महानदी जल विवाद: छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने की विवाद को सुझाने की ये नई पहल…!
महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए अब छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरकारों ने बातचीत का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। लंबे समय से चली आ रही खींचतान को खत्म करने के लिए दोनों राज्यों ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत दोनों राज्यों की तकनीकी समितियाँ हर सप्ताह बैठक करेंगी और विवाद का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास करेंगी।
नई दिल्ली में हुई बैठक
नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों की बैठक हुई। बैठक में सहमति बनी कि संयुक्त टीम बनाई जाएगी, जिसमें दोनों राज्यों के इंजीनियर और विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह टीम पानी के बँटवारे, परियोजनाओं और आपसी तालमेल से जुड़े मुद्दों पर हर हफ़्ते चर्चा करेगी।
आगे की रणनीति
सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियाँ साप्ताहिक बैठक करेंगी। अक्टूबर 2025 में मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों की एक और बैठक होगी। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर मुलाक़ात की संभावना है, यदि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी।
क्या है महानदी जल विवाद?
महानदी छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से निकलकर ओडिशा होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने नदी पर कई बाँध और बैराज बनाकर पानी रोक लिया है, जिससे राज्य में गर्मियों और खेती के मौसम में पानी की भारी कमी हो जाती है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ का कहना है कि उसकी योजनाएँ अपनी ज़रूरत के अनुसार हैं और ओडिशा को भी पर्याप्त पानी मिलता है।
इस मुद्दे को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई बार विवाद बढ़ा और केंद्र सरकार को बीच में आना पड़ा। इसी उद्देश्य से केंद्र ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन भी किया था।
क्यों अहम है यह पहल?
इस नए प्रयास से उम्मीद की जा रही है कि दोनों राज्य आपसी समझौते और सहयोग से समाधान ढूँढ पाएँगे। तकनीकी स्तर पर नियमित बातचीत से विवाद के बिंदु स्पष्ट होंगे और राजनीतिक टकराव की स्थिति से बचा जा सकेगा। अगर मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक होती है तो यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा कि दोनों राज्य आपसी संवाद से आगे बढ़ना चाहते हैं। यह पहल न सिर्फ दोनों राज्यों के लिए, बल्कि लाखों किसानों और नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आई है।—( प्रकाश कुमार पांडेय)