मोहन सरकार ने दी कर्मचरियों को ये सौगात…1 अप्रैल से MP में लागू होगी परिवार पेंशन…नियमों में बड़ा बदलाव, तीन लाख परिवारों को राहत
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपने तीसरे बजट में कर्मचारी वर्ग को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश बजट का आकार 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये रखा गया है। सरकार ने इस बजट को “GYANII” थीम पर केंद्रित किया है, जिसमें गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियलाइजेशन पर विशेष जोर दिया गया है। इसी के तहत परिवार पेंशन के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे।
राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा की घोषणा के अनुसार अब परिवार पेंशन की पात्रता का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले जहां सीमित परिस्थितियों में ही परिवार के सदस्यों को पेंशन का लाभ मिलता था। वहीं अब अविवाहित, तलाकशुदा और विधवा पुत्रियों को भी परिवार पेंशन का अधिकार दिया गया है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक मानवीय और प्रगतिशील पहल माना जा रहा है। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार का मानना है कि कई मामलों में बेटियां ही अपने माता-पिता की देखभाल करती हैं और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस बदलाव से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिवार पेंशन से संबंधित सभी संशोधित प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसके साथ ही पेंशन संबंधी कार्यवाहियों में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करते हुए एक केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली लागू की जाएगी। इससे पेंशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनेगी। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से आवेदन, स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।
तीन लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस बदलाव से तीन लाख से अधिक कर्मचारियों के परिवारजनों को लाभ मिलेगा। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में MSME मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी दी थी कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 को मंजूरी दे दी गई है। इन नियमों के प्रकाशन और क्रियान्वयन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। इससे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत कार्यरत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्पष्ट और व्यवस्थित लाभ मिल सकेगा।
मृत्यु की स्थिति में परिवार पेंशन का प्रावधान
नए प्रावधान के अनुसार यदि किसी कर्मचारी को पेंशन मिल रही है और उनकी मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को परिवार पेंशन प्रदान की जाएगी। इसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों को भी शामिल किया गया है। ई-सेवा पुस्तिका के माध्यम से सेवा विवरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे पात्रता निर्धारण आसान होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को भी जोड़ा जाएगा, जिससे पेंशन की गणना में कर्मचारियों को पूरा लाभ मिल सके। यह प्रावधान उन कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपने करियर में विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्य किया है।
निलंबन अवधि और अंशदान संबंधी प्रावधान
नए नियमों में निलंबन अवधि के दौरान अभिदाता (कर्मचारी) और नियोक्ता (सरकार) के अंशदान का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत अंशदान की दर, उसकी गणना और विलंब की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारण को भी नियमों में शामिल किया गया है। सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र और मृत्यु की स्थिति में निकास (एग्जिट) प्रावधानों को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। इससे पेंशन संबंधी विवादों और देरी की संभावनाएं कम होंगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम
केंद्रीकृत पेंशन व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की आशंका कम होगी। साथ ही, कर्मचारियों और उनके परिजनों को समय पर जानकारी मिलती रहेगी। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी और पेंशन भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करेगी। इससे कर्मचारियों में विश्वास बढ़ेगा और उन्हें भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलेगा।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परिवार पेंशन के नियमों में किया गया यह बदलाव कर्मचारी वर्ग के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अविवाहित, तलाकशुदा और विधवा पुत्रियों को पात्रता देना सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये नियम तीन लाख से अधिक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। डिजिटल और केंद्रीकृत पेंशन प्रणाली से प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और तेज होगी। कुल मिलाकर, यह फैसला राज्य के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है और सामाजिक कल्याण की दिशा में एक सशक्त पहल माना जाएगा।





