महाशिवरात्रि 15 फरवरी: नीलकंठ महादेव में उमड़ा आस्था का सैलाब
पैदल मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
ऋषिकेश के Janaki Setu, Lakshman Jhula और नीलकंठ पैदल मार्ग पर हजारों श्रद्धालु हाथों में जल, बेलपत्र और पूजा सामग्री लेकर मंदिर की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। कई श्रद्धालु गंगा से जल भरकर कांवड़ के जरिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। रास्ते भर भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की धुन माहौल को भक्तिमय बना रही है।
जलाभिषेक की तैयारियां तेज
मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। जलाभिषेक के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। मेडिकल कैंप और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
महाशिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। नीलकंठ महादेव मंदिर का संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ा है, जहां भगवान शिव ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी।
अलर्ट मोड पर प्रशासन
भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है और पैदल मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं। महाशिवरात्रि से पहले ही नीलकंठ महादेव में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। 15 फरवरी को यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। शिवभक्तों के जयघोष से पूरा ऋषिकेश क्षेत्र गूंज रहा है।





