महाराष्ट्र में नगरीय निकाय चुनावों से पहले सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच पुणे नगर निगम (PMC) चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनावी टिकट देने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कहा कि अपराधियों की जगह नगर निगम में नहीं, बल्कि जेल में होनी चाहिए। फडणवीस का यह बयान न केवल पुणे बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एक ओर सभी राजनीतिक दल मंचों से अपराध मुक्त शासन की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आते ही अपराधियों को टिकट देकर उन्हीं के समर्थन में खड़े नजर आते हैं। उन्होंने इसे गंभीर विरोधाभास बताया और कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक है।
अपराध मुक्त पुणे के दावे पर सवाल
देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में बढ़ते अपराधों और कुख्यात गिरोहों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार भाषणों में सुना है कि ‘कोयता गैंग’ जैसे गिरोहों को खत्म कर दिया जाएगा और शहर से अपराध का पूरी तरह सफाया किया जाएगा। लेकिन अब वही लोग, जो मंच से अपराध मिटाने की बात करते थे, चुनाव के वक्त अपराधियों को टिकट दे रहे हैं और उनके पक्ष में खुलकर बोल भी रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पुणे जैसे बड़े और शिक्षित शहर में, जिसकी आबादी करीब छह लाख बताई जा रही है, क्या ईमानदार और साफ छवि वाले लोग उपलब्ध नहीं थे? उन्होंने कहा कि अगर समाज में अपराध के खिलाफ सच में लड़ाई लड़नी है, तो सबसे पहले राजनीति को अपराध मुक्त बनाना होगा।
“अपराधी जीत भी जाए तो जेल ही जाएगा”
फडणवीस ने दो टूक कहा कि भले ही कोई आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति चुनाव जीत जाए, लेकिन उसकी असली जगह नगर निगम नहीं बल्कि जेल होगी। उन्होंने कहा कि एक गृह मंत्री के तौर पर जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो उनके भीतर का प्रशासनिक अधिकारी सवाल पूछता है कि आखिर यह सब क्या चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस चुनाव में व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहते थे, लेकिन जब कानून व्यवस्था और अपराध जैसे गंभीर मुद्दे सामने आते हैं, तो चुप रहना संभव नहीं होता। उन्होंने भरोसा जताया कि पुणे की जनता ऐसे उम्मीदवारों को स्वीकार नहीं करेगी और मतदान के जरिए उन्हें करारा जवाब देगी।
संजय राउत का पलटवार
इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। संजय राउत ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन चुनाव जीतने के लिए गुंडागर्दी का सहारा लेता है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर इन दलों की मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से हो जाती, तो वे उसके रिश्तेदारों को भी टिकट दे देते।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि पुणे कभी अपनी संस्कृति, शिक्षा और सुंदरता के लिए जाना जाता था, लेकिन आज इसे “गुंडों का शहर” कहा जाने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे भाजपा हो या अजित पवार की पार्टी, शायद ही कोई ऐसा गिरोह हो जिसके रिश्तेदारों को टिकट न दिया गया हो।
“गुंडागर्दी बिना चुनाव नहीं जीत सकते”
संजय राउत ने आरोप लगाया कि महायुति गठबंधन बिना गुंडागर्दी के चुनाव जीत ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि राजनीति में अपराधियों की एंट्री से आम जनता में डर और असंतोष बढ़ रहा है। राउत ने दावा किया कि ऐसे लोग सत्ता में आने के बाद कानून का सम्मान नहीं करते, बल्कि उसका दुरुपयोग करते हैं।
उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे बेबुनियाद आरोप करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष हार के डर से इस तरह के बयान दे रहा है और जनता सब देख रही है।
चुनाव आयोग की घोषणा
गौरतलब है कि महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव की घोषणा कर दी है। इनमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), पुणे नगर निगम (PMC) और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) जैसे बड़े निकाय शामिल हैं। इन सभी निकायों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को मतगणना की जाएगी।
राजनीति और अपराध का पुराना रिश्ता
महाराष्ट्र में राजनीति और अपराध के रिश्ते पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर विभिन्न दलों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे चुनावी फायदे के लिए बाहुबलियों और अपराधियों का सहारा लेते हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव बेहद नजदीक हैं और हर दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है। एक ओर जनता अपराध मुक्त शासन चाहती है, वहीं दूसरी ओर उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता ऐसे बयानों और आरोप-प्रत्यारोप को किस नजर से देखते हैं और मतदान में किसे समर्थन देते हैं। कुल मिलाकर, पुणे नगर निगम चुनाव से पहले अपराधियों को टिकट देने का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गया है और यह बहस चुनाव परिणामों पर भी गहरा असर डाल सकती है।