश फिलहाल टाल दिया है। अब अदालत 16 दिसंबर के बाद इस पर अपना फैसला सुनाएगी। यह वही हाई-प्रोफाइल केस है जिसमें कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे समेत कई नेताओं को PMLA के तहत आरोपी बनाया गया है।

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश एक बार फिर टल गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला 16 दिसंबर तक सुरक्षित रख लिया। यह मामला पिछले एक दशक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का केंद्र है, जिसमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं।

क्या है मामला?

यह केस मूल रूप से 1938 में स्थापित अखबार नेशनल हेराल्ड और उसकी होल्डिंग कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है। AJL को नेहरू-युग की एक ऐतिहासिक विरासत माना जाता है, लेकिन 2012 के बाद यह मामला तब सुर्खियों में आया जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में शिकायत दायर कर आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने धोखाधड़ी करके AJL की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने कब्जे में ले ली। स्वामी का आरोप था कि कांग्रेस ने यंग इंडियन नाम की कंपनी के जरिए मात्र 50 लाख रुपये में 2000 करोड़ की संपत्ति हासिल की, जो कि आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और अब मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बन गया। इसके बाद ED ने जांच शुरू कर अप्रैल 2025 में चार्जशीट दायर की।

ED के गंभीर आरोप

ED ने अपनी चार्जशीट में दावा किया कि सालों तक फर्जी लेन-देन दिखाए गए। एडवांस रेंट पेमेंट और नकली किराया रसीदों का इस्तेमाल किया गया। धन को एक ही दिशा में मोड़ने के लिए व्यवस्थित तरीके से वित्तीय अनियमितताएं की गईं। AJL की संपत्ति को कम कीमत पर हड़पने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर धोखाधड़ी की गई। एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन में PMLA के तहत अपराध का स्पष्ट संदेह है और नेताओं को इसीलिए आरोपी बनाया गया है।

कोर्ट का निर्णय क्यों महत्वपूर्ण?

राउज एवेन्यू कोर्ट अब 16 दिसंबर को यह तय करेगा कि ED की चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। संज्ञान लिया गया → तो आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी और केस मुकदमे की दिशा में आगे बढ़ेगा।। संज्ञान न लिया गया → तो मामला बंद भी हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, चूंकि मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है और 10 वर्षों से अधिक समय से लंबित है, इसलिए अदालत का यह आदेश बेहद अहम माना जा रहा है। इसके अलावा 2026 में कई राज्यों में चुनाव होने हैं, इसलिए इसका राजनीतिक प्रभाव भी बड़े पैमाने पर महसूस किया जा सकता है।

कांग्रेस का पलटवार: ‘राजनीतिक प्रतिशोध’

कांग्रेस ने हमेशा इस मामले को राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केस सिर्फ विपक्ष को कमजोर करने के लिए बनाया गया है। ED राजनीतिक दवाब में काम कर रही है। AJL की संपत्तियों का ट्रांसफर पूरी तरह कानूनी था। पार्टी ने पहले भी कोर्ट में कहा था कि AJL को सिर्फ आर्थिक संकट से निकालने के लिए Young Indian कंपनी बनाई गई थी, इसका उद्देश्य किसी की संपत्ति हड़पना नहीं था।

क्यों चर्चित है यह मामला?

नेशनल हेराल्ड, जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा ऐतिहासिक अखबार रहा है। आरोपों में 2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति का मुद्दा शामिल।हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी। पिछले 10+ वर्षों से लगातार कानूनी जंग। आगामी चुनावों के चलते मामला और अधिक संवेदनशील।

16 दिसंबर को कोर्ट का फैसला इस केस की दिशा तय करेगा। यदि चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाता है, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा कानूनी सिरदर्द बन सकता है। वहीं संज्ञान न लेने की स्थिति में विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश कर सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसके बाद इस लंबे समय से चल रहे विवाद पर अगला महत्वपूर्ण अध्याय लिखा जाएगा।

Exit mobile version