ग्रेटर नोएडा में 22 दिसंबर को भाकियू की बड़ी महापंचायत, आगरा तक के किसान होंगे शामिल — राकेश टिकैत बोले, अब आर-पार की लड़ाई
नोएडा। ग्रेटर नोएडा एक बार फिर किसानों के हक की आवाज़ बनने जा रहा है। 22 दिसंबर को यहां भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की ओर से जीरो पॉइंट पर एक बड़ी किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इस महापंचायत में नोएडा से लेकर आगरा तक के हजारों किसान एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्राधिकरण और सरकार के सामने अपनी ताकत दिखाएंगे। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों की रक्षा और उनके पुराने वादों के निस्तारण के लिए निर्णायक साबित होगा।
- ग्रेटर नोएडा में बड़ी महापंचायत
- भाकियू का जीरो पॉइंट आंदोलन
- राकेश टिकैत ने कसी कमर
- नोएडा से आगरा तक जुटान
- किसानों की 10% प्लॉट मांग
- टोल और आबादी निस्तारण मुद्दा
- प्राधिकरण पर दबाव बढ़ाएंगे किसान
- 22 दिसंबर को गूंजेगी आवाज़
- टिकैत ने किया शांतिपूर्ण आंदोलन का ऐलान
- महापंचायत से हिलेगी सरकार-प्राधिकरण
महापंचायत का ऐलान — ग्रेटर नोएडा के जीरो पॉइंट पर जुटेंगे हजारों किसान
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत यूपी के ग्रेटर नोएडा पहुंचे। जहां उन्होंने बिरौंडी स्थित भाकियू कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को जीरो पॉइंट पर विशाल महापंचायत होगी।
टिकैत ने कहा — “अब वक्त आ गया है कि किसानों की आवाज़ फिर से बुलंद हो। टोल, आबादी निस्तारण, और 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट जैसी लंबित मांगों पर सरकार और प्राधिकरण को जवाब देना होगा।” इस बैठक में यमुना प्राधिकरण क्षेत्र से जुड़े जिलों — गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा के जिला अध्यक्ष भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि किसानों की उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आंदोलन का एजेंडा — टोल, मुआवजा और 10% प्लॉट की मांगें प्रमुख
राकेश टिकैत ने बताया कि किसानों की सबसे बड़ी मांग टोल माफी, आबादी निस्तारण, और 10% विकसित प्लॉट के निस्तारण से जुड़ी है। किसान संगठन का कहना है कि प्राधिकरण ने विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की भूमि अधिग्रहित तो कर ली, लेकिन बदले में वादों को पूरा नहीं किया गया। किसानों को मिलने वाला 10% विकसित प्लॉट अब तक नहीं दिया गया। कई गांवों में आबादी निस्तारण की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। टोल टैक्स से गुजरने वाले ग्रामीणों को राहत नहीं दी गई, जबकि यह क्षेत्र उनकी अधिग्रहित जमीन पर ही बसा है। टिकैत ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक और असरदार रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन और तेज चरण में भी जा सकता है।
राकेश टिकैत ने कहा — “सरकार को अब किसानों की सुननी ही होगी”
टिकैत ने कहा कि भाकियू की रणनीति पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा — “किसानों की भूमि लेकर विकास हुआ, लेकिन उनके हक की अनदेखी की गई। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन किसानों का मुआवजा और प्लॉट की समस्या जस की तस है। अब यह महापंचायत इस अन्याय के खिलाफ निर्णायक संदेश देगी। टिकैत ने यह भी कहा कि संगठन की सभी इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को महापंचायत में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
आगरा तक के किसान जुड़ेंगे — आंदोलन का स्वरूप व्यापक
इस महापंचायत में सिर्फ नोएडा या ग्रेटर नोएडा के किसान ही नहीं, बल्कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आगरा तक के किसान भी हिस्सा लेंगे।
भाकियू पदाधिकारियों ने बताया कि यह अब एक क्षेत्रीय नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्तर का आंदोलन बन चुका है। आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और हापुड़ जिलों से किसान अपनी-अपनी ट्रैक्टर रैलियों के साथ ग्रेटर नोएडा पहुंचेंगे।
महापंचायत में उठेंगे विकास और सर्विस रोड के मुद्दे
भाकियू ने इस महापंचायत में भूमि मुआवजा और प्लॉट निस्तारण के साथ-साथ सर्विस रोड निर्माण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि जीरो पॉइंट से आगरा तक सर्विस रोड का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भाकियू नेताओं ने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे यमुना एक्सप्रेसवे को रोककर प्रदर्शन करेंगे।
टिकैत ने महिला क्रिकेट टीम को दी बधाई
इस मौके पर राकेश टिकैत ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को पहला विश्व कप जीतने पर बधाई दी। उन्होंने कहा — “हमारी बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्हें भी विदेशी खिलाड़ियों जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। देश की हर बेटी में प्रतिभा है, बस उसे अवसर चाहिए।”
महापंचायत का असर — सरकार और प्राधिकरण पर दबाव बढ़ने की उम्मीद
राजनीतिक हलकों में इस महापंचायत को लेकर हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राकेश टिकैत का यह कदम यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की आवाज़ को फिर से केंद्र में ला सकता है। 2020 के किसान आंदोलन के बाद यह पहला बड़ा मौका होगा जब पश्चिमी यूपी के किसान एक साथ सड़कों पर उतरेंगे। भाकियू का दावा है कि सरकार और प्राधिकरण दोनों को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा, क्योंकि हजारों किसानों का यह जमावड़ा अब केवल आंदोलन नहीं, बल्कि “अधिकार की हुंकार” बन चुका है।
22 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा का जीरो पॉइंट किसान एकता और संघर्ष का प्रतीक बनने जा रहा है। राकेश टिकैत के नेतृत्व में भाकियू एक बार फिर किसानों की जमीन, मुआवजा और सम्मान की लड़ाई को नई दिशा देने की तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि सरकार किसानों की इन पुरानी मांगों पर क्या रुख अपनाती है — समाधान की राह चुनेगी या फिर संघर्ष का मैदान गरमाएगा। ( प्रकाश कुमार पांडेय)