महाराष्ट्र: अलग से आरक्षण मिलने के बाद भी क्यों जारी है आंदोलन? जरांगे के प्रदर्शन पर CM फडणवीस ने उठाए सवाल
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा समाज ने आंदोलन तेज कर दिया है। समुदाय की मांग है कि उन्हें ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) कोटे से आरक्षण दिया जाए। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को पहले ही 10% का अलग से आरक्षण दिया जा चुका है, फिर भी ओबीसी आरक्षण की मांग क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है।
फडणवीस ने उठाए सवाल
सीएम फडणवीस ने कहा कि मराठा आरक्षण दिलाने का काम उनकी ही सरकार ने किया था और वह आज भी इसके पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, “मराठा समुदाय को हमने 10% अलग से आरक्षण दिया है। इसके बावजूद अगर वे ओबीसी आरक्षण मांग रहे हैं तो पहले उन्हें तथ्यों और आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत में लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य साफ और व्यावहारिक होना चाहिए।
ओबीसी कटऑफ और प्रतिस्पर्धा का मुद्दा
फडणवीस ने शैक्षणिक प्रवेश और नौकरियों में कटऑफ का उदाहरण देते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग में पहले से ही 350 से अधिक जातियां शामिल हैं। कई बार ओबीसी का कटऑफ, एसीबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) और ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) से ऊपर चला जाता है। ऐसे में यह सोचना जरूरी है कि ओबीसी कोटे में जाने से मराठा समाज को वास्तव में कितना लाभ होगा। सीएम ने साफ किया कि अगर मांग का मकसद केवल राजनीतिक आरक्षण है तो यह अलग बात है, लेकिन अगर उद्देश्य शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक बदलाव है तो समाज के बुद्धिजीवियों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
“आंदोलन राजनीतिक है या सामाजिक?”
सीएम फडणवीस ने आंदोलन के पीछे राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मराठा समाज की असल जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों पर आधारित मांग रखें, ताकि समुदाय को वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा “कुछ राजनीतिक दल मराठा आंदोलन का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहते हैं। लेकिन अंततः इससे आंदोलन को ही नुकसान होगा। हम इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि सामाजिक चश्मे से देख रहे हैं। फडणवीस ने दोहराया कि सरकार न तो मराठा और न ही ओबीसी के साथ अन्याय होने देगी। अदालत से स्वीकृत मराठा आरक्षण को बरकरार रखा जाएगा और किसी का हक छीना नहीं जाएगा।
जरांगे की अगुवाई में आंदोलन
मनोज जरांगे पिछले कई महीनों से मराठा समाज की आरक्षण मांग को लेकर सक्रिय हैं। उनका कहना है कि जब तक मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता, तब तक समुदाय को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। जरांगे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों ने राज्य सरकार पर दबाव बनाया है। हालांकि, फडणवीस का तर्क है कि पहले से मिले 10% आरक्षण और कानूनी स्थिति का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही नई मांग को जायज ठहराया जा सकता है।
विरार हादसे पर दुख और मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान विरार बिल्डिंग हादसे पर भी संवेदना जताई। हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और कहा कि अवैध निर्माणों की जांच की जाएगी। “वसई-विरार में अवैध बिल्डिंग निर्माण की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अब इसकी व्यापक जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
फडणवीस का राहुल गांधी पर तीखा हमला
वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में फडणवीस ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करते हैं। “मुझे लगता है राहुल गांधी का दिमाग खाली हो गया है। कोई राष्ट्रीय नेता प्रधानमंत्री या उनके परिवार पर इस तरह की बातें नहीं करता। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता होने के नाते राहुल को समझदारी और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति का एक अहम सवाल बना हुआ है। मुख्यमंत्री फडणवीस के बयान से यह साफ है कि सरकार मराठा समाज को मिले आरक्षण को बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन ओबीसी में शामिल करने की मांग को लेकर सख्त सवाल खड़े कर रही है। जहां जरांगे का आंदोलन मराठा समाज की आवाज उठाने की कोशिश है, वहीं सरकार मानती है कि राजनीतिकरण से समुदाय का ही नुकसान होगा। अब देखना यह है कि यह संघर्ष आरक्षण की नई परिभाषा तय करता है या एक और लंबी सियासी जंग की शुरुआत करता है। ( प्रकाश कुमार पांडेय)