दिल्ली से वृंदावन तक गूंजा ‘सनातन एकता’ का नारा, धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब
दिल्ली से लेकर वृंदावन तक शुक्रवार को “जय श्री राम” और “सनातन धर्म अमर रहे” के नारे गूंज उठे। बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली के छतरपुर स्थित मां कात्यायनी मंदिर से ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ (Sanatan Hindu Unity March) का शुभारंभ किया। इस विशाल यात्रा में देशभर से पहुंचे हजारों सनातनी श्रद्धालु शामिल हुए। यह यात्रा जातिवाद को समाप्त करने, हिंदू समाज में एकता लाने और राष्ट्रवाद की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
- दिल्ली से वृंदावन तक हुंकार
- धीरेंद्र शास्त्री की एकता यात्रा
- हजारों हिंदुओं की एकजुट पदयात्रा
- जातिवाद खत्म करने का संकल्प
- सनातन धर्म के लिए पदयात्रा
- राष्ट्रवाद और एकता का संदेश
- तिरंगे संग उठी सनातन आवाज
- 40 हजार श्रद्धालु हुए शामिल
- दिल्ली में गूंजी हिंदू एकता
- धर्म, संस्कृति और एकता का संगम
छतरपुर से हुई शुरुआत, वृंदावन तक पहुंचेगा संदेश
‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ का शुभारंभ राष्ट्रगान और हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। इस दौरान पूरा माहौल जयकारों से गूंज उठा। यात्रा दिल्ली के छतरपुर से शुरू होकर हरियाणा के रास्ते वृंदावन तक पहुंचेगी। करीब 145 किलोमीटर लंबी यह यात्रा 10 दिन तक चलेगी, जिसमें हर दिन हजारों श्रद्धालु अलग-अलग पड़ावों से जुड़ते रहेंगे। शास्त्री जी ने यात्रा का नेतृत्व करते हुए कहा, “यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरण है। हमारा उद्देश्य जातिवाद खत्म कर हिंदू समाज में एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देना है।”
40 हजार से अधिक लोगों का हुआ पंजीकरण
बागेश्वर धाम परिवार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, करीब 40,000 श्रद्धालुओं ने इस यात्रा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। यात्रा में साधु-संतों, भजन मंडलियों, महिला भक्त समूहों और युवाओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। यात्रा में शामिल लोग भगवा झंडे, तिरंगा और ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ आगे बढ़े। हर पड़ाव पर सुबह सामूहिक हनुमान चालीसा, दोपहर में संवाद सत्र और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। यात्रा के दौरान प्रतिदिन सात “संस्कार प्रतिज्ञाएं” ली जाएंगी — जिनमें जातिवाद का विरोध, राष्ट्रप्रेम, सनातन धर्म रक्षा, महिला सम्मान और पर्यावरण संरक्षण प्रमुख हैं।
जातिवाद खत्म करने का संकल्प
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि “जातिवाद हिंदू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है।” उन्होंने कहा, “हम सभी सनातनी एक हैं। न कोई ऊंचा, न कोई नीचा। भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे, क्योंकि उनके लिए भक्ति ही सबसे बड़ा धर्म था। हम जाति से नहीं, कर्म और आस्था से पहचाने जाएंगे।” उन्होंने आगे कहा कि यह यात्रा हिंदू समाज को जोड़ने की एक कोशिश है, तोड़ने की नहीं।“हमारा उद्देश्य किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। हम किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सनातन की रक्षा और समाज की एकता के लिए निकले हैं।”
तीन राज्यों से होकर गुजरेगी यात्रा
यह यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश — तीन राज्यों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान प्रमुख पड़ावों में गुड़गांव, पलवल, मथुरा और अंत में वृंदावन शामिल हैं।हर जगह स्थानीय संत-महात्मा, धर्माचार्य और समाजसेवी यात्रा में शामिल होंगे। अंतिम दिन वृंदावन में “एक भारत, एक धर्म, एक संस्कार” विषय पर विशाल संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
राजनीतिक दलों को भी भेजा निमंत्रण
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र भेजकर इस यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। “अगर किसी के दिल में हिंदुत्व और राष्ट्रप्रेम की भावना है, तो वह इस यात्रा में स्वागत योग्य है। यह किसी पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की यात्रा है।”
“हम मुसलमानों के खिलाफ नहीं, सनातन के पक्ष में हैं”
शास्त्री जी ने स्पष्ट कहा कि यह यात्रा किसी समुदाय के विरोध में नहीं है।“हम मुसलमानों या किसी अन्य धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि हर हिंदू को अपने धर्म, अपने तिरंगे और अपने राष्ट्र पर गर्व होना चाहिए। हिंदू धर्म को कमजोर करने की साजिशों को अब समाप्त करना होगा।उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें, हमारी संस्कृति अक्षुण्ण रहे और गंगा-जमुनी तहजीब कायम रहे।
युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी
इस पदयात्रा की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं शामिल हुईं। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश से लोग विशेष बसों और ट्रेनों से पहुंचे। महिला समूहों ने भगवा पताका लहराते हुए कहा कि “अब सनातन को विभाजन नहीं, एकता चाहिए। हम धीरेंद्र शास्त्री के साथ मिलकर जातिवाद मिटाने का संकल्प लेकर चले हैं।”
सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी रंग में रंगी यात्रा
पदयात्रा के दौरान रामधुन, भक्ति गीत, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से पूरा वातावरण धार्मिक और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक तिरंगा और भगवा ध्वज लिए पैदल चल रहे थे। शास्त्री जी स्वयं हर पड़ाव पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए “सनातन धर्म, संस्कार और राष्ट्रप्रेम” का संदेश दे रहे हैं।
अंतिम पड़ाव वृंदावन में होगा ‘सनातन महासम्मेलन’
यात्रा का समापन वृंदावन में भव्य आयोजन के साथ होगा, जहां देशभर के संत, महात्मा, विद्वान और सामाजिक संगठन शामिल होंगे। यहां ‘सनातन हिंदू एकता महासम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें जातिवाद उन्मूलन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र एकता पर चर्चा होगी।
संदेश साफ — एक भारत, एक धर्म, एक संकल्प
‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के नेतृत्व में यह यात्रा हिंदू समाज को यह संदेश दे रही है कि “जब तक जातिवाद रहेगा, हिंदू समाज कमजोर रहेगा; और जब तक एकता रहेगी, भारत अजेय रहेगा। दिल्ली से वृंदावन तक चल रही यह यात्रा सनातन धर्म, एकता और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बन चुकी है। हजारों लोगों की आस्था और भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक आंदोलन का रूप दे दिया है, जो आने वाले समय में समाजिक सौहार्द और हिंदू एकता की नई मिसाल पेश कर सकता है। (प्रकाश कुमार पांडेय)