संगम नगरी प्रयागराज में पहले स्नान के साथ के महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है। लाखों श्रद्धालु संगम के तट पर आ चुके हैं। साधु संतों के बाद श्रद्धालुओं ने सुबह त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। 12 साल के बाद महाकुंभ मेला का आयोजन किया जा रहा है।
- सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान है महाकुंभ
- महाकुंभ मेला में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं
- क्या है महाकुंभ में राजा अकबर की किला की कहानी
- क्या है 13 अखाड़े में महामंडलेश्वर महंत की विशेषताएं
महाकुंभ को सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। महाकुंभ मेला में लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कहते हैं जो भी ताजक कुंभ स्नान करते हैं। उसके सभी पाप मिट जाते हैं। इतना ही नहीं मनोकामनाएं भी पूरी होतीं हैं। महाकुंभ दौरान विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी पौष पूर्णिमा से महाकुंभ की शुरूात हो चुकी है। अब जानते हैं कि महाकुंभ मेले के पीछे की कहानी क्या है। साथ ही जानेंगे महाकुंभ का धार्मिक महत्व भी जानते हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कुंभ मेले का आयोजन 850 साल से भी ज्यादा पुराना है। आदि शंकराचार्य की ओर से महाकुंभ की शुरुआत की गई थी। कुछ धार्मिक कथाओं में उल्लेख किया गया है कि कुंभ का आयोजन समुद्र मंथन के बाद से ही किया जाता रहा है। जबकि कई विद्वान मानते हैं कि गुप्त काल के दौरान से ही इसकी शुरुआत हुई थी। सम्राट हर्षवर्धन से महाकुंभ के प्रमाण देखने को मिलते हैं। इसके बाद शंकराचार्य और उनके शिष्यों ने संन्यासी अखाड़ों के लिए संगम तट पर शाही स्नान के इंतजाम किये।
माना जाता है कि कुंभ का आयोजन राजा हर्षवर्धन के राज आरंभ हुआ था। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग जब भारत की यात्रा पर आए तो उन्होंने कुंभ मेले के आयोजन का उल्लेख अपने लेख में किया था। इसी के साथ उन्होंने राजा हर्षवर्धन का भी उल्लेख किया है। उनके दयालु स्वभाव के बारे में भी चीनी यात्री ह्वेनसांग ने जिक्र किया था। ह्वेनसांग ने लिखा था कि राजा हर्षवर्धन लगभग हर 5 साल में नदियों के संगम तट पर एक बड़ा धार्मिक आयोजन करते थे। जिसमें वे अपना पूरा कोष गरीबों की मदद और धार्मिक लोगों को दान में देने में किया करते थे।
- देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
- पौष पूर्णिमा का किया स्नान
- पूर्णिमा तिथि से महाकुंभ की शुरुआत
- सुबह 5.03 बजे से प्रारंभ हुई पूर्णिमा तिथि
- पहला शाही स्नान मकर संक्रांति पर होगा
- 14 जनवरी पर होगा पहला शाही स्नान
- शाही स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.27 से शुरू होगा
- शाही स्नान का मुहूर्त शाम 6.21 बजे तक रहेगा
- विजय मुहूर्त दोपहर 2.15 से 2.57 बजे तक होगा
- गोधूलि का मुहूर्त शाम 5.42 बजे से 6.09 बजे तक होगा
महाकुंभ इस बार भव्य और दिव्य दिखाई देने लगा है। माघ पूर्णिमा के स्नान के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है। कहा जाता है कि महाकुंभ स्नान की शुरुआत पूर्णिया से होती है। उसके बाद 14 तारीख को मकर संक्रांति पर अमृत स्नान होता है। अखाड़ों के संत भाव और दिव्य तरीके से स्नान करते हैं। प्रयागराज महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। जिसका शुभारंभ सोमवार को शुरू हो चुका है। सनातन आस्था के महापर्व महाकुंभ करीब डेढ़ महीने तक चलेगा। इस आयोजन में देश-दुनिया से करीब 35 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के प्रयागराज आने का अनुमान जताया जा रहा है। यह श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम तट पर अमृत स्नान कर रहे हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालु एक माह तक यहां नियम और विधि पूर्वक संगम तट पर कल्पवास भी करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यूपी प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से विशेष इंतजाम किए गये हैं। कल्पवास की शुरुआत आज सोमवार को पौष पूर्णिमा से हो चुकी है।