HDFC बैंक के ग्राहकों को बड़ा झटका: 1 अप्रैल से लॉकर किराया 184% तक महंगा….ATM से UPI कैश निकासी के नियम भी बदले

Major setback for HDFC Bank customer Locker rent hiked

HDFC बैंक के ग्राहकों को बड़ा झटका: 1 अप्रैल से लॉकर किराया 184% तक महंगा, ATM से UPI कैश निकासी के नियम भी बदले

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए 1 अप्रैल 2026 से कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इन नए नियमों के तहत बैंक लॉकर का किराया काफी बढ़ा दिया गया है और साथ ही एटीएम से यूपीआई के जरिए कैश निकालने के नियम भी बदल दिए गए हैं। इन फैसलों का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो बैंक के लॉकर और एटीएम सेवाओं का नियमित रूप से उपयोग करते हैं।

बैंक की ओर से जारी नई व्यवस्था के अनुसार, लॉकर शुल्क में 184 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब लॉकर खोलने से पहले आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।

लॉकर चार्ज में भारी बढ़ोतरी

एचडीएफसी बैंक ने लॉकर किराए की संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए ‘मेट्रो प्लस’ नाम की नई श्रेणी भी जोड़ी है। इसके तहत विभिन्न शहरों और लॉकर के आकार के अनुसार किराए में बड़ी वृद्धि की गई है। उदाहरण के तौर पर, मेट्रो शहरों में एक्स्ट्रा स्मॉल लॉकर का सालाना किराया पहले करीब 1350 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 3300 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में स्मॉल साइज लॉकर का किराया 1650 रुपये से बढ़ाकर लगभग 4000 रुपये कर दिया गया है। यह शुल्क ग्राहकों से सालाना आधार पर अग्रिम लिया जाएगा और इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी अलग से देना होगा। बैंक का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत, सुरक्षा व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। हालांकि ग्राहकों के लिए यह फैसला जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला माना जा रहा है।

लॉकर एक्सेस के लिए आधार बायोमेट्रिक अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी ग्राहक को अपना लॉकर खोलने से पहले आधार कार्ड से जुड़ा बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। यानी लॉकर एक्सेस करने से पहले फिंगरप्रिंट या अन्य बायोमेट्रिक माध्यम से पहचान की पुष्टि की जाएगी। बैंक अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई बैंकों में लॉकर से जुड़े विवाद और चोरी की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे मामलों को रोकने और ग्राहकों की संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए यह अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से लॉकर की सुरक्षा और मजबूत होगी, हालांकि कुछ ग्राहकों को इससे प्रक्रिया थोड़ी लंबी लग सकती है।

ATM से UPI कैश निकालने के नियम बदले

लॉकर शुल्क के साथ ही बैंक ने एटीएम से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब Unified Payments Interface (UPI) के जरिए एटीएम से कैश निकालना भी आपकी मासिक फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन सीमा में शामिल होगा। अब तक कई ग्राहकों को लगता था कि क्यूआर कोड स्कैन कर यूपीआई से एटीएम से नकद निकालना अलग सुविधा है, लेकिन अब इसे सामान्य एटीएम कैश निकासी की तरह ही गिना जाएगा। यानी यदि कोई ग्राहक महीने में मिलने वाली मुफ्त एटीएम निकासी सीमा पार कर लेता है, तो अतिरिक्त लेनदेन पर शुल्क देना पड़ सकता है। यह नियम भी 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा।

डिजिटल बैंकिंग के साथ बदल रहे नियम

पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ी है और बैंक अपनी सेवाओं को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी कारण बैंकिंग सेवाओं के नियमों और शुल्कों में समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती डिजिटल गतिविधियों के कारण सुरक्षा और संचालन लागत भी बढ़ रही है। ऐसे में बैंक कई बार सेवा शुल्क में संशोधन करते हैं।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए

एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने लॉकर शुल्क और एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़े नए नियमों की जानकारी पहले से ले लें। जिन ग्राहकों के पास बैंक लॉकर है, उन्हें नए किराए और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा यूपीआई के जरिए एटीएम से कैश निकालने वाले ग्राहकों को अपनी फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट का भी ध्यान रखना होगा, ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके। कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव बैंकिंग सेवाओं की लागत और उपयोग के तरीके दोनों को प्रभावित करने वाले हैं, इसलिए ग्राहकों के लिए इन नियमों की जानकारी रखना बेहद जरूरी हो गया है।

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